गाजियाबाद में गहराया जल संकट: रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति, फैक्ट्रियों में भारी जलदोहन

कुछ इकाइयों में लाखों लीटर जल दोहन प्रतिदिन हो रहा है। चार्ज के नाम पर यहां न रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम है और न ही रिचार्ज पिट। नियमानुसार, जो इकाइयां एनओसी लेकर भूजल का इस्तेमाल करती हैं। उन्हें निकाले गए पानी का 200 प्रतिशत रिचार्ज करना अनिवार्य है, लेकिन अधिकांश इकाइयां इसका पालन नहीं कर रही हैं।

Jun 22, 2026 - 11:14
Updated: 2 months ago
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गाजियाबाद में गहराया जल संकट: रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति, फैक्ट्रियों में भारी जलदोहन


उत्तर प्रदेश में औद्योगिक नगरी से प्रसिद्ध गाजियाबाद में लगातार गिरता जलस्तर चिंता का विषय है।औद्याेगिक इकाइयों में अत्यधिक जलदोहन के चलते जिले के अधिकांश क्षेत्रों का जलस्तर दिनोंदिन घट रहा है। पड़ताल के दौरान सामने आया कि अधिकांश इकाइयों में वर्षा जल संचयन के लिए रिचार्ज पिट नहीं हैं। हां, कैमिकल और गंदा पानी जरूर बोरवेल के जरिये जमीन में उतारने की प्रक्रिया जारी है।

बीएस रोड, कवि नगर, मेरठ रोड, दुहाई औद्योगिक क्षेत्र की कुछ इकाइयों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के बारे में बात की। कुछ इकाइयों में रिचार्ज पिट साफ-सुथरे मिले तो कुछ गंदगी से अटे हुए मिले, लेकिन अधिकांश में न रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम व रिचार्ज पिट नहीं मिले।

यह हालात तब हैं, जब मानसून सिर पर है। जिले में 40 हजार से अधिक छोटी बड़ी इकाइयां हैं, जिनमें सभी इकाइयों में बोरवेल के माध्यम से जलदोहन किया जाता है।

कुछ इकाइयों में लाखों लीटर जल दोहन प्रतिदिन हो रहा है। चार्ज के नाम पर यहां न रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम है और न ही रिचार्ज पिट। नियमानुसार, जो इकाइयां एनओसी लेकर भूजल का इस्तेमाल करती हैं। उन्हें निकाले गए पानी का 200 प्रतिशत रिचार्ज करना अनिवार्य है, लेकिन अधिकांश इकाइयां इसका पालन नहीं कर रही हैं।

वहीं, जिम्मेदार विभागों की लापरवाही समस्या को बढ़ा रही है। भूगर्भ जल नोडल अधिकारी सृष्टि जायसवाल से इस संबंध में बारे में बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने मैसेज और मोबाइल काल का जवाब नहीं दिया।

वर्षा का पानी इकट्ठा कर फैक्ट्री के विभिन्न कार्याें में होता है इस्तेमाल
रूफटॉप हार्वेस्टिंग : फैक्ट्री की छतों पर गिरे पानी को गटर और पाइप के माध्यम से स्टोरेज टैंक में इकट्ठा किया जाता है।
फर्स्ट फ्लश सिस्टम : इस प्रक्रिया में बारिश की पहली बौछार के गंदे पानी को टैंक में जाने से रोका जाता है, जिससे केवल साफ पानी ही अंदर जाता है।ॉटैंक या रिज़र्व वायर : पानी को भूमिगत या ऊपर बने विशाल टंकियों में स्टोर किया जाता है।
रिचार्ज पिट : फैक्ट्री की जमीन या खुले मैदान में गड्ढे बनाकर उन्हें कंकड़, पत्थर और रेत की परतों से भर दिया जाता है। छतों या आहाते का पानी पाइप के जरिए इस पिट में जाता है और छनकर जमीन में उतर जाता है।
रिचार्ज बोरवेल : बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में पानी को सीधे बोरवेल के माध्यम से भूजल भंडार तक पहुंचाया जाता है।
परकोलेशन टैंक : फैक्ट्री के खाली हिस्से में छोटे तालाब जैसी संरचना बनाई जाती है, जो वर्षा के पानी को लंबे समय तक रोककर जमीन में रिसने देती है।

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Vidushi Mishra

Sub Desk Editor at NewsASR.Com

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