मर्डर का दोषी पैरोल से भागकर बना सरकारी टीचर, 'Best Teacher' का अवॉर्ड भी जीता; 40 साल बाद फिर पहुंचा जेल

कोर्ट ने साफ कहा कि 40 साल तक किसी कैदी का इस तरह गायब रहना और बिना रोक-टोक सरकारी नौकरी करना, बिना गार्ड के पैरोल देने वाले जेल प्रशासन की व्यवस्था की पोल खोलता है. स्वास्थ्य के आधार पर मांगी गई पैरोल को भी कोर्ट ने यह कहकर ठुकरा दिया कि जेल में इलाज की पूरी सुविधा मौजूद है.

Aug 29, 2026 - 20:49
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मर्डर का दोषी पैरोल से भागकर बना सरकारी टीचर, 'Best Teacher' का अवॉर्ड भी जीता; 40 साल बाद फिर पहुंचा जेल


मर्डर  के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे एक कैदी को दिसंबर 1983 में मात्र 91 दिनों की पैरोल मिली थी, लेकिन वो 4 दशक तक जेल से बाहर रहने में कामयाब रहा. इस दौरान ना तो वो अंडरग्राउंड हुआ, ना ही दूसरे देश भागा. बल्कि इस सब के उलट, उसने बाकायदा सरकारी टीचर की नौकरी हासिल की. साल 2004 में बेस्ट टीचर का अवार्ड  जीता और फिर साल 2013 में मजे से रिटायर  भी हो गया. लेकिन पुलिस को भनक तक नहीं लगी.


उसकी गिरफ्तारी के लिए बनाई गई स्पेशल टास्क फोर्स को 16 मई 2024 में उसकी लॉकेशन मिली, जिसके बाद उसे गिरफ्तार करके वापस सेंट्रल जेल भेज दिया गया. तब तक वो कैदी 73 साल का हो गया था. 


जेल लौटने पर उसकी 27 दिन की जमा की गई छूट (रेमिशन) रद्द कर दी गई और तीन साल तक पैरोल या फर्लो पर रोक लगा दी गई. इस कार्रवाई के खिलाफ उसकी पत्नी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और 40 साल की लंबी देरी का हवाला देते हुए पति की उम्र और खराब स्वास्थ्य के आधार पर मेडिकल पैरोल की मांग की.


द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी वकील ने हाई कोर्ट में इस याचिका का विरोध करते हुए कहा, 'पैरोल कोई जन्मसिद्ध अधिकार नहीं है. अगर कोई कैदी पैरोल की शर्तें तोड़ता है, तो उसे सजा मिलना तय है. 


जब यह कैदी पैरोल खत्म होने के बाद वापस नहीं लौटा था, तब पुलिस अधीक्षक को कई चिट्ठियां लिखी गई थीं और अंत में उसे पकड़ने के लिए खास टीम बनाई गई थी, जिसने अब उसे गिरफ्तार किया है. उसने खुद सरेंडर नहीं किया है. ऐसे में पैरोल नहीं दी जानी चाहिए.'


जस्टिस टी माधवी देवी ने इस केस की सुनवाई करते हुए कहा कि यह कैदी अपने जीवन का सबसे बेहतरीन समय जेल से बाहर बिताने में कामयाब रहा है. उसने अपनी सजा की बात छिपाकर धोखे से सरकारी नौकरी हासिल की और सारे फायदे उठाए. 


कोर्ट ने साफ कहा कि 40 साल तक किसी कैदी का इस तरह गायब रहना और बिना रोक-टोक सरकारी नौकरी करना, बिना गार्ड के पैरोल देने वाले जेल प्रशासन की व्यवस्था की पोल खोलता है. स्वास्थ्य के आधार पर मांगी गई पैरोल को भी कोर्ट ने यह कहकर ठुकरा दिया कि जेल में इलाज की पूरी सुविधा मौजूद है.

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Mishra Shivani

Shivani Mishra Chief Desk Editor in NewsAsr.com and having vast experience in field of Journalism

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