क्या आपकी नींद पूरी होने के बाद भी शरीर में रहती है अकड़न? 'स्लीपिंग पोजीशन' हो सकती है जिम्मेदार, जानिए कारण और उपाय

आजकल अधिकांश युवाओं और ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों में यह समस्या गंभीर रूम से दिखाई दे रही है। सुबह उठते ही उनका शरीर इस कदर अकड़ा रहता है, जैसे रक्त संचालन बंद हो गया हो। काफी देर स्ट्रेचिंग करने के बाद शरीर थोड़ा सा खुलता है। कई लोगों को लगता है नींद पूरी न होने के कारण ऐसा हो रहा है, लेकिन ऐसा नहीं है। सोने की मुद्रा की वजह से शरीर के अंगों में दर्द होता है।

क्या आपकी नींद पूरी होने के बाद भी शरीर में रहती है अकड़न? 'स्लीपिंग पोजीशन' हो सकती है जिम्मेदार, जानिए कारण और उपाय

 क्या आप सुबह दर्द के साथ बिस्तर से उठते हैं, शरीर की मांसपेशियों में अकड़न महसूस होती है। ऐसा लगता है जैसे नींद पूरी नहीं हुई है। इसके पीछे कई संभावित कारण हो सकते हैं, लेकिन एक अहम कारण है सोते समय आपकी शारीरिक मुद्रा। 


आजकल अधिकांश युवाओं और ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करने वालों में यह समस्या गंभीर रूम से दिखाई दे रही है। सुबह उठते ही उनका शरीर इस कदर अकड़ा रहता है, जैसे रक्त संचालन बंद हो गया हो। 

काफी देर स्ट्रेचिंग करने के बाद शरीर थोड़ा सा खुलता है। कई लोगों को लगता है नींद पूरी न होने के कारण ऐसा हो रहा है, लेकिन ऐसा नहीं है। सोने की मुद्रा की वजह से शरीर के अंगों में दर्द होता है।

पहले से ही हड्डी और मांसपेशियों से जुड़ी समस्या से जूझ रहे लोगों को ज्यादा दिक्कतें आती हैं। जिन्हें पहले से आर्थराइटिस, फाइब्रोमायल्जिया या जोड़ों की समस्या है अथवा जिनमें विटमिन डी और आयरन की कमी है, या फिर जो लोग दिन में बहुत देर बैठे रहते हैं, लेकिन व्यायाम नहीं करते, उनके शरीर में सुबह उठते ही अकड़न की संभावना ज्यादा रहती है।


सोने की मुद्रा हमारी नींद की गुणवत्ता को काफी हद तक प्रभावित करती है। हालांकि हर कोई अपनी सुविधा अनुसार सोता है, लेकिन कुछ मुद्राएं ऐसी होती हैं, जो शरीर के दर्द को बढ़ाने का काम करती है। नींद का 50 फीसद समय पीठ के बल लेटना चाहिए और जरूरत पड़ने पर आराम के लिए घुटनों के नीचे तकिया रखना चाहिए। इसके बाद 25 फीसद समय दाहिनी ओर और 25 फीसद समय बाईं ओर लेटकर सोना चाहिए।


सोने की गलत शारीरिक मुद्रा से पूरे शरीर का एलाइनमेंट बिगड़ सकता है। अगर आप करवट लेकर घंटों एक ही मुद्रा में सोते हैं तो इससे शरीर का रक्तसंचार प्रभावित होने लगता है। मांसपेशियों पर लगातार दबाव पड़ने से सुबह उठते समय वे अकड़ जाती हैं। परिणामस्वरूप सुबह से ही आप सिर, गर्दन, कंधे या कमर दर्द का शिकार हो जाते हैं, पैर और हाथ में भी दर्द रहने लगता है।

नींद का प्रत्येक चक्र लगभग 90 मिनट का होता है। और हमारा शरीर रात भर में कई बार अपनी स्थिति बदलता है। सोते समय अपनी स्थिति पर ध्यान देकर और तकिये को सही जगह पर रखकर आप अपने शरीर को बेहतर नींद की आदतें अपनाने के लिए प्रशिक्षित कर सकते हैं।

ट के बल सोने से कुछ लोगों को एसिडिटी में आराम मिलता है, लेकिन यह मुद्रा रीढ़ और पीठ दर्द के लिए हनिकारक है। इसलिए कोशिश करें कि पेट के बल न सोएं। बाईं करवट लेकर सोना है लाभकारी इससे पाचन में सुधार होता है और हृदय पर दबाव कम पड़ता है। ऐसे सोने से एसिडिटी भी कम होती है।


पीठ के बल सोना सबसे अच्छा माना जाता है। इससे आपकी रीढ़ सोधी रहती है और शरीर एक एलाइनमेंट में रहता है। पीठ के बल सोने से रीढ़ और जोड़ों पर दबाव कम पड़ता है और रक्त संचार को बढ़ावा मिलता है। सोने की मुद्रा सही करने के साथ-साथ तकिये का सही प्रयोग भी महत्वपूर्ण है। सो समय घुटनों के नीचे तकिया रखने से शरीर की स्वाभाविक मुद्रा बनाए रखने में मदद मिलती है। वहीं हाथों को बगल या छाती पर रखकर सोने से दर्द कम हो सकता है।

