UP Election 2027: भाजपा ने लगाया चुनावी गियर, हारी और दस हजार से कम वोटों से जीती सीटों के लिए बनाई नई रणनीति
पार्टी हारी हुई सीटों पर विधायकों की कार्यप्रणाली की समीक्षा कर रही है और टिकट वितरण में 'विनेबिलिटी' (जीत की क्षमता) को मुख्य आधार बना रही है, जिसके चलते कई मौजूदा विधायकों के टिकट कटने की भी संभावना है।“जिन सीटों पर भाजपा कभी नहीं जीती या एकाध बार ही विजयी रही, वहां भी कड़ी सीटों पर चुनाव लड़ने वाले अनुभवी चेहरों को प्रभारी बनाने की चर्चा है।” भाजपा ने विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज कर दी है। हाल ही में राष्ट्रीय अध्यक्ष ने प्रदेश, जिला, मंडल और सेक्टर की हर महीने बैठक के निर्देश दिए थे। उसी कड़ी में शनिवार को प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गई थी।
2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने हारी हुई 57 सीटों और कम अंतर वाली सीटों पर 'मिशन 57 लोटस' और 'खोज 501' अभियान शुरू किया है। पार्टी इन कमजोर क्षेत्रों में केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं को क्लस्टर प्रभारी नियुक्त कर रही है, साथ ही 2.5 करोड़ सदस्यों को बूथ स्तर पर सक्रिय करने का प्लान है।
उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पूरी तरह से चुनावी गियर लगा लिया है। पार्टी का मुख्य फोकस अब उन 57 विधानसभा सीटों पर है, जहां 2022 के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था, साथ ही उन सीटों पर भी विशेष नजर है, जिन्हें बहुत कम (दस हजार से भी कम) वोटों के अंतर से जीता या हारा गया था।
भाजपा की प्रमुख चुनावी रणनीतियाँ:
मिशन 57 लोटस (Mission 57 Lotus): 2022 के चुनावों में हारी गई 57 सीटों पर पार्टी ने गहन समीक्षा कर स्थानीय मुद्दों और नए सामाजिक समीकरणों के आधार पर खास रणनीति तैयार की है।
'खोज 501' अभियान:
राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशानुसार, 403 विधानसभा सीटों के लिए 501 प्रभारी नियुक्त किए जा रहे हैं। इनमें वे अनुभवी चेहरे शामिल होंगे जो हारी हुई या कठिन सीटों पर पार्टी को मजबूत करेंगे।
क्लस्टर-वार प्रभारियों की तैनाती:
जिन 18 मंडलों (जैसे- सहारनपुर, मुरादाबाद, अयोध्या, आजमगढ़) में सपा ने भाजपा को कड़ी टक्कर दी थी या हराया था, वहां केंद्रीय मंत्रियों और संगठन के दिग्गजों को क्लस्टर प्रभारी बनाया जा रहा है।
बूथ स्तर पर प्लान 'बी':
हाल ही में बने 2.5 करोड़ प्राथमिक सदस्यों का बूथ-वार सत्यापन किया जा रहा है। हर बूथ पर एक 'पालक' तैनात होगा जो सीधे वोटर्स और सरकार की योजनाओं के लाभार्थियों से संपर्क साधेगा।
संगठन और सरकार में समन्वय:
पार्टी हारी हुई सीटों पर विधायकों की कार्यप्रणाली की समीक्षा कर रही है और टिकट वितरण में 'विनेबिलिटी' (जीत की क्षमता) को मुख्य आधार बना रही है, जिसके चलते कई मौजूदा विधायकों के टिकट कटने की भी संभावना है।“जिन सीटों पर भाजपा कभी नहीं जीती या एकाध बार ही विजयी रही, वहां भी कड़ी सीटों पर चुनाव लड़ने वाले अनुभवी चेहरों को प्रभारी बनाने की चर्चा है।”
भाजपा ने विधानसभा चुनाव की तैयारी तेज कर दी है। हाल ही में राष्ट्रीय अध्यक्ष ने प्रदेश, जिला, मंडल और सेक्टर की हर महीने बैठक के निर्देश दिए थे। उसी कड़ी में शनिवार को प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गई थी।
बैठक में प्राथमिक सदस्यों की सक्रिय भागेदारी पर चर्चा हुई। पार्टी ने अपने सदस्यता अभियान के तहत 2.5 करोड़ सदस्य बनाए थे। इनकी मंडलवार लिस्ट तो तैयार है। अब इनका बूथवार लिस्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए। कहा गया कि ये प्राथमिक सदस्य सक्रिय हो गए तो इनके जरिये वोटरों तक पहुंच आसान होगी।
प्राथमिक सदस्यों के अलावा विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों की भी लिस्ट तैयार करने के निर्देश दिए चुनाव से पहले इनसे भी संपर्क किया जाएगा। साथ ही हर बूथ पर वर्तमान और पूर्व पदाधिकारियों से संपर्क कर उनकी लिस्ट तैयार करने के लिए कहा गया। कहा गया कि इन सबको सक्रिय करें। उ
न्होंने कहा कि बूथ स्तर तक प्रवास जरूरी हैं। प्रदेश पदाधिकारी जिलों में, जिला पदाधिकारी मंडल में और मंडल के पदाधिकारी बूथों का सत्यापन करें। सत्यापन की पूरी रिपोर्ट प्रदेश कार्यालय को जरूर भेजी जाए। सभी विधानसभाओं में बूथ सम्मेलन किए जाएंगे। इसमें बूथ के पदाधिकारियों के अलावा पूर्व पदाधिकारियों, लाभार्थियों और समाज के प्रमुख लोगों को बुलाया जाए।
पंकज चौधरी ने कहा कि भाजपा की सबसे बड़ी ताकत उसका सशक्त बूथ संगठन है। बूथ पर काम करने वाला हर कार्यकर्ता चुनाव का वास्तविक योद्धा है। हर पदाधिकारी का दायित्व है कि वह बूथ तक लगातार प्रवास, संवाद और संगठन की गतिविधियों को गति प्रदान करे। उन्होंने कहा कि सभी पदाधिकारियों को संगठन के तय अभियानों में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करनी होगी।
वृक्षारोपण अभियान, डिजिटल प्रशिक्षण और करगिल विजय दिवस के कार्यक्रमों को भी सक्रिय भागीदारी से सफल बनाए। प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल ने कहा कि हमारी हर गतिविधि का केंद्र बूथ होना चाहिए। नियमित प्रवास कर बूथों को सक्रिय करें।
यूपी में 13.39 करोड़ वोटर हैं। भाजपा के करीब 2.5 करोड़ प्राथमिक सदस्य हैं। पार्टी की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा सदस्य सक्रिय हो जाएं। यदि ये सदस्य सक्रिय हो गए तो इनके जरिए वोटरों तक पहुंचना और चुनाव के लिए माहौल बनाना आसान हो जाएगा।
इसकी का खाका पार्टी तैयार कर रही है। इसके अलावा पूर्व पदाधिकारी जो निष्क्रिय हो गए है, उनको भी सक्रिय करने की तैयारी है। पार्टी को यह भी लगता है कि विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को अपने पक्ष में मोड़ना और उनके जरिए माहौल बनाने में मदद मिलेगी।