उत्तर प्रदेश में समय से होंगे विधानसभा चुनाव! जनगणना के चलते नहीं खिसकेगी तारीख, चुनाव आयोग ने किया साफ
चुनाव को लेकर संशय इसलिए है क्योंकि यूपी सहित सभी चुनावी राज्यों में 1 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक जनगणना का कार्यक्रम तय है। ऐसे में चुनाव के पहले होने या आगे बढ़ने के कयास लगाए जा रहे हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि चुनाव एक संवैधानिक प्रक्रिया है और जनगणना एक कानूनी प्रक्रिया है। यूपी में विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने के पहले चुनाव करवा लिए जाएंगे।
यूपी में विधानसभा चुनाव अपने निर्धारित समय पर होने के आसार है। चुनाव आयोग ने इसके संकेत दिए हैं। आयोग का कहना है कि चुनाव संवैधानिक प्रक्रिया है, जिसका अनुपालन करना होता है।
यूपी सहित पांच राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल अगले साल खत्म हो रहा है। यूपी विधानसभा का कार्यकाल 22 मई तक है, जबकि उत्तराखंड, पंजाब, गोवा सहित अन्य राज्यों का कार्यकाल 28 मार्च के पहले खत्म हो रहा है। इन राज्यों के चुनाव अमूमन फरवरी-मार्च में ही होते हैं।
स बार चुनाव को लेकर संशय इसलिए है क्योंकि यूपी सहित सभी चुनावी राज्यों में 1 फरवरी से 28 फरवरी 2027 तक जनगणना का कार्यक्रम तय है। ऐसे में चुनाव के पहले होने या आगे बढ़ने के कयास लगाए जा रहे हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि चुनाव एक संवैधानिक प्रक्रिया है और जनगणना एक कानूनी प्रक्रिया है। यूपी में विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने के पहले चुनाव करवा लिए जाएंगे।
दिल्ली में चल रहे चुनाव आयोग के मीडिया सम्मेलन में ऑनलाइन या डिजिटल वोटिंग के कयासों को भी खारिज कर दिया गया। ज्ञानेश कुमार ने शुक्रवार को इंडिया इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी ऐंड इलेक्शन मैनेजमेंट में आयोजित राष्ट्रीय मीडिया कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले एक साल में चुनाव आयोग ने हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक में 786 मुकदमें का सामना किया है। इसमें गोवा उपचुनाव को छोड़कर बाकी सभी मुकदमों में जीत मिली है। यह आयोग के फैसलों की संवैधानिक प्रतिबद्धता को सिद्ध करता है।
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि SIR से लेकर चुनाव से जुड़ी सभी प्रक्रिया संविधान और चुनाव से जुड़े कानूनों के तय नियमों के तहत ही आगे बढ़ाई गई है। हाल के विधानसभा चुनावों में रेकॉर्ड मतदान साबित करता हैं कि देश के मतदाताओं का चुनावी व्यवस्था पर गहरा भरोसा है।
यूपी में विधायकों के निधन के कारण खाली हुई मऊ की घोसी, सोनभद्र की दुद्धी और बरेली की फरीदपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव नहीं होंगे। चुनाव आयोग का कहना है कि विधानसभा का कार्यकाल एक साल से कम बचा है, इसलिए अब चुनाव करवाने का कोई औचित्य नहीं बनता है। मऊ की घोसी सीट 20 नवंबर 2025 को सपा विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद रिक्त हुई थी। इसके बाद बरेली की फरीदपुर सीट भाजपा विधायक प्रो. श्याम बिहारी लाल के और सोनभद्र की दुद्धी सीट भी सपा विधायक विजय सिंह गेंड के 8 जनवरी को निधन के बाद रिक्त हो गई थी।
विधानसभा सचिवालय की ओर से इन रिक्तियों की सूचना भी चुनाव आयोग को काफी पहले भेजी जा चुकी थी, लेकिन चुनाव आयोग ने उपचुनाव घोषित नहीं किया। आयोग का कहना है कि जब सीटें रिक्त हुई थी, तब प्रदेश में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन चल रहा था। 10 अप्रैल को यह प्रक्रिया खत्म हुई, उसके बाद दूसरे राज्यों में चुनावी व्यस्तताएं थी। विधानसभा का कार्यकाल 22 मई तक है। अब 1 साल से भी कम समय बचा है, इसलिए, उपचुनाव नहीं होंगे।