कॉकरोच जनता पार्टी के बाद लॉन्च हुई 'इश्क करो पार्टी', सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने किया ऐलान

मार्कण्डेय ने साफ किया कि कई लोग इसे मजाक या सिर्फ लड़के-लड़कियों के बीच प्रेम संबंधों को बढ़ावा देने वाली 'वैलेंटाइन डे' जैसी पहल समझ रहे हैं, लेकिन ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है। उन्होंने बताया कि यह देश की गंभीर समस्याओं से निपटने का एक बड़ा प्रयास है। 

कॉकरोच जनता पार्टी के बाद लॉन्च हुई 'इश्क करो पार्टी', सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने किया ऐलान

सोशल मीडिया पर इन दिनों CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी की खूब चर्चा चल रही है। इस बीच, एक और नया दल दस्तक देने वाला है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कण्डेय काटजू ने IKP यानी इश्क करो पार्टी की शुरुआत करने का ऐलान किया है। इस नई पहल के वे संरक्षक हैं। इसके लिए उन्होंने सदस्यता अभियान भी शुरू कर दिया है।


पूर्व जज ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म x पर पोस्ट शेयर कर इस मुहिम से जुड़ने की अपील की है। उन्होंने लिखा- जो भी लोग इससे जुड़ना चाहते हैं, वे इसकी ऑफिशियल ईमेल आईडी ishqkaroparty@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।


मार्कण्डेय ने साफ किया कि कई लोग इसे मजाक या सिर्फ लड़के-लड़कियों के बीच प्रेम संबंधों को बढ़ावा देने वाली 'वैलेंटाइन डे' जैसी पहल समझ रहे हैं, लेकिन ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है। उन्होंने बताया कि यह देश की गंभीर समस्याओं से निपटने का एक बड़ा प्रयास है। 

देश में फैली गरीबी, बेरोजगारी, बच्चों में कुपोषण, महंगी शिक्षा, खराब स्वास्थ्य सेवाएं और महंगाई जैसी समस्याओं को बिना जनता की एकता के दूर नहीं किया जा सकता। काटजू के अनुसार, आज हमारा समाज जाति और धर्म के नाम पर बंटा हुआ है। राजनेता अपने फायदे और वोट बैंक के लिए इस नफरत को बढ़ावा देते हैं। 'इश्क करो पार्टी' का मकसद इसी नफरत को खत्म करके लोगों में प्यार और एकता को बढ़ावा देना है।

इसके साथ ही, काटजू ने अपनी पोस्ट में 'कॉकरोच जनता पार्टी' के फाउंडर अभिजीत दीपके पर भी तंज कसा। दरअसल, देश की प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी के खिलाफ अभिजीत दीपके ने 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ा प्रदर्शन किया था और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की थी। 

इस पर निशाना साधते हुए काटजू ने कहा कि अभिजीत दीपके के मूर्ख होने का प्रमाण इस बात से स्पष्ट है कि उनकी प्रमुख मांगों में से एक भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। लेकिन अगर वे इस्तीफा दे भी देते हैं तो उनकी जगह कोई दूसरा मंत्री नियुक्त हो जाएगा। फिर इससे क्या फर्क पड़ेगा?