गाजियाबाद के सोया चाप और मिर्च के अचार को नई पहचान, ODOC योजना से हजारों को मिला रोजगार
जिले में सोया चाप अब केवल एक व्यंजन नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार का माध्यम है। जिले में सोया चाप के कारोबार से 10 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। इस क्षेत्र में 40 से अधिक होलसेलर, 300 से अधिक रिटेलर सक्रिय हैं, जबकि जिले के 200 से अधिक रेस्टोरेंट और ढाबों में सोया चाप से बने विभिन्न व्यंजन परोसे जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार की एक जनपद एक उत्पाद और एक जनपद एक खेल की सफलता के बाद अब ओडीओसी (एक जनपद एक व्यंजन) योजना शुरू की। इसमें स्थानीय खान-पान और स्वाद को ध्यान में रखते हुए इसे प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना उद्देश्य है। इसी क्रम में गाजियाबाद काो सोया चाप के बाद हरी मिर्च के अचार को भी इस योजना के लिए चयनित किया गया है।
जिले में सोया चाप अब केवल एक व्यंजन नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार का माध्यम है। जिले में सोया चाप के कारोबार से 10 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है। इस क्षेत्र में 40 से अधिक होलसेलर, 300 से अधिक रिटेलर सक्रिय हैं, जबकि जिले के 200 से अधिक रेस्टोरेंट और ढाबों में सोया चाप से बने विभिन्न व्यंजन परोसे जा रहे हैं।
स्थानीय बाजार से लेकर दिल्ली-एनसीआर तक गाजियाबाद का सोया चाप अपनी खास पहचान बना चुका है। वहीं, हरी मिर्च से तैयार अचार को भी एक जनपद एक व्यंजन योजना में शामिल किया गया है। इस अचार के निर्माण और व्यापार से 2500 से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है।
जिले में 150 से अधिक कारीगर और उद्यमी मिर्च का अचार तैयार कर रहे हैं, जबकि 30 से अधिक होलसेलर इसकी खरीद-फरोख्त में जुटे हैं। ये सभी इकाइयां जिला उद्योग केंद्र के निवेश मित्र पोर्टल पर पंजीकृत हैं, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
ओडीओसी योजना के तहत चयनित व्यंजनों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित फूड फेस्टिवल, मेलों और प्रदर्शनियों में प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही, ब्रांडिंग, पैकेजिंग और विपणन में भी सरकारी सहयोग दिया जाएगा, जिससे स्थानीय उद्यमियों को नए बाजार मिलने का रास्ता साफ होगा।
एक जनपद एक व्यंजन योजना का उद्देश्य स्थानीय पारंपरिक खान-पान को पहचान दिलाकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। गाजियाबाद का सोया चाप और हरी मिर्च का अचार यहां के काफी लोगों की पसंद हैं। अब सरकारी मंच मिलने से इससे जुड़े उद्यमियों और कारीगरों को और अधिक अवसर मिलेंगे, साथ ही जिले की अलग पहचान भी स्थापित होगी।