कैंची की तरह काटा जाएगा सऊदी अरब? जानिए क्या है पिंसर अटैक, जिसके नाम से कांप रहे क्राउन प्रिंस?

इराक में बैठे ईरान समर्थित शिया उग्रवादी गुट सऊदी अरब के उत्तरी बॉर्डर पर धावा बोलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. इनमें कताइब हिज्बुल्लाह, हरकात हिज्बुल्लाह अल-नुजाबा और कताइब सय्यद अल-शुहदा जैसे खतरनाक संगठन शामिल हैं, जो बस हमले के इशारे का इंतजार कर रहे हैं.

Aug 12, 2026 - 20:37
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कैंची की तरह काटा जाएगा सऊदी अरब? जानिए क्या है पिंसर अटैक, जिसके नाम से कांप रहे क्राउन प्रिंस?

पश्चिम एशिया में जारी भीषण बवाल के बीच दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक सऊदी अरब पर एक ऐसा खौफनाक खतरा मंडरा रहा है, जिसने क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की नींद उड़ा दी है. खुफिया रिपोर्टों का दावा है कि सऊदी अरब को ‘कैंची की तरह काटने’ की एक खौफनाक सैन्य साजिश रची जा रही है. 


जंग की भाषा में इसे ‘पिंसर अटैक’ कहा जाता है. इस हमले को अंजाम देने की फिराक में सऊदी के सबसे पुराने और जानी दुश्मन यमन के हूती विद्रोही हैं. खबर है कि हूती विद्रोही एक ही वक्त पर अलग-अलग मोर्चों से ताबड़तोड़ हमला बोलकर सऊदी अरब को घुटनों पर लाने और उसे दो टुकड़ों में बांटने की खतरनाक तैयारी कर रहे हैं.


क्या है ‘पिंसर अटैक’?

सैन्य रणनीति और जंग के मैदान में ‘पिंसर अटैक’ को सबसे खतरनाक चालों में से एक माना जाता है. इसमें किसी देश या सेना पर सिर्फ सामने से हमला करने के बजाय, उसे दो अलग-अलग तरफ से, जैसे उत्तर और दक्षिण से एक साथ घेरा जाता है. 


ये हमला बिल्कुल कैंची की तरह काम करता है, जिसकी दोनों धारें एक साथ बंद होकर किसी भी चीज को बीच से दो टुकड़ों में काट देती हैं. सऊदी अरब के खिलाफ जो खुफिया जानकारियां मिली हैं, उनके मुताबिक ये हमला पूरी प्लानिंग के साथ दो तरफ से एक साथ बोला जाएगा.


उत्तर से हमला: 
इराक में बैठे ईरान समर्थित शिया उग्रवादी गुट सऊदी अरब के उत्तरी बॉर्डर पर धावा बोलने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. इनमें कताइब हिज्बुल्लाह, हरकात हिज्बुल्लाह अल-नुजाबा और कताइब सय्यद अल-शुहदा जैसे खतरनाक संगठन शामिल हैं, जो बस हमले के इशारे का इंतजार कर रहे हैं.

दक्षिण की तरफ से हमला:
यमन पर कब्जा जमाए बैठे हूती विद्रोही अपनी मिसाइलों, सुसाइड ड्रोन्स और लंबी दूरी के रॉकेटों से सऊदी अरब के दक्षिणी इलाके पर हमला करने की ताक में हैं.


जब ये दोनों गुट एक ही दिन, एक ही वक्त पर उत्तर और दक्षिण से एक साथ सैकड़ों ड्रोन्स और मिसाइलों से हमला बोलेंगे, तो सऊदी अरब के सुरक्षा बलों और एयर डिफेंस सिस्टम के लिए दोनों तरफ ध्यान देना बेहद मुश्किल हो जाएगा. इसी रणनीतिक चक्रव्यूह को ‘पिंसर अटैक’ कहा जा रहा है.


सऊदी अरब के एक वरिष्ठ अधिकारी ने सीएनएन से बातचीत के दौरान इस बात का खुलासा किया है कि रियाद को अपनी घरेलू और क्षेत्रीय खुफिया एजेंसियों से ‘मल्टीपल कोऑर्डिनेटेड अटैक’ की कई रिपोर्ट्स मिली हैं. इन रिपोर्ट्स में साफ कहा गया है कि ये हमले आने वाले कुछ ही समय में हो सकते हैं.


सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस पूरे ऑपरेशन का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स है. IRGC की छत्रछाया में ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ से जुड़े सभी संगठन एक-दूसरे के साथ अब तक का सबसे गहरा तालमेल बिठा रहे हैं.


ड्रोन और ट्रेनिंग शेयरिंग: यमन के हूती विशेषज्ञ इराक के शिया उग्रवादियों को आधुनिक ड्रोन चलाने और तकनीकी हुनर में मदद दे रहे हैं.


लॉजिस्टिक्स और ठिकानों की मदद: बदले में, इराकी उग्रवादी सऊदी अरब की उत्तरी सीमा के पास हूती लड़ाकों को लॉजिस्टिक्स, लॉन्च पैड्स और सुरक्षित ठिकाने मुहैया करा रहे हैं.


ये आपसी तालमेल दिखाता है कि ईरान समर्थित गुट अब अलग-अलग छोटे-मोटे हमलों के बजाय एक बड़े मिलिट्री एक्शन की तरफ बढ़ चुके हैं.

खुफिया रिपोर्टों की मानें तो इस हमले का असली मकसद केवल सऊदी सेना से लड़ना नहीं, बल्कि सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ना और उसके बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तबाह करना है. दुश्मनों की हिट लिस्ट में ये 3 मुख्य ठिकाने शामिल हैं.


तेल और एनर्जी प्लांट: सऊदी अरब की अरामको जैसी विशाल तेल रिफाइनरियों पर हमला करके वैश्विक तेल आपूर्ति को ठप करने की साजिश है.


कमर्शियल बंदरगाह: जहां से सऊदी का सारा अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार संचालित होता है.
अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और कमर्शियल हब: ताकि उड़ानों को पूरी तरह रोककर देश के भीतर डर और अराजकता का माहौल पैदा किया जा सके.


सूत्रों का दावा है कि इस हमले के लिए कई मिसाइलों और सुसाइड ड्रोन्स को पहले ही उनकी लॉन्चिंग पोजीशन पर तैनात कर दिया गया है और वो केवल अंतिम आदेश का इंतजार कर रहे हैं.


क्राउन प्रिंस की चिंता: एयर डिफेंस पर पड़ेगा दबाव

सऊदी अरब के पास भले ही अमेरिका का पैट्रियट जैसा दमदार एयर डिफेंस सिस्टम हो, लेकिन ‘पिंसर अटैक’ का तरीका ही ऐसा है जो बड़े से बड़े और एडवांस डिफेंस सिस्टम की हवा निकाल सकता है.


जब उत्तर और दक्षिण, दोनों दिशाओं से एक साथ दर्जनों या सैकड़ों ड्रोन्स और बैलिस्टिक मिसाइलें दागी जाएंगी तो रडार और इंटरसेप्टर मिसाइलों पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ेगा. इसके अलावा, हाल के महीनों में यमन से लगातार दागी गई मिसाइलों को मार गिराने में सऊदी अरब के इंटरसेप्टर मिसाइलों के भंडार पर पहले ही भारी असर पड़ा है. अगर दोनों तरफ से एक साथ हमला होता है तो सुरक्षा घेरे को भेदकर मिसाइलों का अंदर घुसना लगभग तय माना जा रहा है.

हाल ही में हूती विद्रोहियों ने अदन की खाड़ी में एक सऊदी से जुड़े तेल टैंकर को निशाना बनाया था. इसके अलावा सऊदी की नज्रान सीमा पर भी गोलाबारी की खबरें आई थीं. इन बढ़ती उकसावे वाली हरकतों के जवाब में सऊदी अरब ने अमेरिकी सेंट्रल कमान के साथ मिलकर इराक में उग्रवादियों के ठिकानों पर कुछ जवाबी हवाई हमले भी किए थे.

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Sharad Mishra

शरद मिश्र सर्व वर्ल्डवाइड मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर तथा कंपनी के स्वामीत्य न्यूज़ असर के प्रधान संपादक है उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि जन सरोकारिता पत्रकारिता की रही है अधिक जानकारी के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से जुड़े

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