मौनी अमावस्या 17 या 18 जनवरी? जान लें दुर्लभ योग और अमावस्या का टाइम और पूजा विधि
मौनी अमावस्या पर हर्षण और सर्वार्थ सिद्धि योग समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इसके साथ ही शिववास योग का भी निर्माण हो रहा है। इन योग में पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होगी। वहीं, साधक पर पितरों की कृपा बरसेगी।
सनातन धर्म में मौनी अमावस्या का खास महत्व है। यह दिन भगवान शिव को समर्पित होता है। इस शुभ अवसर पर गंगा स्नान कर भगवान शिव और विष्णु जी की भक्ति भाव से पूजा की जाती है। साथ ही पितरों का श्राद्ध और तर्पण किया जाता है। मौनी अमावस्या के दिन मौन साधना की जाती है।
बता दे माघ महीने की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन मौन व्रत रखने का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि मौन रहकर किया गया जप, ध्यान और दान कई गुना फल देता है। मौनी अमावस्या हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र तिथि मानी जाती है।
ज्योतिषियों की मानें तो मौनी अमावस्या पर हर्षण और सर्वार्थ सिद्धि योग समेत कई मंगलकारी संयोग बन रहे हैं। इसके साथ ही शिववास योग का भी निर्माण हो रहा है। इन योग में पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होगी। वहीं, साधक पर पितरों की कृपा बरसेगी।
इस दिन मौन व्रत रखना बहुत शुभ माना जाता है। मौन का अर्थ केवल बोलना बंद करना नहीं, बल्कि मन, वाणी और कर्म से संयम रखना भी बताया गया है। यहां देखें कि जनवरी 2026 में मौनी अमावस्या कब मनाई जाएगी। जानें जनवरी में अमावस्या कब आएगी, मौनी अमावस्या कब की है। इस जनवरी में माघ अमावस्या कब की पड़ेगी, किस दिन है स्नान दान।
मौनी अमावस्या पर स्नान दान का शुभ मुहूर्त
मौनी अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:27 बजे से 6:21 बजे तक रहेगा। यह समय स्नान-दान के लिए उपयुक्त है।
सर्वार्थ सिद्धि योग 18 जनवरी को सुबह 5:14 बजे से 19 जनवरी को सुबह 7:14 बजे तक रहेगा। यह समय दान के लिए परफेक्ट है।
अभिजीत मुहूर्त 18 जनवरी को दोपहर 12:00 बजे से 12:45 बजे तक रहेगा। यह समय स्नान-दान के लिए अच्छा है।
अमावस्या मुहूर्त 18 जनवरी को शाम 4:41 बजे से 19 जनवरी को रात 1:35 बजे के बीच का रहेगा।
मौनी अमावस्या के दिन क्या करना चाहिए?
मौनी अमावस्या के दिन संभव हो तो प्रातःकाल पवित्र नदी में स्नान करें। अगर ऐसा ना कर सकें तो घर पर गंगाजल मिले जल से स्नान करना शुभ माना जाता है। प्रयास करें कि इस दिन मौन व्रत रखें। भगवान विष्णु व शिव की पूजा करें और पितरों के लिए तर्पण करें। दान-पुण्य करें, संयमित आहार लें और ध्यान-जप द्वारा आत्मशुद्धि का प्रयास करें।
Vidushi Mishra