चीनी की कीमतें बढ़ने के पीछे असली विलेन कौन? सरकार का दावा- इथेनॉल निर्दोष
सरकार ने साफ किया है कि देश में चीनी की बढ़ती कीमतों और किल्लत के लिए एथेनॉल उत्पादन जिम्मेदार नहीं है, बल्कि असली वजह मिल मालिकों और व्यापारियों द्वारा की जा रही चीनी की जमाखोरी और सट्टेबाजी है। खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कुछ असामाजिक तत्व और मिलर्स बिना किसी ठोस वजह के कृत्रिम कमी दिखाकर कीमतें बढ़ा रहे हैं।
त्यौहारों से पहले चीनी के संकट से देश की एक बड़ी आबादी प्रभावित है. इसके पीछे उत्पादन कम होने से लेकर डिमांड-सप्लाई में अंतर जैसी कई वजहें बताई जा रही हैं. इथेनॉल पॉलिसी को लेकर भी बहस छिड़ी हुई है. इस बीच सरकार ने साफ किया है कि चीनी के दाम काबू में रहे, इसके लिए कई कदम उठाए गए हैं. सरकार का दावा है कि चीनी संकट के पीछे इथेनॉल वजह नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई और वजहें हैं.
सरकार ने साफ किया है कि देश में चीनी की बढ़ती कीमतों और किल्लत के लिए एथेनॉल उत्पादन जिम्मेदार नहीं है, बल्कि असली वजह मिल मालिकों और व्यापारियों द्वारा की जा रही चीनी की जमाखोरी और सट्टेबाजी है। खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कुछ असामाजिक तत्व और मिलर्स बिना किसी ठोस वजह के कृत्रिम कमी दिखाकर कीमतें बढ़ा रहे हैं।
कंज्यूमर्स मिनिस्ट्री ने शुक्रवार शाम बताया कि चीनी की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए, चीनी का निर्यात रोकने से लेकर रॉ-शुगर के ड्यूटी फ्री आयात को मंजूरी तक कई बड़े कदम उठाए गए हैं. पिछले एक महीने में चीनी के दाम करीब 48.18 रुपये से बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं. सरकार का कहना है कि त्योहारों के सीजन में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखने और कीमतों को काबू में रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है.
एथेनॉल पर सफाई:
सरकार के अनुसार, एथेनॉल बनाने के लिए डायवर्ट होने वाली चीनी का हिस्सा साल 2022-23 के 12% से घटकर अब 2025-26 में सिर्फ 9% रह गया है।
अनाज का उपयोग:
देश में उत्पादित होने वाले एथेनॉल का लगभग तीन-चौथाई (75%) हिस्सा अब मक्के और अनाज से आ रहा है, न कि गन्ने से।
कम उत्पादन भी एक कारण:
गन्ने की फसल में रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियां लगने और भारी बारिश से जलजमाव के कारण चीनी उत्पादन अनुमानित 343 लाख मीट्रिक टन से घटकर 306 लाख मीट्रिक टन रह गया है।
जमाखोरों पर नकेल के लिए सरकारी कदम
कीमतों पर काबू पाने के लिए खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने तत्काल प्रभाव से कड़े नियम लागू किए हैं:
स्टॉक लिमिट लागू:
चीनी व्यापारियों के लिए 400 मीट्रिक टन की देशव्यापी स्टॉक सीमा तय कर दी गई है।
होल्डिंग की समय सीमा:
कोई भी व्यापारी अब चीनी प्राप्ति की तारीख से 30 दिनों से अधिक समय तक स्टॉक नहीं रख सकता।
साप्ताहिक रिपोर्ट अनिवार्य:
सभी चीनी व्यापारियों को सरकारी पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा और हर शुक्रवार को अपने स्टॉक की स्थिति अपडेट करनी होगी।
शुल्क मुक्त आयात:
आगामी त्योहारी सीजन में मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी है।
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