Western UP की हारी हुई सीटों को लेकर बीजेपी की रणनीति! रालोद के साथ से होगा लाभ; अखिलेश के पीडीए फॉर्मूले को यूँ देगी मात

मेरठ जिले की चार विधानसभा सीटों पर 2022 के चुनावों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। सरधना विधानसभा सीट पर चर्चित संगीत सोम को सपा-रालोद गठबंधन के अतुल प्रधान ने मात दी थी। उप चुनाव में खतौली सीट भी भाजपा हार गई। सहारनपुर में भी भाजपा की दुर्गति हुई, सात सीटो में से वहां बेहट और सहारनपुर देहात सीट पर हार मिली। बागपत में छपरौली सीट पर भाजपा को हारी। इसी तरह मुरादाबाद मंडल के जिलों में भी भाजपा को कई सीटों पर करारी हार का सामना करना पड़ा। गाजियाबाद, हापुड़ व बुलंदशहर जिलों में भाजपा का सम्मान बचा था।

Jul 08, 2026 - 11:42
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Western UP की हारी हुई सीटों को लेकर बीजेपी की रणनीति! रालोद के साथ से होगा लाभ; अखिलेश के पीडीए फॉर्मूले को यूँ देगी मात


भाजपा अपनी सारी रणनीति 2027 के मिशन यूपी को लेकर बना रही है। सपा ने जिस पीडीए फॉर्मूले के सहारे 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को कई स्थानों पर रोक दिया था, उसे मात देने के लिए भाजपा रणनीति बना रही है। 


पीडीए की अहम घटक जातियों के नेताओं को संगठन में महत्वपूर्ण पद देकर भाजपा पश्चिमी यूपी की हारी हुई सीटों पर फिर से कमल खिलाने की रणनीति बना रही है। प्रदेश में किसानों को किए गए रिकॉर्ड गन्ना भुगतान को भी मजबूती से पेश किया जाएगा।


मेरठ जिले की चार विधानसभा सीटों पर 2022 के चुनावों में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। सरधना विधानसभा सीट पर चर्चित संगीत सोम को सपा-रालोद गठबंधन के अतुल प्रधान ने मात दी थी। 


सिवाल खास सीट पर भाजपा के मनिंदरपाल सिंह को सपा-रालोद के गुलाम मुहम्मद ने पटखनी दी। इसी तरह से मेरठ शहर सीट पर सपा-रालोद के रफीक अंसारी ने भाजपा उम्मीदवार कमलदत्त शर्मा को हराकर दूसरी बार जीत हासिल की।


भाजपा की चौथी हार किठौर विधानसभा क्षेत्र में हुई। यहां पर सपा-रालोद के शाहिद मंजूर ने भाजपा प्रत्याशी सत्यवीर त्यागी को हराकर विधानसभा की कुर्सी हासिल की। अब इन हारी हुई सीटों पर फिर कमल खिलाने की भाजपा ने रणनीति बनाई है।


शामली जनपद की तीन सीटों शामली, कैराना और थानाभवन में से एक भी सीट पर भाजपा नहीं जीत पाई। इसी तरह मुजफ्फरनगर की छह सीटों में से सदर सीट और खतौली पर भाजपा जीती। मीरापुर, पुरकाजी, चरथावल और बुढ़ाना सीट पर निवर्तमान सभी चारों विधायक हार गएा।

उप चुनाव में खतौली सीट भी भाजपा हार गई। सहारनपुर में भी भाजपा की दुर्गति हुई, सात सीटो में से वहां बेहट और सहारनपुर देहात सीट पर हार मिली। बागपत में छपरौली सीट पर भाजपा को हारी। इसी तरह मुरादाबाद मंडल के जिलों में भी भाजपा को कई सीटों पर करारी हार का सामना करना पड़ा। गाजियाबाद, हापुड़ व बुलंदशहर जिलों में भाजपा का सम्मान बचा था।

भाजपा ने सपा के पीडीए फॉर्मूले को मात देने के लिए विशेष रणनीति बनाई है। गुर्जर जाति के नवाब सिंह नागर को भाजपा ने पश्चिम क्षेत्र का अध्यक्ष बनाकर ओबीसी समुदाय को बड़ा संदेश दिया है। 


जाट समाज से आने वाले पुराने कैडर के नेता चौधरी देवेंद्र सिंह को किसान मोर्चा का प्रदेश अध्यक्ष बनाकर किसानों को साधने की कोशिश की गई है।


प्रदेश सरकार द्वारा पिछले नौ वर्षों में किसानों को किए गए रिकॉर्ड गन्ना भुगतान की उपलिब्ध को भी भुनाया जाएगा। इसके लिए विशेष रिपोर्ट तैयार करके किसानों के बीच पार्टी कार्यकर्ताओं को भेजा जाएगा।


2022 के विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) ने सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। अब रालोद का भाजपा के साथ गठबंधन है और वह केंद्र व राज्य सरकार में भी शामिल है। रालोद अध्यक्ष चौधरी जयंत सिंह इस समय केंद्र सरकार में मंत्री है।


जाहिर है कि भाजपा के साथ गठबंधन का फायदा राष्ट्रीय लोकदल को तो मिलेगा ही, भाजपा को भी रालोद के साथ होने से सियासी लाभ होगा। रालोद के साथ से भाजपा को 2022 में हारी सीटों पर जीत हासिल होने की उम्मीद है। हालांकि सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला चुनाव से ऐन पहले ही तय होगा।


चौधरी अजित सिंह के निधन के बाद रालोद की कमान पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की तीसरी पीढ़ी चौधरी जयंत सिंह के हाथ में है। ऐसे में जयंत सिंह ने रालोद को मजबूत करने का बीड़ा उठाया हुआ है। रालोद ने पंचायत चुनाव भी अकेले दम पर ही लड़ने की घोषणा की हुई है।

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Sharad Mishra

शरद मिश्र सर्व वर्ल्डवाइड मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर तथा कंपनी के स्वामीत्य न्यूज़ असर के प्रधान संपादक है उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि जन सरोकारिता पत्रकारिता की रही है अधिक जानकारी के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से जुड़े

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