Ghazipur: मुस्लिम युवती ने हिंदू रीति से लिए सात फेरे, शादी के कार्ड ने इसलिए बटोरीं सुर्खियां
यहां पर मुस्लिम युवती ने सनातन धर्म अपनाते हुए वैदिक रीति-रिवाज से हिंदू युवक के साथ सात फेरे लेकर विवाह किया. सिंदूर दान और पारंपरिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुए इस विवाह समारोह में उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिला. जानकारी के अनुसार विश्वंभरपुर निवासी चंचल कुमार गोंड का विवाह भरौली कला निवासी मरहूम निजामुद्दीन अंसारी की पुत्री अंजू (परिवर्तित नाम) के साथ विधि-विधान से संपन्न हुआ. विवाह समारोह के दौरान वर-वधू दोनों बेहद प्रसन्न नजर आए और परिजनों के चेहरे पर भी खुशी साफ झलक रही थी.
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र के एक गांव में एक अनोखी शादी का मामला सामने आया है. जिसमें मुस्लिम युवती ने हिंदू युवक के साथ अग्नि के सात फेरे लिए तो वहीं हिंदू युवक ने सनातन परंपरा के अनुसार सिंदूरदान और शादी के अन्य कार्यक्रम पूरे धार्मिक रीति रिवाज से संपन्न कराए. इस शादी के लिए बाकायदा शादी के निमंत्रण पत्र भी छपवाए गए और उस पत्र पर मुस्लिम लड़की का परिवर्तित नाम अंजू लिखा हुआ था.
पिता के नाम की जगह पर निजामुद्दीन अंसारी और माता का नाम नूरजहां छपा हुआ था. इस शादी के गवाह गांव वालों के साथ ही साथ हिंदूवादी संगठन और विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता ने गवाह बनते हुए इस शादी को सा कुशल संपन्न कराया.
करीमुद्दीनपुर थाना क्षेत्र के विशंभरपुर ग्राम पंचायत के रहने वाले चंचल कुमार गोड और मुस्लिम युवती अंजू की शादी लठ्ठूडीह स्थित मैरेज हाल में दो से तीन दिन पूर्व संपन्न हुआ. एक अंतरधार्मिक विवाह इन दिनों काफी चर्चा का विषय बना हुआ है.
यहां पर मुस्लिम युवती ने सनातन धर्म अपनाते हुए वैदिक रीति-रिवाज से हिंदू युवक के साथ सात फेरे लेकर विवाह किया. सिंदूर दान और पारंपरिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुए इस विवाह समारोह में उत्साह और उल्लास का माहौल देखने को मिला.
जानकारी के अनुसार विश्वंभरपुर निवासी चंचल कुमार गोंड का विवाह भरौली कला निवासी मरहूम निजामुद्दीन अंसारी की पुत्री अंजू (परिवर्तित नाम) के साथ विधि-विधान से संपन्न हुआ. विवाह समारोह के दौरान वर-वधू दोनों बेहद प्रसन्न नजर आए और परिजनों के चेहरे पर भी खुशी साफ झलक रही थी.
दोनों पिछले कई सालों से लव इन रिलेशनशिप में भी रह रहे थे और दोनों के रिलेशनशिप से एक बच्चा भी है. और अब इस बच्चे को सामाजिक रूप से मान्यता देने के लिए यह शादी दोनों परिवारों की रजामंदी से कराई गई है.
वैदिक परंपरा के अनुसार मंडप में मंत्रोच्चार के बीच सात फेरे और सिंदूरदान की रस्म पूरी की गई, जिसके साथ ही दोनों वैवाहिक बंधन में बंध गए. इस मौके पर मौजूद लोगों ने नवदंपति को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखद और उज्ज्वल भविष्य की कामना की.
कार्यक्रम में स्थानीय लोगों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, भारतीय जनता पार्टी तथा दुर्गा वाहिनी के कई सदस्य भी मौजूद रहे. इस अनोखे विवाह को लेकर पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल है और लोग इसे सामाजिक सौहार्द तथा व्यक्तिगत निर्णय का खुबसूरत उदाहरण भी बता रहे है.