क्या आज भारत में दिखेगा साल 2026 का आखिरी सूर्य ग्रहण? खगोलीय घटना का सही समय, सूतक काल समेत पूरी डिटेल
भारतीय समयानुसार, यह खगोलीय घटना आज रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन मध्य रात्रि के बाद 1 बजकर 27 मिनट पर होगा। रात 11 बजकर 16 मिनट पर यह अपने चरम पर होगा। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 4 घंटे और 24 मिनट का समय लगेगा।
साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण आज यानी 12 अगस्त के रात को लगने जा रहा है। ज्योतिष में सूर्य को हमारी आत्मा, ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक माना गया है। आज रात लगने वाला यह पूर्ण सूर्य ग्रहण कई मायनों में खास है, क्योंकि इस दौरान कुछ दुर्लभ ग्रह संयोग भी बन रहे हैं।
भारतीय समयानुसार, यह खगोलीय घटना आज रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन मध्य रात्रि के बाद 1 बजकर 27 मिनट पर होगा। रात 11 बजकर 16 मिनट पर यह अपने चरम पर होगा। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 4 घंटे और 24 मिनट का समय लगेगा।
रात करीब 10 बजकर 29 मिनट पर चंद्रमा, सूर्य के लगभग 90 फीसदी हिस्से को अपनी छाया से ढक लेगा, जो इस ग्रहण का सबसे खूबसूरत पल होगा।
अगर आप भारत में हैं और इस खगोलीय घटना को देखने का इंतजार कर रहे हैं, तो आपको थोड़ी निराशा हो सकती है क्योंकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। यह मुख्य रूप से दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे, तंजानिया, जाम्बिया, मॉरिशस, अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में नजर आएगा।
चूंकि भारत में यह दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सूतक काल भी लागू नहीं होगा। इसका सीधा मतलब है कि देश में पूजा-पाठ, मंदिरों के कपाट बंद करने या रोजमर्रा के कामों पर कोई पाबंदी नहीं रहेगी। गर्भवती महिलाओं को भी किसी तरह के खास नियम मानने या घबराने की जरूरत नहीं है।
ज्योतिष की दुनिया में इस ग्रहण को काफी गंभीरता से लिया जा रहा है, क्योंकि यह कर्क राशि और शतभिषा नक्षत्र में लग रहा है। इस दौरान एक बेहद दुर्लभ संयोग बन रहा है। देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि में उदित हो रहे हैं, जो सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक हैं। वहीं शनि देव मीन राशि में उल्टी चाल चल रहे हैं, जो कड़े अनुशासन का संकेत देते हैं।
कर्क एक जल तत्व की राशि है। इसी राशि में ग्रहण लगने की वजह से दुनिया के कुछ हिस्सों में पानी से जुड़ी प्राकृतिक आपदाएं, सुनामी या भूकंप जैसी घटनाओं की आशंका जताई गई है। इसके अलावा, महाराष्ट्र, बंगाल, ओडिशा और तमिलनाडु जैसे समुद्री तट वाले राज्यों में भी मौसम या राजनीति से जुड़ी हलचल तेज हो सकती है।
भारत की नाम राशि भी कर्क ही मानी जाती है। ऐसे में ज्योतिषीय आकलन के अनुसार, देश के भीतर कुछ आंतरिक मतभेद उभर सकते हैं। जनता और सरकार के बीच विवाद या तनातनी की स्थिति बन सकती है।
राजनीति, प्रशासन और नेतृत्व से जुड़े लोगों, खासकर उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों के लिए यह समय थोड़ी चुनौतियां लेकर आ सकता है।
ज्योतिषाचार्यों का सुझाव है कि इस दौरान मन की शांति और सकारात्मकता के लिए भगवान सूर्य के मंत्रों जैसे- 'ऊं घृणि सूर्याय नमः' या 'ऊं सूर्याय नमः', सूर्य स्तोत्र या गायत्री मंत्र का जाप करना बहुत शुभ रहता है। जिनकी कुंडली में सूर्य कमजोर है, उन्हें विशेष रूप से इस दौरान ध्यान करना चाहिए।
वैज्ञानिक नजरिए से देखें तो ग्रहण के दौरान खाना-पीना छोड़ने का कोई ठोस आधार नहीं है। बच्चे, बुजुर्ग और मरीज अपनी जरूरत के अनुसार आराम से अपना भोजन और पानी ले सकते हैं। स्वास्थ्य से समझौता नहीं करना चाहिए।
ग्रहण खत्म होने के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंदों को दान-पुण्य करना शुभ फलदायी माना गया है। साथ ही, जहां ग्रहण दिख रहा हो, वहां लोगों को इसे बिना सही सोलर फिल्टर या चश्मे के सीधे देखने से बचना चाहिए।
इस सूर्य ग्रहण का असर कन्या, तुला और कुंभ राशि वालों के लिए काफी शुभ और सकारात्मक रहने की उम्मीद है। वहीं मेष, मिथुन, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु, मकर और मीन राशि के जातकों को कुछ मामलों में थोड़ी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
हालांकि, ज्योतिष शास्त्र यह भी साफ करता है कि किसी भी व्यक्ति पर ग्रहण का असली असर उसकी अपनी व्यक्तिगत जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है। इसलिए सिर्फ राशि सुनकर डरने या अफवाहों पर आंख मूंदकर भरोसा करने की जरूरत नहीं है।
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