सही मुद्रा में न सोने के कारण पर्याप्त गुणवत्ता वाली नींद नहीं आती है। रात को बार-बार नींद टूटती है। इसका असर न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक भी होता है। नींद ठीक से न आने के कारण तनाव बढ़ने लगता है।

 हालांकि, यह भी सच है कि सारी रात सोने के तरीके का ध्यान रखना संभव नहीं है, लेकिन बीच में जब भी नींद खुले तो एक बार जरूर जांच लें कि आपके सोने की शारीरिक मुद्रा ठीक है या नहीं। वहीं, पीठ के बल सोने वालों को पतला तकिया और साइड में करवट लेकर सोने वालों को थोड़ा मोटा तकिया लेने की सलाह दी जाती है, ताकि शरीर में दर्द कम हो।

नींद आराम का सबसे सरल और प्रभावी तरीका है, जो शरीर के लिए दिन का सुनहरा समय होता है क्योंकि यह शरीर को खुद की मरम्मत करने का समय देता है। औसतन 6-7 घंटे की नींद सही मानी जाती है, यानी सोने और जागने का अनुपात लगभग 1:4 होना चाहिए। 

चूंकि हम सोने में बहुत समय बिताते हैं, इसलिए सोने की सही मुद्रा अपनाना अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे समग्र स्वास्थ्य को कई लाभ मिलते हैं, साथ ही हड्डियों, मांसपेशियों या तंत्रिकाओं में समय से पहले चोट लगने का खतरा भी कम होता है। 

दूसरी ओर, कई लोगों को आश्चर्य होता है कि वे जितना अधिक सोते हैं, उतना ही अधिक थका हुआ क्यों महसूस करते हैं। इस तरह की अनुभूति का कारण अक्सर सोने की गलत या अनुचित मुद्रा हो सकती है, हालांकि बहुत सख्त या बहुत नरम बिस्तर का उपयोग भी इसका एक कारण हो सकता है।

पीठ के बल सोना सबसे आम सोने की मुद्राओं में से एक है क्योंकि इससे शरीर का वजन पीठ के एक बड़े हिस्से पर समान रूप से वितरित होता है, जिसका अर्थ है कि पीठ के किसी भी हिस्से पर दूसरे हिस्से की तुलना में अधिक दबाव नहीं पड़ता। 

इसके अलावा, यह मुद्रा रीढ़ की हड्डी को सीधा रखती है और उसमें कोई टेढ़ापन नहीं आने देती। घुटनों के नीचे तकिया लगाने से आराम मिलता है क्योंकि इससे कूल्हों में घुमाव कम होता है, जिससे पीठ के निचले हिस्से का टेढ़ापन कम होता है और पीठ दर्द से बचाव होता है। 

हालांकि, पीठ के बल सोना कुछ स्वास्थ्य समस्याओं जैसे हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी, पुराने पीठ दर्द, स्लीप एपनिया या खर्राटे की समस्या से पीड़ित लोगों के लिए उपयुक्त नहीं हो सकता है। 


करवट लेकर सोना भी एक लोकप्रिय सोने की मुद्रा है, क्योंकि इससे आराम तो मिलता ही है, साथ ही पीठ दर्द में भी आराम मिलता है। सोते समय पैर टिकाने के लिए साइड स्लीपर पिलो का इस्तेमाल करना उचित है, जबकि सिर को सहारा देने वाला तकिया बहुत नीचे नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे गर्दन में दर्द हो सकता है। 

दरअसल, तकिया ऐसा होना चाहिए कि करवट लेकर लेटते समय सिर से रीढ़ की हड्डी तक एक सीधी रेखा बनी रहे, यानी गर्दन का स्तर पीठ के निचले हिस्से और कूल्हों के स्तर के बराबर हो। 


यह महत्वपूर्ण है कि जब भी आपको किसी भी प्रकार की असुविधा महसूस हो, तो आप अपने शरीर को समायोजित करें - चाहे आप सोने की कोई भी स्थिति पसंद करते हों - क्योंकि इससे हड्डियों और मांसपेशियों पर पड़ने वाले निरंतर दबाव को कम किया जा सकेगा। 


बिस्तर का चुनाव भी एक महत्वपूर्ण पहलू है, क्योंकि यह हर व्यक्ति के सिर के आकार के अनुसार उपयुक्त होता है। बिस्तर का चुनाव आराम को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। तकिए उचित ऊंचाई के होने चाहिए, गद्दे पीठ को पर्याप्त सहारा प्रदान करने वाले होने चाहिए, और करवट लेकर सोने वालों के लिए एक अलग तकिया होना चाहिए ताकि करवट लेकर सोते समय सहारा मिल सके। गर्दन या पीठ में दर्द न होना इस बात का प्रमाण है कि आपने सही चुनाव किया है। 


अच्छी नींद के लिए उपयुक्त वातावरण का मतलब है एक अंधेरा कमरा जहाँ रोशनी या शोर का कोई व्यवधान न हो। यदि यह संभव न हो, तो आप नींद की गुणवत्ता सुधारने वाले उपकरणों, जैसे स्लीप मास्क या ईयर प्लग का उपयोग कर सकते हैं, जो आपको अच्छी नींद दिलाने में मदद करेंगे और आपके शरीर को पर्याप्त आराम का अनुभव कराएंगे।