जानिए खुश क्यों हैं चुनावी तारीखों के फेर में मौजूदा प्रधान? 'पंचायत चुनाव जितने लेट हों, उतना अच्छा'

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा राहत मौजूदा प्रधानों को मिलती दिखाई दे रही है। कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद चुनाव की घोषणा न होने से उनकी प्रधानी जारी है और उन्हें मिलने वाले अधिकार और लाभ भी मिल रहे हैं। यही वजह है कि अधिकतर वर्तमान प्रधान चाहते हैं कि चुनाव जितना देर से हो, उतना ही उनके लिए फायदेमंद रहेगा।

जानिए खुश क्यों हैं चुनावी तारीखों के फेर में मौजूदा प्रधान? 'पंचायत चुनाव जितने लेट हों, उतना अच्छा'


 प्रदेश में पंचायत और विधानसभा चुनावों की तारीखों का भले ही अब तक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन जमीनी स्तर पर चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच चुकी है। ग्रामीण इलाकों से लेकर शहरों के चौक-चौराहों तक, चाय की दुकानों से लेकर पंचायत भवनों तक हर जगह सियासी चर्चाओं का दौर तेज है। 


चुनाव कब होंगे, कौन जीतेगा, किसे टिकट मिलेगा और किसकी सीट आरक्षित हो जाएगी, इन तमाम सवालों के बीच राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। अप्रैल में जारी अंतिम मतदाता सूची ने इस पूरे माहौल में नई हलचल पैदा कर दी है। 


करीब 16.12 प्रतिशत वोटरों के नाम सूची से हटाए जाने को लेकर विपक्षी दलों से जुड़े मौजूदा प्रधान, पूर्व प्रधान और कार्यकर्ता खुलकर सवाल उठा रहे हैं। उनका मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर नाम हटने से चुनावी नतीजों पर सीधा असर पड़ेगा। गांवों में इसे लेकर चर्चा और बहस का दौर तेज हो गया है, वहीं राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो चुके हैं।


इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा राहत मौजूदा प्रधानों को मिलती दिखाई दे रही है। कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद चुनाव की घोषणा न होने से उनकी प्रधानी जारी है और उन्हें मिलने वाले अधिकार और लाभ भी मिल रहे हैं। यही वजह है कि अधिकतर वर्तमान प्रधान चाहते हैं कि चुनाव जितना देर से हो, उतना ही उनके लिए फायदेमंद रहेगा।

फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से तारीखों को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि माहौल पूरी तरह चुनावी हो चुका है। गांवों में बैठकों का दौर, रणनीतियों की चर्चा और राजनीतिक सक्रियता लगातार बढ़ रही है। आने वाले समय में जैसे ही चुनाव की घोषणा होगी, यह सियासी गर्मी और तेज होने के आसार हैं।