आ गया अल नीनो: मानसून सीजन में भी गर्मी से झुलसेगा पूरा देश, रूठेंगे बादल और पानी-पानी को तरसेंगे राज्य!

मौसम विभाग ने जून 2026 का हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी) बुलेटिन जारी किया है। इस बुलेटिन में साफ कहा गया है कि समुद्र की सतह का तापमान बहुत बढ़ गया है। मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का तापमान अब अल नीनो के तय पैमाने को पार कर चुका है। सरल शब्दों में कहें तो अल नीनो एक प्राकृतिक मौसमी बदलाव है। इसमें भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर की सतह का पानी सामान्य से बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है। भारत के मानसून के लिए इसे कभी भी अच्छा नहीं माना जाता है। इतिहास गवाह है कि जब-जब अल नीनो आता है, भारत में मानसून कमजोर हो जाता है।

Jun 12, 2026 - 22:28
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आ गया अल नीनो: मानसून सीजन में भी गर्मी से झुलसेगा पूरा देश, रूठेंगे बादल और पानी-पानी को तरसेंगे राज्य!


भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने एक बड़ी चेतावनी जारी की है। प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति पैदा हो गई है। मौसम विभाग ने इसकी आधिकारिक पुष्टि कर दी है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह संकट अभी और बढ़ेगा। मौजूदा दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन में यह सिस्टम और ज्यादा मजबूत होने वाला है। 

मौसम विभाग ने जून 2026 का हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी) बुलेटिन जारी किया है। इस बुलेटिन में साफ कहा गया है कि समुद्र की सतह का तापमान बहुत बढ़ गया है। मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर का तापमान अब अल नीनो के तय पैमाने को पार कर चुका है।


सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि अब हवाओं का रुख भी बदल रहा है। वायुमंडल ने भी इस समुद्री गर्मी पर असर दिखाना शुरू कर दिया है। इसका सीधा मतलब यह है कि समुद्र और वायुमंडल का पूरा सिस्टम अब अल नीनो की गिरफ्त में आ चुका है।

सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 में केंद्रीय उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर का पानी बहुत ज्यादा गर्म हो गया। इसका तापमान अल नीनो की तय दहलीज से ऊपर निकल गया है। मौसम विभाग के विशेष फोरकास्ट सिस्टम (एमएमसीएफएस) ने नए अनुमान लगाए हैं। इन अनुमानों के अनुसार, जैसे-जैसे मानसून का सीजन आगे बढ़ेगा, अल नीनो का खतरा और खतरनाक होता जाएगा।


इस पूरे सिस्टम की निगरानी के लिए वैज्ञानिक 'निनो 3.4 सूचकांक' का इस्तेमाल करते हैं। इस तीन महीने के औसत सूचकांक में +0.5 डिग्री से अधिक की बढ़ोतरी हो चुकी है। इसी बढ़ोतरी को आधार मानकर भारत में अल नीनो की शुरुआत की ऑफिशियल घोषणा की गई है। इसके साथ ही समुद्र के नीचे भी तापमान बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ है। यही बढ़ा हुआ तापमान आने वाले महीनों में समुद्र की सतह पर और गर्मी बढ़ाएगा।


सरल शब्दों में कहें तो अल नीनो एक प्राकृतिक मौसमी बदलाव है। इसमें भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर की सतह का पानी सामान्य से बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है। भारत के मानसून के लिए इसे कभी भी अच्छा नहीं माना जाता है। इतिहास गवाह है कि जब-जब अल नीनो आता है, भारत में मानसून कमजोर हो जाता है।

इसकी वजह से देश में मानसूनी बारिश कम होती है। गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। कई राज्यों में लंबे समय तक सूखा रहता है। कुछ साल में तो इसकी वजह से भीषण अकाल और सूखे की स्थिति भी बनी है। हालांकि, मौसम विभाग का कहना है कि भारतीय मानसून सिर्फ अल नीनो के भरोसे नहीं रहता। इस पर अन्य मौसमी सिस्टम का भी असर पड़ता है।

इस बड़े संकट के बीच जापान की मौसम एजेंसी (जेएमए) ने भारत के लिए राहत की बात कही है। जापानी एजेंसी ने 11 जून को ही अल नीनो की शुरुआत का ऐलान कर दिया था। उनका अनुमान है कि जुलाई के महीने में हिंद महासागर में एक सकारात्मक 'इंडियन ओशन डिपोल' (आईओडी) बन सकता है।

अगर जुलाई में सकारात्मक आईओडी बनता है, तो भारत के लिए यह बहुत बड़ी खुशखबरी होगी। यह सिस्टम अल नीनो के बुरे असर को पूरी तरह धो देगा और भारत में अच्छी बारिश कराने में मदद करेगा। हालांकि, भारतीय मौसम विभाग का अनुमान थोड़ा अलग है। 

आईएमडी के मुताबिक अभी हिंद महासागर में तटस्थ आईओडी बना हुआ है। इसके पूरे मानसून सीजन में ऐसे ही रहने की उम्मीद है। इसका मतलब यह हुआ कि यह न तो बारिश बढ़ाएगा और न ही घटाएगा। मौसम विभाग अब लगातार प्रशांत महासागर के बदलते मिजाज पर कड़ी नजर रख रहा है।

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Sharad Mishra

शरद मिश्र सर्व वर्ल्डवाइड मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर तथा कंपनी के स्वामीत्य न्यूज़ असर के प्रधान संपादक है उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि जन सरोकारिता पत्रकारिता की रही है अधिक जानकारी के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से जुड़े

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