राम मंदिर चढ़ावा चोरी: पहले 500 रुपये के एक-दो नोट, फिर बड़ी रकम, 70 बार चोरी कैमरे में कैद;सामने आई SIT रिपोर्ट

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भेंट/चढ़ावा गणना कक्ष में हुई चोरी के मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पहली बार सार्वजनिक हुई है। यह रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में प्रस्तुत की गई। एसआईटी ने प्रथम दृष्टया माना है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भेंट/चढ़ावा की गणना प्रक्रिया के दौरान चोरी और गबन की घटनाएं हुईं। 27 अप्रैल से पहले भी चोरी और गबन होता रहा, लेकिन उस अवधि का सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध न होने के कारण वास्तविक नुकसान का आकलन संभव नहीं हो सका। आरोपियों के बयान और बैंक खातों में मिली आय से अधिक धनराशि से यह संकेत मिले हैं।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी: पहले 500 रुपये के एक-दो नोट, फिर बड़ी रकम, 70 बार चोरी कैमरे में कैद;सामने आई SIT रिपोर्ट

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच में एक और अहम पहलू सामने आया है। पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि काउंटिंग रूम में लगे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी कई बार प्रभावी ढंग से नहीं होती थी। आरोप है कि कंट्रोल रूम में कई बार कोई मौजूद नहीं रहता था और मॉनिटरिंग में लापरवाही रहती थी। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर आरोपी गणना के दौरान नोट निकाल लेते थे।


राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपियों से पुलिस ने रविवार को छह घंटे तक पूछताछ की है। इस दौरान आरोपियों ने बताया कि ट्रस्ट में नौकरी मिलने के दो-तीन महीने बाद ही छह कर्मचारियों ने चोरी शुरू कर दी थी। शुरुआत में वे 500 रुपये के एक-दो नोट कपड़ों में छिपाकर ड्यूटी खत्म होने पर बाहर ले जाते थे। किसी के पकड़े न जाने पर उनका हौसला बढ़ता गया और बाद में नोटों की गड्डियां और फिर बड़ी रकम निकालने लगे।


पूछताछ में आरोपियों ने सामूहिक रूप से करीब दो से तीन करोड़ रुपये तक की चोरी करने की बात स्वीकार की है। जांच में यह भी सामने आया है कि सात आरोपियों ने चोरी के पैसों से संपत्तियां खरीदीं। कुछ संपत्तियां अयोध्या के बाहर भी खरीदी गई हैं।


राम मंदिर चढ़ावा चोरी की एसआईटी रिपोर्ट सामने आ गई है। इसके मुताबिक, गणना प्रक्रिया की निगरानी के नियमों को ट्रस्ट पदाधिकारियों ने बदलकर कमजोर कर दिया। रिपोर्ट में अनिल मिश्रा की लापरवाही और चोरी में रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव की मुख्य भूमिका बताई गई है। वहीं, रिपोर्ट में चंपत राय और गोपाल राव का कहीं भी जिक्र नहीं है।


मंदिर परिसर में सोमवार को हुई ट्रस्ट की बैठक में रखी गई एसआईटी रिपोर्ट के मुताबिक 6 फरवरी 2025 को गणना प्रक्रिया की निगरानी को लेकर एसओपी तैयार की गई थी। इसमें तय किया गया था कि गणना कक्ष में किस-किसकी आवाजाही रहेगी, गणनाकर्मियों की एंट्री कब होगी और वे कैसे कपड़े पहनेंगे। गणना प्रक्रिया के पहले और बाद में कर्मियों की तलाशी भी होगी, लेकिन निगरानी नियमों को शिथिल कर दिया गया। 


सूत्रों के अनुसार ट्रस्ट की ओर से चार और पांच जून के आसपास आरोपियों के ठिकानों से करीब 79 लाख रुपये नकद और चोरी के आभूषण बरामद कराए गए थे। इसके अलावा गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर अतिरिक्त नकदी भी बरामद होने की जानकारी सामने आई है। आरोपियों के घर से कुछ जेवर भी मिले थे, जिनके सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है। जेवर की खरीद या उपहार आदि के साक्ष्य प्रस्तुत करने पर उन्हें परिजनों को लौटाए जाएंगे, नहीं तो चोरी के जेवर मानकर कार्रवाई में शामिल किया जाएगा।

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भेंट/चढ़ावा गणना कक्ष में हुई चोरी के मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट पहली बार सार्वजनिक हुई है। यह रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में प्रस्तुत की गई। एसआईटी ने प्रथम दृष्टया माना है कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के भेंट/चढ़ावा की गणना प्रक्रिया के दौरान चोरी और गबन की घटनाएं हुईं।

27 अप्रैल से पहले भी चोरी और गबन होता रहा, लेकिन उस अवधि का सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध न होने के कारण वास्तविक नुकसान का आकलन संभव नहीं हो सका। आरोपियों के बयान और बैंक खातों में मिली आय से अधिक धनराशि से यह संकेत मिले हैं।

अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी व गबन के मामले में विवेचक आशुतोष तिवारी ने तीन आरोपियों की सात दिन के लिए रिमांड की मांग की है। विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट में उन्होंने आरोपी लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा व करुणेश पांडेय को पुलिस अभिरक्षा (कस्टडी) में देने का प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया है। विशेष अभियोजन अधिकारी ने रिमांड प्रार्थना पत्र के बिंदुओं पर अदालत को बताया कि जेल में निरुद्ध आरोपियों ने विवेचक को बयान दिए हैं, जिनमें नए तथ्य आए हैं।

इनकी सत्यता की जांच के लिए आरोपियों को पुलिस कस्टडी में सात दिन का रिमांड दिया जाना आवश्यक है। वहीं, आरोपियों की ओर से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से नियुक्त लीगल एड डिफेंस काउंसिल डिप्टी चीफ ने कहा कि आज ही वह आरोपियों की ओर से पैरवी के लिए नियुक्त हुए हैं। इस पर अदालत ने रिमांड प्रार्थना पत्र सुनवाई के लिए मंगलवार की तारीख नियत की है।