सावन का पहला सोमवार: काशी से लेकर प्रयागराज तक...सावन के पहले सोमवार पर शिवालयों में आस्था का सैलाब
'हर-हर महादेव', 'ॐ नमः शिवाय' और 'बम-बम भोले' के गगनभेदी जयकारों और शिव भजनों की गूंज से मंदिर प्रांगण भक्तिमय हो उठे। हाथों में गंगाजल, बेलपत्र, भांग, धतूरा और पुष्प लिए शिवभक्त अपनी बारी के इंतजार में लंबी कतारों में खड़े रहे और भोलेनाथ का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि व मंगल की कामना की।
बरेली के नाथ मंदिर रविवार आधी रात के बाद से हर-हर महादेव उद्घोष से गूंजने लगे और जलाभिषेक का क्रम शुरू हो गया। किला स्थित अलखनाथ मंदिर में रात से ही शिवभक्तों ने कतार में लगकर भोलेनाथ का अभिषेक किया। यहां शाम से ही भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। आरती के बाद जलाभिषेक शुरू हुआ।
शहर के नाथ मंदिरों को रंग-बिरंगी लाइटों व केसरिया झंडों से भव्य रूप से सजाया गया है। त्रिवटीनाथ मंदिर के मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल ने बताया कि रविवार रात 2:30 बजे से जलाभिषेक का क्रम शुरू हो गया। लाल रंग की टी-शर्ट में स्वयंसेवकों को तैनात किया गया है। ये श्रद्धालुओं की मदद करेंगे।
आज श्रावण मास के पहले सोमवार पर पूरा प्रदेश शिवभक्ति के अलौकिक रंग में रंगा नजर आया। तड़के ब्रह्ममुहूर्त से ही काशी, प्रयागराज समेत प्रदेश भर के शिवालयों में श्रद्धालुओं और कांवड़ियों का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
'हर-हर महादेव', 'ॐ नमः शिवाय' और 'बम-बम भोले' के गगनभेदी जयकारों और शिव भजनों की गूंज से मंदिर प्रांगण भक्तिमय हो उठे।
हाथों में गंगाजल, बेलपत्र, भांग, धतूरा और पुष्प लिए शिवभक्त अपनी बारी के इंतजार में लंबी कतारों में खड़े रहे और भोलेनाथ का जलाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि व मंगल की कामना की।
बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए काशी में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी है। आज मंगला आरती के बाद से ही जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग गया। प्रशासन के अनुसार, सुबह 4 बजे से 8 बजे तक दो लाख 35 हजार श्रद्धालुओं ने बाबा के दर्शन किए।
कैंट स्थित धोपेश्वरनाथ मंदिर में शाम से ही कांवड़ियों के जत्थों का पहुंचना शुरू हो गया था। रात 2:30 बजे आरती के बाद कपाट खोल दिए गए। बाबा के जयकारों से मंदिर गूंज उठा। मंदिर के पुजारी घनश्याम ने बताया कि सभी तैयारियां पहले ही पूरी कर ली गईं। सुभाषनगर स्थित तपेश्वरनाथ मंदिर, मढीनाथ मंदिर, पशुपतिनाथ मंदिर, वनखंडीनाथ मंदिर में भी तड़के से ही जलाभिषेक शुरू हो गया।
सावन माह के पहले सोमवार को रामनगरी के पौराणिक नागेश्वरनाथ मंदिर में आस्था का ज्वार उमड़ पड़ा। ब्रह्ममुहूर्त से ही शिवभक्तों की लंबी कतार लगनी शुरू हो गईं। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का गंगाजल, सरयू जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित कर सुख-समृद्धि व परिवार की मंगलकामना की।
शहर के अलग-अलग इलाकों से डाक कांवड़ व मोटर साइकिल पर कांवड़ियों की टोलियां जल लेने के लिए कछला की ओर रवाना हुईं। शाहबाद से भी कांवड़ियों का बड़ा जत्था कछला के लिए रवाना हुआ। जत्थे के महंत रुद्र पांडे ने बताया कि रात में कछला से जल भरकर सोमवार को नाथ मंदिरों में जलाभिषेक करेंगे। किला, सीबीगंज, फतेहगंज पश्चिमी समेत अन्य जगह से भी डीजे की धुन पर नाचते-गाते कांवड़ियों के जत्थे रवाना हुए। कछला से जल लेकर पीलीभीत, पूरनपुर के कई जत्थे बरेली होते हुए निकले।
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