सिर दर्द बन गया 'नितिन' नाम! उत्तराखंड में एसआईआर का सेकेंड फेज
इन नामों पर आपत्तियों की संख्या सौ से अधिक है। एक ही नाम से बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज होने के मामलों का सत्यापन अब ईआरओ स्तर पर किया जा रहा है। खासकर उन विधानसभा क्षेत्रों में, जहां समान नाम वाले मतदाताओं की संख्या अधिक है, वहां दावों और आपत्तियों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
उत्तराखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची को लेकर आपत्तियों के आंकड़ों में दिलचस्प बात सामने आई है।
यह देखा गया है कि एक ही आवेदक 150 से आपत्ति दर्ज करा चुका है। यद्यपि, अब आपत्ति करने वाले आवेदक और जिस के खिलाफ आपत्ति दर्ज हुई है दोनों को ही नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) दोनों पक्षों को सुनने के बाद इस पर अंतिम निर्णय लेंगे।
प्रदेश में अब तक 12,209 आपत्ति आवेदन दर्ज किए गए हैं। इनमें सबसे अधिक 156 आपत्तियां नितिन नाम से दर्ज हुई हैं। ये सभी आपत्तियां जसपुर और किच्छा विधानसभा क्षेत्रों से संबंधित बताई गईं हैं। इसके बाद विनीत गिरि गोसाई नाम से 126 आपत्तियां दर्ज हुई हैं। इसी तरह कार्तिक नाम से 125, अशोक प्रसाद के नाम से 113 और अभिषेक तिवारी नाम से 104 आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
इन नामों पर आपत्तियों की संख्या सौ से अधिक है। एक ही नाम से बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज होने के मामलों का सत्यापन अब ईआरओ स्तर पर किया जा रहा है। खासकर उन विधानसभा क्षेत्रों में, जहां समान नाम वाले मतदाताओं की संख्या अधिक है, वहां दावों और आपत्तियों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है।
सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तूदास का कहना है कि ईआरओ ही ऐसे प्रकरणों में दोनों पक्षों को सुनवाई पर बुलाते हुए अंतिम निर्णय लेंगे।
प्रदेश में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के तहत दावे और आपत्तियों का समय 13 अगस्त तक रखा गया है। इस दौरान फार्म छह यानी नए आवेदन, फार्म सात यानी नाम हटाने और फार्म आठ यानी नामावली में त्रुटियों को दूर करने के आवेदन स्वीकृत होंगे।
इन्हीं नामों को प्रक्रिया पूरी होने के बाद 15 सितंबर वाली मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। आवेदन इसके बाद भी लिए जाएंगे लेकिन इन पर 15 सितंबर से पहले विचार नहीं होगा। इनकी प्रक्रिया 15 सितंबर के बाद चलेगी।
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