जानिए क्यों पूर्वांचल की 125 सीटें तय करेंगी लखनऊ की सत्ता? उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में केंद्र होगा काशी
राजनीतिक जानकारों की माने तो 2027 उत्तर प्रदेश चुनाव में पूर्वांचल में खास तौर पर बेहद दिलचस्प मुकाबला होने वाला है. इस बार 25 जनपद के 125 सीटों पर कोई राजनीतिक दल का सिंबल अथवा बड़े चेहरे का प्रभाव नहीं बल्कि सीधे उम्मीदवारों के बीच चुनावी लड़ाई होगी.
उत्तर प्रदेश में सत्ता की कुर्सी का रास्ता पूर्वांचल से ही गुजरता है और खासतौर पर बीते एक दशक से पूर्वांचल का राजनीतिक केंद्र बनारस माना जाता है. इसलिए एक बात तो साफ है कि जिसने बनारस के साथ-साथ पूर्वांचल जीत लिया उसके लिए लखनऊ का रास्ता बेहद आसान हो गया.
कुछ ऐसा ही परिणाम बीते दो विधानसभा चुनाव में देखने को भी मिला है . वैसे इस बार राजनीतिक दलों के साथ-साथ कई राजनेताओं की प्रतिष्ठा भी दाव पर लगी है.
पूर्वांचल के दिलों में किस राजनेता और पार्टी ने जगह बनाई है यह मतदान के बाद ही साफ हो पाएगा लेकिन उससे पहले यह जानना बेहद जरूरी है कि आखिर क्यों लखनऊ की गद्दी के लिए पूर्वांचल और उसका केंद्र बनारस को जीतना महत्वपूर्ण है.
पूर्वांचल में वाराणसी, चंदौली, जौनपुर, आजमगढ़, भदोही, गाजीपुर, मऊ, मिर्जापुर, संतकबीर नगर सहित अलग-अलग जनपद में हमेशा से ही क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय पार्टी के बीच कांटे की टक्कर रही है.
इन सीटों पर उलटफेर बहुमत के परिणाम तक को बदल देते हैं. NDA ने 2017 और 2022 में उत्तर प्रदेश में अच्छी बहुमत के साथ सरकार बनाई है. लेकिन फिर भी पूर्वांचल की इन सीटों पर समाजवादी पार्टी ने बीजेपी को टक्कर देने में कोई कसर बाकी नहीं रखी.
राजनीतिक जानकारों की माने तो 2027 उत्तर प्रदेश चुनाव में पूर्वांचल में खास तौर पर बेहद दिलचस्प मुकाबला होने वाला है. इस बार 25 जनपद के 125 सीटों पर कोई राजनीतिक दल का सिंबल अथवा बड़े चेहरे का प्रभाव नहीं बल्कि सीधे उम्मीदवारों के बीच चुनावी लड़ाई होगी.
पूर्वांचल की इन्हीं सीटों पर भाजपा सपा कांग्रेस के अलावा सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी अपना दल निषाद पार्टी की सक्रियता भी है.
पूर्वांचल के इन्ही सीटों का केंद्र बिंदु वाराणसी है जहां अभी से ही राजनीतिक दलों और राजनेताओं ने अपना अड्डा बनाना शुरू कर दिया है. पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक से लेकर उनके चुनावी सभाएं और जनसंपर्क अभियान शुरू हो चुका है.
पूर्वांचल का केंद्र कहे जाने वाले बनारस को अधिक महत्वपूर्ण इसी से समझा जा सकता है कि 2014 लोकसभा चुनाव के बाद 2017 और 2022 विधानसभा चुनाव में पूर्वांचल के जीत की पटकथा बनारस से ही लिखी गई थी.
खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव के अंतिम दिनों में यहाँ ताबड़तोड़ रैलियां और रोड शो करके न सिर्फ बनारस के आठ विधानसभा के परिणाम अपने पाले में तब्दील कर दिया था, बल्कि पूर्वांचल के ज्यादातर सीटों की सौगात भी NDA को दी थी. ऐसे में इस बार खासतौर पर भारतीय जनता पार्टी के लिए पूर्वांचल को जितना किसी प्रतिष्ठा से कम नहीं.