श्री राम मंदिर चंदा चोरी केस: सभी आरोपी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे गए
आरोपी लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रामशंकर यादव उर्फ तिन्नू, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ला और करुणेश पांडे पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं के तहत चोरी, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश सहित कई आरोप लगाए गए हैं। एफआईआर के अनुसार, ये आरोपी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई नकदी और कीमती सामान गिनने के लिए जिम्मेदार थे।
रामनगरी अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये अदालत में आरोपियों की पेशी हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने सभी आरोपियों की रिमांड 13 जुलाई तक के लिए मंजूर कर दी है।
इस दौरान एसआईटी मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच आगे बढ़ाएगी। आवश्यकता पड़ने पर अन्य संबंधित लोगों से भी पूछताछ करेगी। मामले की जांच अभी जारी है। अदालत में आरोपों का परीक्षण होना बाकी है। आरोपियों के विरुद्ध आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
बता दे कि बीती छह जून को राम मंदिर की चढ़ावा धनराशि में से चोरी का मामला सामने आया था। बाद में मंदिर ट्रस्ट की सिफारिश पर प्रदेश सरकार ने एसआईटी गठित की। दो दिन पहले एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप दी।
इसके बाद 25 जून की शाम को मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने गणना में शामिल कर्मियों अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्रा व पर्यवेक्षणीय कर्मी सुभाष श्रीवास्तव व महासचिव चंपत राय के चालक रामशंकर उर्फ टिन्नू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं ने दान पेटी में धन डाला। अभियोजन अधिकारी केसी वर्मा ने अयोध्या की अदालत के बाहर पत्रकारों को बताया, “आरोपी के राम मंदिर में श्रद्धालुओं ने दान पेटी में धन जमा किया। आरोप है कि ट्रस्ट के कर्मचारियों ने उस धन का गबन कर चोरी की।”
उन्होंने आगे बताया, “आठ आरोपियों को सोमवार को भ्रष्टाचार से संबंधित मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। उनसे कुल 79.85 लाख रुपये बरामद किए गए हैं।” सुनवाई के दौरान अदालत में भारी पुलिस सुरक्षा तैनात की गई थी।
आरोपी लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, रामशंकर यादव उर्फ तिन्नू, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ला और करुणेश पांडे पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई धाराओं के तहत चोरी, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश सहित कई आरोप लगाए गए हैं। एफआईआर के अनुसार, ये आरोपी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई नकदी और कीमती सामान गिनने के लिए जिम्मेदार थे।
बता दे कि एसआईटी रिपोर्ट से यह तथ्य प्रकाश में आया है कि गणना प्रक्रिया में सेवारत कुछ कर्मियों ने भेंट/चढ़ावा धनराशि की चोरी की है। पर्यवेक्षणीय कार्य में लगे सुभाष श्रीवास्तव और बैंक पर्यवेक्षणीय कर्मी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू की भूमिका भी प्रथम दृष्टया है। इसी आधार पर पुलिस ने आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
उत्तर प्रदेश के विपक्षी दलों ने दावा किया कि हालांकि एफआईआर में ट्रस्ट के कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया है, लेकिन कथित घोटाले के पीछे असली सरगना - जैसे श्री चंपत राय, एसआरजेटीके के साथी ट्रस्टी अनिल मिश्रा और मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव - को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा संरक्षण दिया गया है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा, “हम इस व्यापक भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चलाएंगे और शक्तिशाली लोगों को बचाने का प्रयास करेंगे। असली दोषी चंपत राय जैसे राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य हैं, उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश सरकार जवाबदेही से बच नहीं सकती और अयोध्या में हुए भ्रष्टाचार के मुख्य सूत्रधार चंपत राय बंसल को संरक्षण नहीं दे सकती।”