होश उड़ा देंगे पाकिस्तानी ISI एजेंट के कारनामे! नेपाल की शीलू से शादी, भारत में बनाया नकली बाप

एसटीएफ अधिकारियों को आलम के पास से जो भारतीय पहचान दस्तावेज मिले हैं, उनमें पहचान पत्र, पैन कार्ड और ईपीआईसी (वोटर) कार्ड शामिल हैं. इन सभी दस्तावेजों में इजाज के पिता को ही आलम का पिता बताया गया है. जांच में सामने आया है कि आलम की मंशा इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपने लिए भारतीय पासपोर्ट बनवाने की थी.

Aug 13, 2026 - 19:55
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होश उड़ा देंगे पाकिस्तानी ISI एजेंट के कारनामे! नेपाल की शीलू से शादी, भारत में बनाया नकली बाप

भारत-बांग्लादेश बॉर्डर पर पश्चिम बंगाल एसटीएफ के हत्थे चढ़े आईएसआई जासूस राणा रऊफ उर्फ ​​वहाब आलम को लेकर कई बड़े खुलासे सामने आए हैं. रऊफ को भारत में पांव जमाने में मदद करने वाले मोहम्मद एजाज को भी एसटीएफ ने उठाया है. 


शुरुआती जांच में पता चला है कि राणा रऊफ को भारतीय पहचान पत्र बनवाने में मोहम्मद इजाज ने ही उसकी मदद की थी. एजाज को कोलकाता के टोपसिया से गिरफ्तार किया गया है.


सूत्रों ने बताया है कि राणा रऊफ पाकिस्तान आर्मी में शामिल होना चाहता था. खबर है कि उसने 2004 में सलेक्शन प्रोसेस पास कर लिया था, लेकिन मेडिकल एग्जाम में फेल हो गया था. 2012 में, रऊफ नेपाल गया, जहां उसने शीलू नाम की एक महिला से शादी की. सूत्रों के मुताबिक, इसी समय के आसपास वह पाकिस्तान की इंटेलिजेंस एजेंसी ISI के संपर्क में आया.


पाकिस्तानी नागरिक राणा रऊफ को लेकर स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की जांच में पता चला है कि उसने भारतीय पहचान-पत्र हासिल करने के लिए सह-आरोपी मोहम्मद इजाज के पिता के नाम का इस्तेमाल किया था. 


सूत्रों के मुताबिक, 2012 में गैरकानूनी तरीके से भारत में घुसने के बाद राणा रऊफ न सिर्फ पूर्वी कोलकाता के टोपसिया में इजाज के घर पर लंबे समय तक रहा, बल्कि उसने अपने लिए भारतीय पहचान पत्र बनवाने के लिए इजाज के पिता के दस्तावेजों का भी इस्तेमाल किया.


एसटीएफ अधिकारियों को आलम के पास से जो भारतीय पहचान दस्तावेज मिले हैं, उनमें पहचान पत्र, पैन कार्ड और ईपीआईसी (वोटर) कार्ड शामिल हैं. इन सभी दस्तावेजों में इजाज के पिता को ही आलम का पिता बताया गया है. जांच में सामने आया है कि आलम की मंशा इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपने लिए भारतीय पासपोर्ट बनवाने की थी.


हालांकि, पश्चिम बंगाल में ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न’ (एसआईआर) प्रक्रिया के कारण उसकी यह इच्छा पूरी नहीं हो सकी. ‘लॉजिकल डिसक्रेपेंसी’ (तार्किक विसंगति) की श्रेणी में आने के कारण बीएलओ ने आलम को अपनी पहचान साबित करने के लिए सुनवाई के लिए बुलाया था. वह सुनवाई में शामिल होने के बजाय उत्तर 24 परगना जिले के हाबरा भाग गया, जहां बाद में उसे गिरफ्तार कर लिया गया.

राणा रऊफ उत्तर 24 परगना जिले में अंतरराष्ट्रीय सीमा के जरिए पड़ोसी देश बांग्लादेश भागने की फिराक में था. जांच से पता चला है कि हल्दिया में रहने के दौरान वह अक्सर नेपाल आता-जाता रहता था, जहां उसका एक छोटा सा फ्रेंचाइजी कारोबार है. पश्चिम बंगाल में घुसने और रहने की पूरी साजिश में नेपाल उसके लिए एक अहम ठिकाना था.

जांच में सामने आया है कि राणा रऊफ को पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) ने भारत के पूर्वी सेक्टर में भारतीय सेना, नौसेना और रेलवे के बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने का काम सौंपा था. वह सबसे पहले 2012 में नेपाल के रास्ते ही भारत में दाखिल हुआ था, जहां एक मस्जिद में उसकी मुलाकात सह-आरोपी इजाज से हुई थी.

जांच से यह भी पता चला है कि राणा रऊफ ने कई प्रीपेड मोबाइल सिम कार्ड का इस्तेमाल किया, जो उसने अपने इन्हीं फर्जी पहचान दस्तावेजों के जरिए हासिल किए थे. वह इन सिम कार्ड्स का इस्तेमाल पाकिस्तान में मौजूद अपने आईएसआई हैंडलर्स के संपर्क में रहने के लिए करता था. हैंडलर्स से बातचीत के बाद उन सिम कार्ड्स को नष्ट कर दिया जाता था और आगे के काम के लिए नए सिम कार्ड ले लिए जाते थे.

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Sharma Kumar Manish

Associate Desk Editor

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