मोदी सरकार 2029 के चुनावों से पहले नया विधेयक लाने की तैयारी; परिसीमन पर राजनीतिक सहमति बनाने में जुटी

यह प्रयास एक महत्वपूर्ण मोड़ पर किया जा रहा है. लोकसभा सीटों का वर्तमान आवंटन 1971 की जनगणना के बाद स्थिर किए गए जनसंख्या आंकड़ों पर आधारित है. लोकसभा में वर्तमान में 543 निर्वाचित सदस्य हैं, लेकिन संवैधानिक रोक हटने के बाद किसी भी परिसीमन प्रक्रिया से राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व संतुलन में बदलाव आने की आशंका है.

Jun 04, 2026 - 19:25
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मोदी सरकार 2029 के चुनावों से पहले नया विधेयक लाने की तैयारी; परिसीमन पर राजनीतिक सहमति बनाने में जुटी

अगले आम चुनावों से पहले परिसीमन सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक और संवैधानिक प्रक्रियाओं में से एक बनने की संभावना है. यही कारण है कि केंद्र सरकार इस पर आम सहमति बनाने पर काम कर रही है.

    
वर्तमान लोकसभा सीटों का आवंटन 1971 की जनगणना के आधार पर है और संवैधानिक रोक हटने के बाद बदलाव संभव है. सरकार ने डीएमके और तृणमूल कांग्रेस सहित कई क्षेत्रीय दलों से परामर्श शुरू कर सहमति बनाने का प्रयास किया है। क्षेत्रीय दलों के साथ बातचीत सकारात्मक रही है और विधेयक के लिए व्यापक सहमति बनने के बाद अगला कदम उठाया जाएगा।


केंद्र सरकार ने परिसीमन के लिए राजनीतिक सहमति बनाने पर काम शुरू कर दिया है. सरकारी सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि सरकार एक नया विधेयक लाकर 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले परिसीमन प्रक्रिया पूरी करने की संभावना तलाश रही है. 


इस कदम से दशकों में पहली बार संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों का बड़े स्तर पर पुनर्गठन हो सकता है.


सूत्रों ने बताया कि सरकार ने कई क्षेत्रीय दलों से परामर्श शुरू कर दिया है और कोई भी विधायी कदम उठाने से पहले राजनीतिक क्षेत्र के सभी हितधारकों से बातचीत कर रही है. जिन दलों से परामर्श किया गया है, उनमें डीएमके और तृणमूल कांग्रेस शामिल हैं. साथ ही अन्य क्षेत्रीय दलों से भी चर्चा जारी है. 


यह प्रयास एक महत्वपूर्ण मोड़ पर किया जा रहा है. लोकसभा सीटों का वर्तमान आवंटन 1971 की जनगणना के बाद स्थिर किए गए जनसंख्या आंकड़ों पर आधारित है. लोकसभा में वर्तमान में 543 निर्वाचित सदस्य हैं, लेकिन संवैधानिक रोक हटने के बाद किसी भी परिसीमन प्रक्रिया से राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व संतुलन में बदलाव आने की आशंका है.

सरकारी सूत्रों के अनुसार, मोदी सरकार उन राज्यों की चिंताओं को भी समझ रही है, जिन्होंने जनसंख्या वृद्धि को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया है और व्यापक राजनीतिक स्वीकृति प्राप्त करने के लिए एक फॉर्मूला तैयार करने पर काम कर रही है.

सूत्रों के मुताबिक, सरकार का आकलन है कि परिसीमन को राजनीतिक रूप से विभाजनकारी मुद्दा बनने से बचाने के लिए आम सहमति पर आधारित दृष्टिकोण महत्वपूर्ण होगा, इसलिए चर्चा निष्पक्ष प्रतिनिधित्व के सिद्धांत को बनाए रखते हुए चिंताओं को दूर करने पर केंद्रित है.

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Sharad Mishra

शरद मिश्र सर्व वर्ल्डवाइड मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर तथा कंपनी के स्वामीत्य न्यूज़ असर के प्रधान संपादक है उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि जन सरोकारिता पत्रकारिता की रही है अधिक जानकारी के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से जुड़े

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