हिमाचल के कांगड़ा और मंडी में महसूस किए गए भूकंप के झटके, लोगों में दहशत; घरों से निकले बाहर

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में शुक्रवार तड़के भूकंप के झटके महसूस किए गए। हालांकि इस भूकंप से किसी तरह का जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन दहशत के मारे लोग अपने घरों से बाहर जरूर निकल आए। मौसम विभाग के शिमला केंद्र के अनुसार, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.5 मापी गई है। लगातार दो बार झटके महसूस किए गए। पहला झटका 3:03 पर और दूसरा 3:18 बजे महसूस हुए।

हिमाचल के कांगड़ा और मंडी में महसूस किए गए भूकंप के झटके, लोगों में दहशत; घरों से निकले बाहर


हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा व मंडी सहित कई स्थानों में भूकंप का बड़ा झटका महसूस किया गया है। शुक्रवार रात करीब 10 बजकर 3 मिनट पर भूकंप का झटका आया। इसकी तीव्रता इतनी अधिक थी कि लोग कंपन से ही घरों के बाहर आ‌ गए।

उल्लेखनीय है कि जिला कांगड़ा भूकंप की दृष्टि से अति संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में भूकंप के झटके को लेकर लोगों में दहशत है। क्योंकि काफी सालों के बाद भूकंप का एक बड़ा झटका कांगड़ा जिला की धरती में महसूस किया गया है।


हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में शुक्रवार तड़के भूकंप के झटके महसूस किए गए। हालांकि इस भूकंप से किसी तरह का जान-माल का नुकसान नहीं हुआ, लेकिन दहशत के मारे लोग अपने घरों से बाहर जरूर निकल आए। मौसम विभाग के शिमला केंद्र के अनुसार, रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.5 मापी गई है। लगातार दो बार झटके महसूस किए गए। पहला झटका 3:03 पर और दूसरा 3:18 बजे महसूस हुए।

चंबा और लाहौल स्पीति जिले में आया था भूकंप

इससे पहले 5 अप्रैल को चंबा और लाहौल स्पीति जिले में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। चंबा में रात करीब 2:01 बजे भूकंप आया था। इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 2.4 रही और इसका केंद्र जमीन के अंदर 14 किलोमीटर गहराई पर था।

लाहौल स्पीति में रात करीब 3:39 बजे 2.8 की तीव्रता का भूकंप आया था। इसका केंद्र जमीन के अंदर 5 किलोमीटर गहराई पर था। हालांकि भूकंप से किसी तरह के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं थी, लेकिन मौसम विज्ञान केंद्र शिमला की ओर से दोनों जगहों पर भूकंप की पुष्टि की गई थी।

हिमाचल प्रदेश में भूकंप की दृष्टि से धर्मशाला जोन संवेदनशील है। यहां पर वर्ष 1905 में बड़ा विनाशकारी भूकंप आया था। हजारों लोगों की जान चली गई थी। कुछ लोग ही जिंदा बचे थे, जो बेघर हो गए थे। हर जगह तबाही का मंजर था।

चंबा में आते हैं सबसे अधिक भूकंप

हिमाचल में सबसे अधिक भूकंप चंबा में आते हैं। इसके बाद किन्नौर, शिमला, बिलासपुर और मंडी संवेदनशील जोन में आते हैं। शिमला को लेकर भी चेतावनी दी गई थी कि यह शहर भूकंप जैसी आपदा के लिए तैयार नहीं है। किन्नौर में 1975 में बड़ा भूकंप आ चुका है।

वैज्ञानिकों का दावा है कि हिमालय के आसपास घनी आबादी वाले देशों में इससे भारी तबाही मच सकती है। शिमला और दिल्ली तो भूकंप के झटके सहने के लिए तैयार ही नहीं हैं। भूकंप वैज्ञानिकों का मानना है कि छोटे-छोटे झटके महसूस होते रहने से बड़े भूकंप का खतरा कम हो जाता है। लोग दहशत में रहते हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि आगे यह तीव्रता ज्यादा हो सकती है। वैसे भी हिमाचल प्रदेश का अधिकतर क्षेत्र संवेदनशील जोन में आता है।