अपनी मर्जी से शादी करने वाले कपल को पुलिस नहीं करेगी परेशान; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी 

अदालत ने कहा कि आजकल पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज कर जोड़ों का पीछा करने और शादियों की जांच करने का एक परेशान करने वाला चलन देखा जा रहा है, जबकि पुलिस के पास पहले से ही वास्तविक अपराधों की जांच का भारी बोझ है. कोर्ट ने कहा कि पुलिस उन मामलों में अपना समय बर्बाद कर रही है जो उनका काम नहीं है.

अपनी मर्जी से शादी करने वाले कपल को पुलिस नहीं करेगी परेशान; इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अहम टिप्पणी 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी भी बालिग व्यक्ति को यह बताने का अधिकार किसी के पास नहीं है कि उसे किसके साथ रहना है, किससे शादी करनी है या अपना जीवन कैसे बिताना है. यह उसका मूल अधिकार है, वह जहां चाहे जिसके साथ चाहे, अपनी मर्जी से रह सकता है. 


दो बालिग जोड़े की शादी की जांच करने का पुलिस को अधिकार नहीं है. न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने सहारनपुर के थाना सदर बाजार में दर्ज एक एफआईआर को रद्द करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई. 


अदालत ने कहा कि आजकल पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज कर जोड़ों का पीछा करने और शादियों की जांच करने का एक परेशान करने वाला चलन देखा जा रहा है, जबकि पुलिस के पास पहले से ही वास्तविक अपराधों की जांच का भारी बोझ है. कोर्ट ने कहा कि पुलिस उन मामलों में अपना समय बर्बाद कर रही है जो उनका काम नहीं है.


यह मामला एक युवा बालिग जोड़े से जुड़ा है जिन्होंने 10 दिसंबर 2025 को देहरादून के एक मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह किया था. लड़की के पिता द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में ही उसकी उम्र 18 वर्ष 11 महीने बताई गई थी, जिसकी पुष्टि अदालत ने हाईस्कूल प्रमाणपत्र के माध्यम से भी की. 

अदालत ने पाया कि जब लड़की स्पष्ट रूप से बालिग है और अपनी मर्जी से अपने पति के साथ गई है, तो ऐसे में पुलिस द्वारा अपराध दर्ज कर जोड़े को परेशान करना व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर गंभीर प्रहार है. कोर्ट के अनुसार, ऐसे मामलों में पिता द्वारा केवल गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती थी, लेकिन पुलिस ने इसे संज्ञेय अपराध मानकर जोड़े का पीछा करना शुरू कर दिया, जो पूरी तरह अवैध है.