14 घंटे का दिन, परछाई भी नहीं दिखती, धरती पर 21 जून क्यों होता है साल का सबसे बड़ा दिन?

NASA वैज्ञानिकों के अनुसार, 21 जून के दिन पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध सूर्य की तरफ अपने अधिकतम झुकाव पर होता है. इस दिन सूर्य की सीधी किरणें भूमध्य रेखा के उत्तर में कर्क रेखा  पर सीधे 90 डिग्री के एंगल से पड़ती हैं. इस कारण उत्तरी गोलार्द्ध को इस दिन सूर्य की रोशनी सबसे ज्यादा समय के लिए मिलती है. उत्तरी गोलार्द्ध में भारत, अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देश आते हैं.

 14 घंटे का दिन, परछाई भी नहीं दिखती, धरती पर 21 जून क्यों होता है साल का सबसे बड़ा दिन?

साल का सबसे बड़ा दिन 21 जून और कभी-कभी 22 जून को होता है. इस साल 2026 में सबसे बड़ा दिन 21 जून रविवार को है. खगोलीय गणना के अनुसार, इस दिन भारत में दिन की अवधि लगभग 13 घंटे 58 मिनट की होगी. इस दिन के बाद सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायन की ओर अपनी यात्रा शुरू करेंगे. इसे विज्ञान की भाषा में ग्रीष्म संक्रांति कहा जाता है. इस घटना के पीछे अहम खगोलीय  और वैज्ञानिक वजहें हैं. साथ ही ज्योतिष शास्त्र  में भी इसे बेहद खास माना गया है.

धरती पर सबसे बड़ा दिन: वैज्ञानिक और खगोलीय कारणखगोल वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी सूर्य के चक्कर लगाती है, लेकिन वह अपनी धुरी (Axis) पर बिल्कुल सीधी खड़ी नहीं है. वह साढ़े 23 डिग्री झुकी हुई है. इस झुकाव और सूर्य की परिक्रमा के वजह से ही पृथ्वी पर मौसम बदलता है और दिन-रात छोटे-बड़े होते जाते हैं.


NASA वैज्ञानिकों के अनुसार, 21 जून के दिन पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध सूर्य की तरफ अपने अधिकतम झुकाव पर होता है. इस दिन सूर्य की सीधी किरणें भूमध्य रेखा के उत्तर में कर्क रेखा  पर सीधे 90 डिग्री के एंगल से पड़ती हैं. इस कारण उत्तरी गोलार्द्ध को इस दिन सूर्य की रोशनी सबसे ज्यादा समय के लिए मिलती है. उत्तरी गोलार्द्ध में भारत, अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देश आते हैं.


सूर्य आकाश में बहुत ऊंचे स्थान पर होता है, इसलिए उसे पूर्व से पश्चिम तक का सफर तय करने में सबसे लंबा समय लगता है. 21 जून को दिन की अवधि भारत में दिन लगभग 13 से 14 घंटे लंबा होती है. अलग-अलग जगहों पर समय में थोड़ा बदलाव होता है. इस दिन रात की अवधि लगभग 10 से 11 घंटे होती है, यानी साल की सबसे छोटी रात. 


बता दे कि खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वालों के लिए 21 जून का दिन बेहद खास होने वाला है. इस साल 2026 में 21 जून यानि रविवार को साल का सबसे लंबा दिन पड़ने वाला है, जब सूर्य की रोशनी धरती पर रिकॉर्डतोड़ समय के लिए रहेगी. भारत में इस दिन धूप करीब 13 घंटे 58 मिनट के लिए रहेगी, यानि करीब 14 घंटे तक रोशनी ही रहेगी. इस दिलचस्प घटना के पीछे दोपहर में एक वक्त ऐसा भी आता है, जब आपकी परछाई भी आपका साथ छोड़ देती है.

इस दिन दोपहर के समय जब सूर्य हमारे सिर के ठीक ऊपर होता है, तो हमारी परछाईं गायब हो जाती है। इसे 'जीरो शैडो डे' कहते हैं। वहीं, ठीक इसके उलट दक्षिणी गोलार्ध ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अमेरिका आदि में इस दिन साल की सबसे लंबी रात और सबसे छोटा दिन होता है, और वहां सर्दियों की शुरुआत हो रही होती है।

जानें क्या है ज्योतिष और आध्यात्मिक महत्व
ज्योतिष शास्त्र में इस घटना का गहरा महत्व है। इस दिन सूर्य मिथुन राशि से निकलकर कर्क राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे 'कर्क संक्रांति' कहा जाता है। कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है, जो भावनाओं और मन का प्रतीक है। सूर्य का इस राशि में आना ऊर्जा का एक अद्भुत संतुलन माना जाता है। आपको बता दें, 21 जून के बाद से ही सूर्य 'उत्तरायण' से 'दक्षिणायन' की ओर अपनी यात्रा शुरू करते हैं। धार्मिक मान्यताओं में दक्षिणायन का समय संयम, साधना, व्रत और आध्यात्मिक उन्नति के लिए बहुत उत्तम माना गया है।


साल के इस सबसे बड़े दिन के पीछे ब्रह्मांड का सीधा और दिलचस्प नियम काम करता है. इस दिन धरती अंतरिक्ष में सूरज के चक्कर तो काटती है, लेकिन वह बिल्कुल सीधी होने की बजाय अपनी धुरी पर साढ़े 23 डिग्री झुकी हुई है. धरती के इसी झुकाव और सूर्य की परिक्रमा के तालमेल के कारण ही धरती पर अलग-अलग मौसम बदलते हैं. इसीलिए सालभर में दिन और रात की अवधियों में लंबा फर्क देखने को मिलता है.