राम मंदिर के चंदा चोरों की गर्दन दबोचने के बाद अयोध्या पहुंचेंगे सीएम योगी आदित्यनाथ!
चित्रकूट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहली बार पूरे विवाद पर पब्लिकली प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा कि चढ़ावे के मामले में एसआईटी जांच कर रही है, एफआईआर दर्ज हो चुकी है और गिरफ्तारियां भी हुई हैं. इसलिए पूरे ट्रस्ट पर सवाल उठाना उचित नहीं है. योगी ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग वर्षों तक भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते रहे, वे आज राम मंदिर के नाम पर राजनीति कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष को राजनीतिक मुद्दा मिल गया है, इसलिए वह पूरे ट्रस्ट को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है.
राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और करोड़ों रुपये के दान में हेराफेरी के मामले में लगातार हुई कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 10 जुलाई को अयोध्या पहुंच रहे हैं. खास बात यह है कि यह दौरा ऐसे समय हो रहा है,
जब SIT रिपेार्ट सौंपी जा चुकी है.. पुलिस मामले में अब तक 8 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव, सदस्य अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया है.
राजनीतिक और प्रशासनिक नजरिये से देखा जाए तो मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि राम मंदिर विवाद के बाद सरकार की पहली बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रिया के रूप में भी देखा जा रहा है.
दरअसल, राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने तेजी से कार्रवाई की, क्योंकि यह सरकार की प्रतिष्ठा पर बट्टा लगाने वाला था. पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, विशेष जांच दल (SIT) गठित हुआ और अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है.
जांच आगे बढ़ने के साथ ट्रस्ट के भीतर भी बड़ा पुनर्गठन देखने को मिला. ट्रस्ट की बैठक में लंबे समय से महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे पदाधिकारियों की भूमिकाओं में बदलाव कर दिया गया.
दान चोरी का मामला सामने आने और कार्रवाई जारी होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहली बार अयोध्या जा रहे हैं. उनका आधिकारिक कार्यक्रम बीकापुर में एक जनसभा को संबोधित करने का है, लेकिन राजनीतिक हलकों की नजर इस बात पर है कि क्या मुख्यमंत्री राम मंदिर से जुड़े मुद्दे पर कोई बड़ा संदेश देंगे?
अयोध्या भाजपा और योगी सरकार दोनों के लिए धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील केंद्र है. ऐसे में इस दौरे के कई मायने निकाले जा रहे हैं.
जनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि योगी सरकार दो समानांतर संदेश देने की कोशिश कर रही है. पहला, भ्रष्टाचार या चढ़ावे की चोरी में शामिल किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा. गिरफ्तारियां और एसआईटी जांच इसी संदेश का हिस्सा हैं.
दूसरा यह कि सरकार यह भी साफ करना चाहती है कि कुछ व्यक्तियों पर लगे आरोपों के आधार पर पूरे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट या राम मंदिर निर्माण अभियान की विश्वसनीयता पर सवाल नहीं उठाया जाना चाहिए.
आज भी चित्रकूट में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहली बार पूरे विवाद पर पब्लिकली प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा कि चढ़ावे के मामले में एसआईटी जांच कर रही है, एफआईआर दर्ज हो चुकी है और गिरफ्तारियां भी हुई हैं. इसलिए पूरे ट्रस्ट पर सवाल उठाना उचित नहीं है.
योगी ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग वर्षों तक भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते रहे, वे आज राम मंदिर के नाम पर राजनीति कर रहे हैं. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष को राजनीतिक मुद्दा मिल गया है, इसलिए वह पूरे ट्रस्ट को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है.
दूसरी ओर कांग्रेस ने इस मुद्दे को और आक्रामक तरीके से उठाया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिख चुके हैं. कांग्रेस स्वतंत्र फोरेंसिक और वित्तीय जांच, ट्रस्ट और प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा पूरे मामले की पारदर्शी जांच की मांग कर रही है. समाजवादी पार्टी भी लगातार सरकार और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रही है.