योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला: यूपी में संकरी गली-मोहल्लों में लगी आग पर तुरंत पाया जाएगा काबू

सकरे मार्ग वाले मोहल्लों, भीड़भाड़ वाले शहरी क्षेत्रों, कस्बों, औद्योगिक इकाइयों, पेट्रोलियम एवं गैस प्रतिष्ठानों, रासायनिक इकाइयों, एयरपोर्ट, हेलीपैड तथा पेंट और अन्य ज्वलनशील तरल पदार्थों के गोदामों में आग लगने पर पर उसे नियंत्रित करने और बुझाने के लिए आधुनिक फायर टेंडरों की आवश्यकता को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

योगी सरकार ने लिया बड़ा फैसला: यूपी में संकरी गली-मोहल्लों में लगी आग पर तुरंत पाया जाएगा काबू

संकरे मार्गों वाले मोहल्लों, व्यापारिक क्षेत्रों में आग लगने पर उसे नियंत्रित करने के लिए योगी आदित्यनाथ कैबिनेट ने 44 छोटे (2500 लीटर क्षमता) वाटर टेंडर और 5 फोम फायर टेंडरों के निर्माण और खरीद के लिए 25 करोड़ 78 लाख 85 हजार रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है।

उत्तर प्रदेश अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विभाग इन टेंडरों की खरीद की प्रक्रिया शुरू करेगा। कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि नई मांग के सापेक्ष 2500 लीटर की क्षमता वाले पांच वाटर टेंडर का निर्माण होगा।


निष्प्रयोज्य के सापेक्ष इसी क्षमता के 39 वाटर टेंडर और 55 हजार लीटर क्षमता के पांच फोम टेंडर का निर्माण एवं क्रय किया जाएगा। वाहनों में चेसिस, हाई प्रेशर पंप, फैब्रिकेशन और आवश्यक एसेसरीज शामिल होगी। खन्ना ने बताया कि अत्यंत महत्वपूर्ण आपातकालीन अग्निशमन सेवा का उद्देश्य ग्रामीण, शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में आग लगने की घटनाओं पर त्वरित और प्रभावी ढंग से नियंत्रण पाना है।


सकरे मार्ग वाले मोहल्लों, भीड़भाड़ वाले शहरी क्षेत्रों, कस्बों, औद्योगिक इकाइयों, पेट्रोलियम एवं गैस प्रतिष्ठानों, रासायनिक इकाइयों, एयरपोर्ट, हेलीपैड तथा पेंट और अन्य ज्वलनशील तरल पदार्थों के गोदामों में आग लगने पर पर उसे नियंत्रित करने और बुझाने के लिए आधुनिक फायर टेंडरों की आवश्यकता को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

उन्होंने बताया कि आग को बुझाने के लिए जहां अग्निशमन की गाड़ियां नहीं पहुंच पाती है, वहां के लिए यह छोटे-छोटे वाटर टेंडरों की व्यवस्था की जा रही है। हाल के दिनों में लखनऊ, नोएडा, कानपुर समेत कई शहरों में सकरे मार्गों वाली बसावटों में अग्निकांड हुये जिसमें फायर नियंत्रित करने वाले टेंडरों को पहुंचने में कठिनाई हुयी थी, जिसके मददेनजर कैबिनेट ने छोटे टेंडर खरीदने का फैसला लिया है।