सड़क पर नहीं, अब 'शिफ्ट' में होगी बकरीद की नमाज! मुख्यमंत्री योगी के आदेश पर उलेमा का समर्थन

धर्मगुरुओं का कहना है कि भीड़ ज्यादा होने की स्थिति में नमाज के लिए कई शिफ्ट की व्यवस्था की जा सकती है.  हाल ही में लखनऊ के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कहा था कि नमाज मस्जिदों के अंदर ही पढ़ी जानी चाहिए और सड़कों या खुली सार्वजनिक जगहों पर इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी. 

May 22, 2026 - 09:18
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सड़क पर नहीं, अब 'शिफ्ट' में होगी बकरीद की नमाज! मुख्यमंत्री योगी के आदेश पर उलेमा का समर्थन

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा सार्वजनिक स्थानों पर नमाज पढ़ने को लेकर दिए गए बयान के बाद एक नई बहस छिड़ गई है. इस बीच, मुस्लिम धर्मगुरुओं ने कहा है कि आगामी ईद-उल-अजहा यानी बकरीद की नमाज हर साल की तरह इस बार भी मस्जिदों और ईदगाहों के परिसर के भीतर ही अदा की जाएगी.


धर्मगुरुओं का कहना है कि भीड़ ज्यादा होने की स्थिति में नमाज के लिए कई शिफ्ट की व्यवस्था की जा सकती है.  हाल ही में लखनऊ के एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कहा था कि नमाज मस्जिदों के अंदर ही पढ़ी जानी चाहिए और सड़कों या खुली सार्वजनिक जगहों पर इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी. 


उन्होंने सुझाव दिया था, 'अगर आपके लिए नमाज़ पढ़ना जरूरी है, तो उसे शिफ्ट में पढ़ें. हम आपको नमाज से नहीं रोकेंगे, लेकिन सड़कों पर इसकी इजाजत नहीं होगी.'

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) से जुड़े मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने बताया कि बकरीद के लिए मस्जिदों और ईदगाहों में बड़े पैमाने पर तैयारियां जारी हैं. उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी, तो अलग-अलग इमामों की अगुवाई में कई शिफ्टों में नमाज का इंतजाम किया जा सकता है.

मौलाना महली ने जोर देकर कहा, 'मुसलमान सालों से परिसरों के अंदर ही नमाज पढ़ते आ रहे हैं. नमाज सिर्फ इबादत नहीं, बल्कि अनुशासन भी सिखाती है. सड़कों पर नमाज न पढ़कर मुसलमानों ने हमेशा कानून-व्यवस्था का सम्मान किया है और खुद को एक सभ्य समुदाय साबित किया है.' 


मुख्यमंत्री के बयान पर उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार सभी समुदायों पर एक जैसे नियम लागू करेगी और किसी भी समुदाय को सड़कों पर जुलूस या जमावड़ा करने की अनुमति नहीं होनी चाहिए.


बरेलवी संप्रदाय के प्रमुख उलेमाओं ने सड़कों पर नमाज न पढ़ने के मुख्यमंत्री के निर्देश का समर्थन किया है. ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष, मौलाना शहाबुद्दीन रिजवी बरेलवी ने कहा कि इस्लाम के अनुसार नमाज के दौरान बंदे और अल्लाह के बीच कोई बाधा नहीं होनी चाहिए. 


ऐसी एकाग्रता और शांति सड़कों या चौराहों पर नहीं, बल्कि मस्जिदों या घरों में ही मिल सकती है. उन्होंने यह भी बताया कि इस्लामी कानून के तहत भीड़ बढ़ने पर एक ही मस्जिद में अलग-अलग इमामों के साथ कई जमातें बनाने की अनुमति है और बरेली में भी ऐसा किया जा सकता है.

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Mishra Shivani

Shivani Mishra Chief Desk Editor in NewsAsr.com and having vast experience in field of Journalism

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