गोरखपुर में साइबर ठगी का बड़ा खुलासा, फर्जी क्यूआर बाक्स बनाकर म्यूल खातों को मर्चेंट खातों में बदलता था गिरोह
साइबर कमांडो उप निरीक्षक उपेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपित संकेत राय कई महीने से क्यूआर कोड बाक्स तैयार कर म्यूल खातों को मर्चेंट खाते में बदलने का खेल कर रहा था। अब तक की जांच में डेढ़ हजार से अधिक म्यूल खातों को उसने मर्चेंट खाते में बदला है। करीब-करीब सभी खातों में साइबर ठगी के रकम का लेनदेन हुआ है। साथ ही जिन जिलों के बैंक ये खाते संचालित हो रहे है, सभी की शिकायत भी दर्ज है। आगे की जांच चल रही है।
साइबर ठगी के लिए उपयोग किए जाने वाले म्यूल खातों को मर्चेंट खाते में बदलकर फर्जी क्यूआर बाक्स तैयार करने वाले गिरोह का पुलिस ने पर्दाफाश किया। मुख्य सरगना समेत गिरफ्तार तीनों आरोपितों के पास से पुलिस ने 40 गत्ते में 1308 क्यूआर बाक्स और 866 स्कैनर, मोबाइल फोन, पांच सिम कार्ड बरामद किए है।
आरोपित क्यूआर बाक्स को बेचकर मोटा मुनाफा कमा रहे थे। जबकि मुख्य आरोपित एक क्यूआर बाक्स बनाने के लिए ढाई हजार रुपये लेता था। बुधवार को पूछताछ के बाद कोतवाली पुलिस ने तीनों को न्यायालय में पेश किया, जहां से जेल भेज दिया गया।
पुलिस लाइंस के व्हाइट हाउस में घटना का पर्दाफाश करते हुए पुलिस अधीक्षक नगर निमिष पाटील ने आरोपितों की पहचान कुशीनगर जिले के तमकुहीराज थाना क्षेत्र के बसडिला गुनाकर निवासी संकेत राय, गोरखनाथ थाना क्षेत्र के शहीद अब्दुल्ला नगर निवासी तौहीद आलम और शाहपुर के आवास विकास कालोनी निवासी राज सिंह के रूप में की।
उन्होंने बताया कि गिरोह का मास्टरमाइंड संकेत राय पहले भारत पे कंपनी में कार्यरत था। कंपनी में रहते हुए वह क्यूआर कोड के साउंड बाक्स बेचता था और प्रत्येक बाक्स पर उसे 140 रुपये का कमीशन मिलता था।
पूछताछ में आरोपित संकेत द्वारा बताया कि कंपनी का काम करते हुए एक दिन रेलवे स्टेशन पर उसकी मुलाकात बिहार के सिवान जनपद के मैरवा निवासी हिमांशु नामक युवक से हुई, उसने बातचीत के दौरान क्यूआर कोड बाक्स बनाने के बारे में पूछा और मोबाइल फोन नंबर लेकर तीन बाक्स बनाने के लिए कहा। फिर अगले दिन हिमांशु ने फोन किया और तीनों बाक्स बनवाए।
कुछ ही देर में बाक्स बनाकर देने पर हिमांशु ने कहा कि उसके यहां बिहार में इस तरह के बाक्स बनाने के लिए लोगों से संपर्क करना पड़ता है, लेकिन वह सही से नहीं बना पाते। इसके बाद दोनों के बीच सौदा तय हुआ और संकेत हिमांशु के लिए बाक्स बनाने लगा। घर बैठे अच्छी कमाई होने से उसने तय किया कि वह लोगों की मांग के अनुसार क्यूआर कोड बाक्स तैयार करेगा और बेचेगा।
लेकिन, एक बाक्स तैयार करने के लिए उसे कई कागजात की जरूरत पड़ रही थी। इसके लिए उसने अपने एक दोस्त से कुंदन से संपर्क किया, कुंदन ने उसे एक एपीके फाइल उपलब्ध कराई। इस फाइल की मदद से वह लोगों के पैन कार्ड और आधार कार्ड की जानकारी जुटाता था। फिर शुरू के दो और अंत के दो अक्षरों को लेकर उनके दस्तावेज का इस्तेमाल कर म्यूल खातों को फर्जी तरीके से मर्चेंट खाते में परिवर्तित करने लगा।
घटना के पर्दाफाश के दौरान मौजूद सीओ कोतवाली ओमकार दत्त तिवारी ने बताया कि संकेत राय के पकड़े जाने के बाद साइबर कमांडो उप निरीक्षक उपेंद्र सिंह और कोतवाली प्रभारी छत्रपाल सिंह और उनकी टीम ने जांच शुरू की तो आरोपित संकेत राय कई साइबर ठगों के संपर्क में था, ठगों द्वारा उपलब्ध कराए गए खातों में फर्जी दस्तावेज जोड़कर वह क्यूआर बाक्स तैयार करता था।
इन खातों के माध्यम से साइबर ठगी से प्राप्त रकम का लेनदेन किया जाता था। इसके बदले मुख्य आरोपित को अलग से भुगतान मिलता था। पुलिस नगर अधीक्षक ने बताया कि पूछताछ के क्रम में कई साइबर अपराधियों के नाम सामने आए है, पुलिस उनकी तलाश में जुटी है।
सीओ कोतवाली ओमकार ने बताया कि संकेत राय ने कोतवाली के एक हिस्ट्रीशीटर के मकान में किराए पर कमरा लेकर साइबर ठगो के लिए क्यूआर कोड बाक्स तैयार करता था।
मोबाइल नंबर तलाशने और इमेल तैयार करने के लिए उसने गोरखनाथ थाना क्षेत्र के तौहीद आलम और शाहपुर थाना के राज सिंह को काम पर लगा रखा था। इन दोनों को भी प्रति बाक्स कमिशन मिलता था। जांच में हिस्ट्रीशीटर का नाम सामने आने पर पुलिस उसे भी मामले में शामिल करते हुए कार्रवाई करेगी।
साइबर कमांडो उप निरीक्षक उपेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपित संकेत राय कई महीने से क्यूआर कोड बाक्स तैयार कर म्यूल खातों को मर्चेंट खाते में बदलने का खेल कर रहा था। अब तक की जांच में डेढ़ हजार से अधिक म्यूल खातों को उसने मर्चेंट खाते में बदला है। करीब-करीब सभी खातों में साइबर ठगी के रकम का लेनदेन हुआ है। साथ ही जिन जिलों के बैंक ये खाते संचालित हो रहे है, सभी की शिकायत भी दर्ज है। आगे की जांच चल रही है।
साइबर कमांडो ने बताया कि म्यूल खाते में अधिकतम एक लाख रुपये तक की लेनदेन होती है। लेकिन, मर्चेंट खाते में पांच लाख रुपये तक की लेनदेन हो सकती है। साइबर ठगों के कहने पर आरोपित कोड बाक्स तैयार कर म्यूल खातों को मर्चेंट खाते में बदलने लगा। इसके बदले उसे ठग कमिशन देते थे।