योगी सरकार के सरकारी वकीलों की फीस वृद्धि के बाद अब जानिए किसे मिलेगा कितना वेतन

उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव, न्याय उदय प्रताप सिंह की ओर से इस बारे में आदेश जारी किया है। इसके तहत जिला शासकीय अधिवक्ताओं की रिटेनर फीस अब 14,000 रुपये प्रतिमाह और बहस फीस 2,500 रुपये प्रति कार्य दिवस कर दी गई है। अपर जिला शासकीय अधिवक्ताओं को अब 11,000 रुपये प्रति माह और 2,300 रुपये प्रति दिवस फीस मिलेगी।

योगी सरकार के सरकारी वकीलों की फीस वृद्धि के बाद अब जानिए किसे मिलेगा कितना वेतन

उत्तर प्रदेश में सरकारी वकीलों की फीस में बढ़ोतरी कर दी गई है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कैबिनेट ने इसे मंजूरी दी थी। अब इसका आदेश जारी कर दिया गया है। यूपी सरकार ने राज्य के विभिन्न स्तरों पर कार्यरत सरकारी अधिवक्ताओं की फीस में बढ़ोतरी का आदेश जारी किया है।

उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव, न्याय उदय प्रताप सिंह की ओर से इस बारे में आदेश जारी किया है। इसके तहत जिला शासकीय अधिवक्ताओं की रिटेनर फीस अब 14,000 रुपये प्रतिमाह और बहस फीस 2,500 रुपये प्रति कार्य दिवस कर दी गई है। अपर जिला शासकीय अधिवक्ताओं को अब 11,000 रुपये प्रति माह और 2,300 रुपये प्रति दिवस फीस मिलेगी।


यूपी के सहायक और उप जिला शासकीय अधिवक्ताओं की फीस में भी वृद्धि कर दी गई है। उच्च न्यायालय में कार्यरत मुख्य स्थायी अधिवक्ता,लोक अभियोजक को अब 35,000 रुपये मासिक और 12,000 रुपये प्रति दिन बहस फीस दी जाएगी।


अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता को 20,000 रुपये मासिक और 8,000 रुपये प्रतिदिन फीस दी जाएगी। अन्य श्रेणियों के सरकारी वकीलों की फीस भी संशोधित की गई है। महाधिवक्ता की रिटेनर फीस 1.25 लाख रुपये प्रतिमाह और बहस फीस 60,000 रुपये प्रति कार्य दिवस तय की गई है। अपर महाधिवक्ताओं के लिए भी हाईकोर्ट में 40,000 रुपये तथा सर्वोच्च न्यायालय में 50,000 रुपये प्रति दिवस बहस फीस तय की गई है।

सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड को 30,000 रुपये मासिक और 15,000 रुपये प्रतिदिन बहस फीस दी जाएगी। विशेष और वरिष्ठ पैनल अधिवक्ताओं के लिए भी प्रति दिवस अधिकतम फीस की सीमा तय कर दी गई है।


बता दे की इससे पहले प्रदेश सरकार ने न्यायालयों में सरकार की ओर से पैरवी करने वाले सरकारी अधिवक्ताओं की फीस और रिटेनरशिप में 50 प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया गया था।  


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में न्याय विभाग के इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई है। जिला न्यायालयों के अधिवक्ताओं का 10 वर्ष व महाधिवक्ता का करीब 14 वर्ष बाद रिटेनरशिप व फीस सरकार ने बढ़ाई है। इस निर्णय से सरकार पर करीब 190 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का अतिरिक्त बोझ आएगा।