TRAI का 20 साल बाद टैरिफ में सीधा हस्तक्षेप: सरकार की सस्ते वॉइस प्लान की तैयारी पूरी, क्या अब डेटा होगा महंगा?

भारत में 2004 से टेलीकॉम सेक्टर में “टैरिफ फॉरबियरेंस” की नीति लागू है जिसके तहत कंपनियों को खुद अपने प्लान तय करने की आजादी दी गई थी. इसी वजह से भारत दुनिया के सबसे सस्ते मोबाइल डेटा बाजारों में शामिल रहा है. लेकिन अब इतने सालों बाद TRAI का यह कदम अलग है. पहली बार इतने वर्षों बाद रेगुलेटर सीधे तौर पर टैरिफ स्ट्रक्चर में बदलाव की दिशा तय करता दिख रहा है जहां कंपनियों को हर वैलिडिटी के लिए voice और SMS-ओनली प्लान देना अनिवार्य किया जा रहा है.

TRAI का 20 साल बाद टैरिफ में सीधा हस्तक्षेप: सरकार की सस्ते वॉइस प्लान की तैयारी पूरी, क्या अब डेटा होगा महंगा?


भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने टेलीकॉम कंपनियों के लिए एक अहम डेडलाइन तय की है. 28 अप्रैल 2026 तक सभी ऑपरेटरों को अपने टैरिफ सिस्टम में बदलाव करते हुए हर वैलिडिटी के लिए वॉइस और SMS-ओनली प्लान उपलब्ध कराने होंगे. इन प्लान्स को वेबसाइट, मोबाइल ऐप और रिटेल आउटलेट्स पर साफ तौर पर दिखाना भी जरूरी होगा. यानि उपभोक्ता के लिए जितने भी डाटा, वॉइस और SMS के bundle प्लान होते हैं उतने ही प्लान सिर्फ वॉइस कॉल के भी हों.


TRAI के ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के मुताबिक, अब जितने भी मौजूदा डेटा वॉइस+SMS वाले बंडल प्लान हैं उन्हें उसी वैलिडिटी के बराबर अलग से वॉइस ओनली प्लान देना होगा. इन प्लान्स की कीमत भी लार्जली प्रोपोर्शनल रिडक्शन यानी डेटा के हिसाब से कम रखनी होगी.

यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि TRAI के अनुसार, बड़ी संख्या मे ऐसे  उपभोक्ता हैं, खासतौर पर बुजुर्ग, ग्रामीण और कम आय वर्ग, जिन्हें डेटा की जरूरत नही होती है लेकिन उन्हें मजबूरी में महंगे डेटा प्लान लेने पड़ते हैं.


अब TRAI के नए प्रस्ताव ने टेलीकॉम सेक्टर में एक नई बहस छेड़ दी है. एक तरफ जहां सिर्फ वॉइस कॉल के प्लान का कदम उन उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आ सकता है जो सिर्फ कॉल और SMS का इस्तेमाल करते हैं, वहीं दूसरी तरफ यह आशंका भी बढ़ रही है कि आने वाले समय में डेटा प्लान महंगे हो सकते हैं.


भारत में 2004 से टेलीकॉम सेक्टर में “टैरिफ फॉरबियरेंस” की नीति लागू है जिसके तहत कंपनियों को खुद अपने प्लान तय करने की आजादी दी गई थी. इसी वजह से भारत दुनिया के सबसे सस्ते मोबाइल डेटा बाजारों में शामिल रहा है. लेकिन अब इतने सालों बाद TRAI का यह कदम अलग है. पहली बार इतने वर्षों बाद रेगुलेटर सीधे तौर पर टैरिफ स्ट्रक्चर में बदलाव की दिशा तय करता दिख रहा है जहां कंपनियों को हर वैलिडिटी के लिए voice और SMS-ओनली प्लान देना अनिवार्य किया जा रहा है.