Sleep Apnea Risk: स्लीप एपनिया कर रहा परेशान तो हो जाएं अलर्ट, वरना चुपके-चुपके दबोच लेगी मौत

स्लीप एपनिया तब होता है जब सोते समय बार-बार एयरवे ब्लॉक हो जाता है, जिससे सांस कुछ समय के लिए रुक जाती है. शरीर तुरंत प्रतिक्रिया देता है और व्यक्ति हल्के से जागता है, ताकि सांस दोबारा शुरू हो सके. यह प्रक्रिया रात में कई बार दोहराई जाती है, जिससे नींद की क्वालिटी खराब होती है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिरता है.

Apr 21, 2026 - 18:45
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Sleep Apnea Risk: स्लीप एपनिया कर रहा परेशान तो हो जाएं अलर्ट, वरना चुपके-चुपके दबोच लेगी मौत

नींद को अक्सर हम शरीर के आराम और रिकवरी का समय मानते हैं. लेकिन दुनिया भर में लाखों लोग ऐसे हैं जिनके लिए नींद उतनी सुकूनभरी नहीं होती जितनी होनी चाहिए. एक आम लेकिन नजरअंदाज की जाने वाली समस्या है ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया, जो सोते समय सांस लेने की प्रक्रिया को बार-बार बाधित करती है. चलिए आपको बताते हैं कि यह कितना खतरनाक साबित हो सकता है आपके लिए और इसको लेकर रिसर्च में क्या निकला है. 

स्लीप एपनिया तब होता है जब सोते समय बार-बार एयरवे ब्लॉक हो जाता है, जिससे सांस कुछ समय के लिए रुक जाती है. शरीर तुरंत प्रतिक्रिया देता है और व्यक्ति हल्के से जागता है, ताकि सांस दोबारा शुरू हो सके. यह प्रक्रिया रात में कई बार दोहराई जाती है, जिससे नींद की क्वालिटी खराब होती है और शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिरता है.

लंबे समय तक ऐसा होने से दिल और ब्लड वेसल्स पर दबाव बढ़ता है. इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, हार्ट रिदम बिगड़ सकती है और शरीर में सूजन बढ़ सकती है. यही वजह है कि स्लीप एपनिया को दिल की बीमारियों से जोड़कर देखा जाता है. 

हाल ही में यूरोपियन कांग्रेस ऑन ओबेसिटी 2026 में पेश की जाने वाली एक बड़ी स्टडी ने इस समस्या को लेकर गंभीर संकेत दिए हैं. इसमें पाया गया कि स्लीप एपनिया से जूझ रहे लोगों में दिल से जुड़ी बीमारियों या मौत का खतरा 71 प्रतिशत तक ज्यादा हो सकता है. यह रिसर्च लंदन के इंपीरियल कॉलेज हेल्थ पार्टनर्स और इम्पीरियल कॉलेज हेल्थकेयर एनएचएस ट्रस्ट के साइंटिस्ट ने की, जिसे एली-लिली एंड कंपनी का भी सपोर्ट मिला.

इस समस्या का मोटापे से भी गहरा संबंध है। लगभग 40 से 70 प्रतिशत स्लीप एपनिया के मरीज ओवरवेट या मोटापे से ग्रस्त होते हैं. गर्दन के आसपास जमा फैट एयरवे को संकरा कर देता है, जिससे सांस लेने में रुकावट बढ़ती है. वहीं स्लीप एपनिया खुद वजन कम करना मुश्किल बना देता है, जिससे एक खतरनाक चक्र बन जाता है. इस स्टडी में करीब 29 लाख लोगों के हेल्थ रिकॉर्ड का एनालिसिस किया गया. इनमें 20,000 से ज्यादा स्लीप एपनिया के मरीजों की तुलना लगभग 1 लाख ऐसे लोगों से की गई, जिन्हें यह समस्या नहीं थी. चार साल तक इन लोगों की निगरानी की गई. 

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Vidushi Mishra

Sub Desk Editor at NewsASR.Com

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