देखकर आप भी कहेंगे- वाह भाई वाह!! बलिया के 'सुरहा ताल' को मिला इंटरनेशनल 'रामसर साइट' का टैग
सुरहा ताल आर्द्रभूमि अपनी समृद्ध पक्षी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है और अनेक प्रवासी तथा स्थानीय पक्षियों का महत्वपूर्ण आवास स्थल है. यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता सुरहा ताल को वैश्विक स्तर पर नई पहचान प्रदान करेगी तथा क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगी.
उत्तर प्रदेश के ईको-टूरिज्म और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है. बलिया जिले में स्थित सुप्रसिद्ध ‘जयप्रकाश नारायण पक्षी विहार’ (सुरहा ताल) को आधिकारिक तौर पर ‘रामसर साइट’ घोषित कर दिया गया है.
इस वैश्विक मान्यता के मिलने से सुरहा ताल को अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी, जिससे न केवल क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों की आमद बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे. इतना ही नहीं, सुरहा ताल के समीप विभिन्न पर्यटक सुविधाएं विकसित की जा रही हैं, ताकि यहां आने वाले आगंतुक एक यादगार अनुभव प्राप्त कर सकें.
ओपन एयर थिएटर से लेकर बर्ड वाचिंग टावर तक: ₹4.99 करोड़ का मेगा प्लान
सुरहा ताल को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए उत्तर प्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड द्वारा इसके समीप स्थित मैरीटार गाँव में व्यापक विकास कार्य शुरू कर दिए गए हैं.
इस पूरी परियोजना पर ₹4.99 करोड़ से अधिक की लागत आएगी. इस भारी-भरकम बजट के तहत यहां निम्नलिखित अत्याधुनिक जन-सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है:
विशाल ओपन एयर थिएटर और मल्टीपर्पज हॉल
आकर्षक पाथवे, हॉर्टिकल्चर (बागवानी) और बेंच
बच्चों के लिए विशेष चिल्ड्रेन प्ले एरिया
सुंदर घाटों का विकास और साइनेज (सूचना पट्ट)
पक्षियों को निहारने के लिए बर्ड वाचिंग टावर
पर्यटकों की जानकारी के लिए इंटरप्रिटेशन गैलरी और कियोस्क
विदेशी और प्रवासी पक्षियों का पसंदीदा बसेरा
सुरहा ताल आर्द्रभूमि अपनी समृद्ध पक्षी जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है और अनेक प्रवासी तथा स्थानीय पक्षियों का महत्वपूर्ण आवास स्थल है. यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता सुरहा ताल को वैश्विक स्तर पर नई पहचान प्रदान करेगी तथा क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगी.