उतर प्रदेश में दलालों के सिंडिकेट ने सिस्टम में लगाई सेंध; फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़

Apr 27, 2026 - 10:27
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उतर प्रदेश में दलालों के सिंडिकेट ने सिस्टम में लगाई सेंध; फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़


यूपी के बस्ती जिले में दलालों के सिंडिकेट ने 4500 से अधिक फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस बनवा दिए। इनसे करीब 4.75 करोड़ रुपये की वसूली की गई है। दलालों ने फर्जी तरीके से आवेदकों की बैकलॅाग एंट्री अरुणाचल प्रदेश से करवाकर बस्ती में लाइसेंस बनवाए हैं। 

इतना ही नहीं अफसरों की शह पर दलालों ने मिर्जापुर, संतकबीनगर, पडरैाना, गोरखपुर और आसपास के जिलों के आवेदकों के डीएल बस्ती से बनवा दिए हैं। ऐसे में सड़क सुरक्षा पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

रामतीरथ मैार्य का डीएल नंबर यूपी63 20180030028 है। जोकि मिर्जापुर आरटीओ का है। उनके डीएल की बैकलॅाग एंट्री सेप्पा(अरुणाचल प्रदेश) से वर्ष 2018 में करवाई और बस्ती में वर्ष 2026 में एड्रेस चेंज की रसीद काटकर डीएल बनाया गया। 

ऐसे ही मनीष यादव का डीएल नंबर यूपी57 20170098799 है। यह पडरैाना का है। उनके डीएल की भी बैकलॅाग एंट्री सेप्पा से 2017 में हुई और बस्ती में रिन्यूवल करवाया गया। करण गुप्ता का डीएल नंबर यूपी51 20200018137 है, जिसकी बैकलॅाग एंट्री सियांग(अरुणाचल प्रदेश) से हुई और दलालों ने लाइसेंस बस्ती से बनवा दिया।

यूपी51 20200034451, यूपी53 20190077236, यूपी57 20170098787, यूपी63 20180030001, यूपी63 20180030028, यूपी53 20190077236 सहित दर्जनों ऐसे फर्जी तरीके से बनवाए गए डीएल हैं, जिनका रिकॅार्ड अमर उजाला के पास है। 


इन डीएल में दलालों के सिंडिकेट ने अफसरों की शह पर फर्जी तरीके से डीएल बनवाकर आवेदकों से मोटी रकम वसूली है। खास बात यह है कि इन आवेदकों का लर्नर लाइसेंस नहीं बनवाया गया और नियमों को ताक पर रखकर डीएल बनवाए गए हैं।

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Mishra Shivani

Shivani Mishra Chief Desk Editor in NewsAsr.com and having vast experience in field of Journalism

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