उत्तराखंड में 4 दिन भारी बारिश की चेतावनी, 19-20 जुलाई को 6 जिलों में रेड अलर्ट जारी

सबसे गंभीर चेतावनी 19 और 20 जुलाई के लिए जारी की गई है. 19 जुलाई को कुमाऊं मंडल के नैनीताल, चंपावत और ऊधमसिंह नगर जिलों में रेड अलर्ट रहेगा, जबकि 20 जुलाई को देहरादून, हरिद्वार और टिहरी जिले रेड अलर्ट के दायरे में रहेंगे. इन क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है.

Jul 19, 2026 - 12:15
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उत्तराखंड में 4 दिन भारी बारिश की चेतावनी, 19-20 जुलाई को 6 जिलों में रेड अलर्ट जारी


उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर खतरनाक रूप ले सकता है. भारत मौसम विज्ञान विभाग के देहरादून केंद्र ने 19 से 22 जुलाई के बीच राज्य के अलग-अलग जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश, गरज-चमक, आकाशीय बिजली और बेहद तीव्र वर्षा की चेतावनी जारी की है. 


मौसम विभाग के पूर्वानुमान के बाद राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र यानी SEOC ने सभी जिलाधिकारियों को अलर्ट मोड पर रहने और संभावित आपदा से निपटने के लिए पहले से सभी तैयारियां पूरी रखने के निर्देश दिए हैं.

सबसे गंभीर चेतावनी 19 और 20 जुलाई के लिए जारी की गई है. 19 जुलाई को कुमाऊं मंडल के नैनीताल, चंपावत और ऊधमसिंह नगर जिलों में रेड अलर्ट रहेगा, जबकि 20 जुलाई को देहरादून, हरिद्वार और टिहरी जिले रेड अलर्ट के दायरे में रहेंगे. इन क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश होने की आशंका जताई गई है.


राज्य में मानसून दोबारा सक्रिय हो चुका है और बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने, जलभराव, सड़कें बंद होने तथा भूस्खलन जैसी घटनाओं की आशंका बनी हुई है. मौसम विभाग की चेतावनी के मद्देनजर प्रशासन ने लोगों, पर्यटकों और चारधाम यात्रियों को मौसम तथा सड़क की स्थिति की जानकारी लेने के बाद ही यात्रा करने की सलाह दी है. 


मौसम विभाग की ओर से जारी जिलेवार चेतावनी के अनुसार 19 जुलाई को नैनीताल, चंपावत और ऊधमसिंह नगर में रेड अलर्ट लागू रहेगा. इन जिलों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी और कहीं-कहीं अत्यंत भारी बारिश हो सकती है. कम समय में तेज बारिश होने के कारण मैदानी और तराई क्षेत्रों में जलभराव, नदियों का जलस्तर बढ़ने और निचले इलाकों में पानी घुसने का खतरा हो सकता है.

देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार और बागेश्वर जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. इन जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश के साथ गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है.

उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ जिलों में भारी बारिश की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट रहेगा. पर्वतीय जिलों में बारिश के दौरान संवेदनशील ढलानों पर भूस्खलन और पहाड़ियों से पत्थर गिरने का खतरा बढ़ सकता है.


20 जुलाई को बारिश का सबसे अधिक प्रभाव गढ़वाल मंडल के देहरादून, हरिद्वार और टिहरी जिले में दिखाई देने की आशंका है. मौसम विभाग के चेतावनी मानचित्र में इन तीनों जिलों को रेड अलर्ट श्रेणी में रखा गया है. यहां भारी से बहुत भारी बारिश के साथ कुछ क्षेत्रों में अत्यंत भारी वर्षा हो सकती है.


उत्तरकाशी, पौड़ी, नैनीताल और आसपास के कुछ क्षेत्रों को ऑरेंज अलर्ट श्रेणी में रखा गया है. इन क्षेत्रों में भी बहुत तेज बारिश, आकाशीय बिजली और भूस्खलन की स्थिति बन सकती है. अन्य जिलों में येलो अलर्ट रहेगा.


देहरादून और हरिद्वार के शहरी क्षेत्रों में तेज बारिश के दौरान सड़कें जलमग्न होने, नालियों के उफान पर आने और निचले इलाकों में पानी भरने की आशंका रहती है. वहीं टिहरी, उत्तरकाशी और पौड़ी जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन से राष्ट्रीय और ग्रामीण राजमार्ग प्रभावित हो सकते हैं.


21 जुलाई को देहरादून और बागेश्वर जिले में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना को देखते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. गरज-चमक के साथ कम समय में अत्यंत तीव्र बारिश भी हो सकती है. टिहरी, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, नैनीताल, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में भारी बारिश की संभावना के कारण येलो अलर्ट प्रभावी रहेगा. मौसम विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को नदी, नाले और बरसाती गदेरों से दूरी बनाए रखने की सलाह दी है.


22 जुलाई को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. इन जिलों के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है. इसके साथ ही राज्य के अधिकांश क्षेत्रों में गरज-चमक, आकाशीय बिजली और तेज बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है.

लगातार बारिश से पहाड़ी मार्गों पर मलबा आने और बोल्डर गिरने का खतरा बढ़ जाता है. हाल के दिनों में बारिश के कारण उत्तराखंड के कई यात्रा मार्ग प्रभावित हुए हैं और केदारनाथ यात्रा क्षेत्र सहित विभिन्न हिस्सों में सड़कें बाधित होने की घटनाएं सामने आई हैं. 


राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने सभी जिलाधिकारियों को भेजे पत्र में जिला आपदा परिचालन केंद्रों को चौबीस घंटे सक्रिय रखने के निर्देश दिए हैं. प्रशासन से संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने और किसी भी घटना की जानकारी तत्काल राज्य स्तर पर साझा करने को कहा गया है.

राहत और बचाव से जुड़ी एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, अग्निशमन और स्वास्थ्य विभाग की टीमों को जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं. 


भूस्खलन संभावित सड़कों पर जेसीबी, पोकलैंड और अन्य आवश्यक मशीनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को भी कहा गया है, ताकि मलबा आने पर मार्ग को जल्द खोला जा सके. नदी और नालों के आसपास रहने वाले लोगों को समय रहते सचेत करने तथा जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था बनाने के निर्देश भी जिलों को दिए गए हैं.

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Shivani_Mishra

Shivani Mishra Desk Editor in NewsAsr.com and having vast experience in field of Journalism

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