CJP Protest: आंदोलन के 34वें दिन आगे क्या? अबतक कितनी FIR, जंतर-मंतर पर इंटरनेट बंद

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने कहा है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होगा तभी आंदोलन वापस लेंगे। नीट पेपर लीक के बाद जिन छात्रों ने अपनी जिंदगी समाप्त की है उन्हें एक करोड़ का मुआवजा दिया जाए तभी आंदोलन वापस लेंगे। जंतर-मंतर और संसद मार्ग सहित संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगाई गई और सिग्नल जैमर का भी उपयोग किया गया। 

CJP Protest: आंदोलन के 34वें दिन आगे क्या? अबतक कितनी FIR, जंतर-मंतर पर इंटरनेट बंद


शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की मुहिम से जुड़े युवा एकजुट होकर भारत की शिक्षा प्रणाली पर चर्चा की मांग कर रहे हैं। धर्म, जाति, दल और विचारधारा के मुद्दे पीछे हट गए और लगभग पूरा देश सीजेपी की मुहिम से जुड़ता दिख रहा है।


25 दिन से अनशन कर रहे लद्दाख के शिक्षाविद और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर लिखा है कि अगर आंदोलन करने वाले युवाओं पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाते हैं तो वे प्रदर्शनकारियों से अपील करेंगे कि अपने आंदोलन को अभी के लिए टाल दें। सरकार से बात शुरू करें। सोनम वांगचुक के बयान में नरमी सी दिखती है।


कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने कहा है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होगा तभी आंदोलन वापस लेंगे। नीट पेपर लीक के बाद जिन छात्रों ने अपनी जिंदगी समाप्त की है उन्हें एक करोड़ का मुआवजा दिया जाए तभी आंदोलन वापस लेंगे। 


34वें दिन तक जारी अनशन के दौरान वांगचुक का वजन 11 किलोग्राम घट गया है। उन्हें अत्यधिक कमजोरी के कारण मेदांता अस्पताल, गुरुग्राम में भर्ती कराया गया है। 


वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि यदि केंद्र सरकार यह आश्वासन देती है कि छात्रों या प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई या FIR नहीं की जाएगी, तो वे अपना अनशन खत्म करने के लिए तैयार हैं। 

जंतर-मंतर और संसद मार्ग सहित संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगाई गई और सिग्नल जैमर का भी उपयोग किया गया। 


'संसद चलो' मार्च को रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़पें हुईं। कानून-व्यवस्था के उल्लंघन को लेकर छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कई FIR दर्ज की गई हैं।


सीजेपी और वांगचुक की इस मुहिम को दिल्ली से बाहर भी समर्थन मिलने लगा है। कई राज्यों में प्रदर्शन के अलावा वांगचुक के समर्थन में अमेरिका के न्यूयॉर्क और सेन जोस में भी प्रदर्शनकारी सड़कों पर दिखे।  


सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में अमेरिकी मानवाधिकार संगठन, हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स ने सोमवार को न्यूयॉर्क और सैन जोन में एकजुटता का प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने वांगचुक के समर्थन में तख्तियां लेकर भारत सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की।


वांगचुक, पिछले 25 दिनों से नीट परीक्षा में अनियमितताओं को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। संगठन ने एक बयान में कहा कि लंदन में भारतीय उच्चायोग और डब्लिन में भारतीय दूतावास के बाहर भी ऐसे ही प्रदर्शन आयोजित किए गए थे।


कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा अगर किसान आंदोलन एक साल तक चल सकता है तो उनका आंदोलन भी बिना जीत हासिल किए समाप्त नहीं होगा। उन्होंने कहा कि पुलिस हिंसा में शामिल सभी पुलिस अधिकारियों को सजा दी जाए तभी आंदोलन वापस लेंगे।


दूसरी ओर सोनम वांगचुक ने कहा है कि अगर मुकदमे वापस लिए जाते हैं तो आंदोलन खत्म कर बातचीत का रास्ता अपनाया जाएगा। मगर सीजेपी का कहना है धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देंगे। उसके साथ-साथ तीन और मांगों पर फैसला होगा। मांगे मानी जाएंगी तब जाकर आंदोलन वापस लिया जाएगा।


ऐसे में दो केंद्रीय मंत्रियों के मेदांता अस्पताल जाकर वांगचुक से मिलने के आधार पर कयास लगाए जा रहे हैं कि सरकार आंदोलन को मैनेज करने की कवायद कर रही है। दरअसल, सीजेपी ने इस मुलाकात के बाद कहा कि मंत्रियों को जंतर-मंतर पर आकर बात करनी होगी। ऐसे में सवाल ये है कि क्या मंत्री जंतर-मंतर जाएंगे?