'औरतें आलसी हो गईं' पुलिस के ताने ने स्वीटी को बना दिया अफसर, 1st अटेंप्ट में क्रैक किया था PCS

स्वीटी उपाध्याय, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के कटरा की रहने वाली हैं। उनकी स्कूलिंग प्रयागराज में ही हुई है। उनके पिता संत शरण उपाध्याय और माता साधना उपाध्याय इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकील हैं। यही वजह है कि उन्हें घर में पढ़ाई का माहौल मिला है। वे बचपन से पढ़ाई में होशियार रही हैं। विपरीत हालातों को कमजोरी बनाने के बजाय उन्होंने प्रेरणा बना लिया। उन्होंने न सिर्फ दोबारा किताबें उठाई थीं, बल्कि अपने पहले ही प्रयास में लक्ष्य हासिल कर लिया। स्वीटी उपाध्याय ने उत्तर प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक राज्य सिविल सेवा परीक्षा 2019 में 55वीं रैंक हासिल की। स्वीटी आज गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में असिस्टेंट कमिश्नर (इंडस्ट्रीज) हैं।

Jul 15, 2026 - 09:29
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'औरतें आलसी हो गईं' पुलिस के ताने ने स्वीटी को बना दिया अफसर, 1st अटेंप्ट में क्रैक किया था PCS

आजकल औरतें आलसी हो गई हैं...' एक पुलिसवाले के इन शब्दों ने स्वीटी को अंदर से झकझोर दिया था। यह उनकी लाइफ का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बना। उन्होंने ठान लिया कि कुछ ऐसा करना है जो न सिर्फ इस तरह की सोच को जवाब दे, बल्कि वह पद हासिल करनी है जहां से घरेलू हिंसा की शिकार और प्रताड़ित महिलाओं की मदद की जा सके। आज पीसीएस ऑफिसर स्वीटी उपाध्याय की सक्सेस स्टोरी संघर्ष, जज्बे और विपरीत हालातों में अडिग रहने की मिसाल बन गई है।

 स्वीटी उपाध्याय, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के कटरा की रहने वाली हैं। उनकी स्कूलिंग प्रयागराज में ही हुई है। उनके पिता संत शरण उपाध्याय और माता साधना उपाध्याय इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकील हैं। यही वजह है कि उन्हें घर में पढ़ाई का माहौल मिला है। वे बचपन से पढ़ाई में होशियार रही हैं।


स्वीटी उपाध्याय ने साल 2013 में ICFAI फाउंडेशन फॉर हायर एजुकेशन, हैदराबाद से MBA की डिग्री हासिल की है। एमबीए में उन्हें 7.5 ग्रेड मिला था। कैंपस प्लेसमेंट के जरिए उन्हें दिल्ली की एक प्रतिष्ठित कंपनी में हाई पैकेज की जॉब मिल गई। उस समय में अपने करियर की ऊंचाई पर थीं, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।


उन्होंने अपने जीवन के सबसे कठिन दौर को भी याद किया। स्वीटी ने बताया कि उनकी शादी 19-20 साल की उम्र में हो गई थी। कुछ टाइम तक सब ठीक चल रहा था। फिर रिश्ते ठीक नहीं रहे और बात तलाक तक पहुंच गई। काफी स्ट्रेस रहने लगा।

उन्होंने उस समय न केवल अपनी नौकरी छोड़ दी, बल्कि परिवार को भी इस बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताया था। क्योंकि वे अपनी जिम्मेदारी खुद उठानी चाहती थीं। तलाक की प्रक्रिया के बीच नौकरी छोड़ने का फैसला आर्थिक संकट की वजह बन गया और यहीं से नया संघर्ष शुरू हुआ।


वह बताती है कि तलाक के दौरान आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान थीं। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। खर्चा चलाने के लिए उन्होंने मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लीमेंटेश' में कंटेंट क्रिएटर के तौर पर काम करना शुरू कर दिया। उसी दौरान लाइफ का एक छोटा सा इंसिडेंट सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। वे कहती हैं कि एक हाउस हेल्प महिला उनके पास आई और मदद की गुहार लगाने लगी। उसके चेहरे पर चोट के निशान थे।

पूछने पर महिला ने बताया कि उसके पति ने मारा है। तब स्वीटी घरेलू हिंसा की शिकार महिला को न्याय दिलाने के लिए थाने गई और वहां पुलिसवाले के रवैये ने उन्हें सोचने पर मजबूर कर दिया।


उन्होंने बताया कि जब पुलिस से उचित कार्रवाई की मांग की गई तो एक पुलिसवाले ने कहा, 'मैम आज कल औरतें आलसी हो गई हैं।' एक प्रताड़ित महिला के लिए सिस्टम का ऐसा उदासीन रवैया बर्दाश्त नहीं हुआ। क्योंकि महिलाओं को लेकर उनकी सोच आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान के लिए लड़ने वाली रही है। उस दिन उन्होंने ठान लिया कि उन्हें एक ऐसा पद हासिल करना है जहां लोग उनकी बात सुनें और उन्हें सम्मान दें। आत्मसम्मान के लिए उन्होंने फिर से किताबें उठाईं।

उन्होंने महिलाओं के प्रति सामाजिक नजरिए और बंधनों पर बात करते हुए कहा कि आपको खुद तय करना चाहिए कि आप क्या करने के लिए बनी हैं। समाज के थोपे गए 'सोशल कंस्ट्रक्ट्स' के बजाय अपने दिल की सुननी चाहिए और अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए।


विपरीत हालातों को कमजोरी बनाने के बजाय उन्होंने प्रेरणा बना लिया। उन्होंने न सिर्फ दोबारा किताबें उठाई थीं, बल्कि अपने पहले ही प्रयास में लक्ष्य हासिल कर लिया। स्वीटी उपाध्याय ने उत्तर प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक राज्य सिविल सेवा परीक्षा 2019 में 55वीं रैंक हासिल की। स्वीटी आज गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में असिस्टेंट कमिश्नर (इंडस्ट्रीज) हैं।


उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के 'मिशन शक्ति' कार्यक्रम के तहत हजारों महिलाओं को आत्मरक्षा, कौशल विकास और बैंकों से लोन के जरिए आर्थिक रूप से सशक्त बनने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना है, 'सरकारी और प्राइवेट, दोनों ही सेक्टर के साथ काम करना मेरे करियर के लिए बहुत फायदेमंद रहा है। इन दोनों से मुझे पॉलिसी के कामकाज और एक बेहतर इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम बनाने के लिए उसे लागू करने के बारे में बहुत गहरी समझ मिली है।'

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Shivani_Mishra

Shivani Mishra Desk Editor in NewsAsr.com and having vast experience in field of Journalism

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