शाहजहांपुर: जानिए क्योंइस नई तकनीक के पीछे क्यों दीवाने हो रहे हैं किसान? एक फोन कॉल और खेती में बंपर मुनाफा! 

इस खास योजना का मुख्य उद्देश्य सिंचाई में पानी की बर्बादी को रोकना और कम पानी में अधिक से अधिक कृषि क्षेत्र को सिंचित करना है. उत्तर प्रदेश माइक्रो इरीगेशन प्रोजेक्ट के माध्यम से सरकार का प्रयास है कि पारंपरिक सिंचाई तकनीक की जगह पर आधुनिक तकनीकों को अपनाया जाए. इससे न केवल अंधाधुंध भूजल दोहन पर प्रभावी लगाम लगेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संकट के खतरे को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा.

Jun 17, 2026 - 09:47
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शाहजहांपुर: जानिए क्योंइस नई तकनीक के पीछे क्यों दीवाने हो रहे हैं किसान? एक फोन कॉल और खेती में बंपर मुनाफा! 


शाहजहांपुर में भूगर्भ जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग द्वारा 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप' माइक्रो इरीगेशन योजना के तहत रिकॉर्ड भौतिक लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं. जिला उद्यान अधिकारी पुनीत कुमार पाठक ने बताया कि जनपद में ड्रिप सिंचाई के तहत 663 हेक्टेयर, मिनी स्प्रिंकलर में 332 हेक्टेयर और पोर्टेबल स्प्रिंकलर में 924 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया

इस खास योजना का मुख्य उद्देश्य सिंचाई में पानी की बर्बादी को रोकना और कम पानी में अधिक से अधिक कृषि क्षेत्र को सिंचित करना है. उत्तर प्रदेश माइक्रो इरीगेशन प्रोजेक्ट के माध्यम से सरकार का प्रयास है कि पारंपरिक सिंचाई तकनीक की जगह पर आधुनिक तकनीकों को अपनाया जाए. इससे न केवल अंधाधुंध भूजल दोहन पर प्रभावी लगाम लगेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संकट के खतरे को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा.


जिला उद्यान अधिकारी पुनीत कुमार पाठक ने जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के तहत फसलों के अनुसार अलग-अलग भौतिक लक्ष्य तय किए गए हैं, इसमें ड्रिप सिंचाई तकनीक के लिए कुल 663 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है, इसके साथ ही, मिनी स्प्रिंकलर तकनीक के अंतर्गत 332 हेक्टेयर और पोर्टेबल स्प्रिंकलर तकनीक के तहत 924 हेक्टेयर भूमि को कवर करने का बड़ा लक्ष्य रख गया है.


यह योजना गन्ने, गेहूं, दलहन, तिलहन और बागवानी फसलों के लिए अत्यधिक लाभकारी साबित होगी. इन सभी फसलों में सूक्ष्म सिंचाई तकनीक जैसे ड्रिप और मिनी स्प्रिंकलर लगाने को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है. इन उन्नत तकनीकों से पौधों को उनकी आवश्यकता के अनुसार सटीक मात्रा में पानी मिलता है, जिससे फसलों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता में भारी सुधार देखने को मिलता है.


सरकार द्वारा इस योजना के तहत किसानों को बेहद भारी अनुदान यानी सब्सिडी दी जा रही है. लघु और सीमांत किसानों को ड्रिप तथा मिनी स्प्रिंकलर लगाने पर कुल लागत का 90 प्रतिशत तक का भारी अनुदान मिल रहा है. वहीं, सामान्य श्रेणी के किसानों के लिए 80 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था है. इसके अलावा, रेनगन और पोर्टेबल स्प्रिंकलर उपकरणों की खरीद पर भी सभी किसानों को 65 से 75 प्रतिशत तक की बड़ी छूट दी जा रही है.


सूक्ष्म सिंचाई तकनीक को अपनाने से किसानों को बहुआयामी लाभ मिलते हैं. इस तकनीक के उपयोग से लगभग 70 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है, जिससे कम पानी में भी बड़े क्षेत्र की सिंचाई आसानी से संभव हो जाती है. पानी की बचत के साथ-साथ किसानों की सिंचाई पर आने वाली लागत और मेहनत में भारी कमी आती है. सटीक सिंचाई से फसलों का उत्पादन बढ़ता है और खेतों की मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी लंबे समय तक सुरक्षित बनी रहती है.


योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने आवेदन की प्रक्रिया को बेहद सरल और पारदर्शी बनाया है. इच्छुक किसानों को विभाग के आधिकारिक पोर्टल https://upmip.in पर जाकर ऑनलाइन माध्यम से अपना आवेदन कर सकते हैं. ऑनलाइन प्रणाली होने के कारण किसान घर बैठे या नजदीकी जनसेवा केंद्र के माध्यम से आसानी से फॉर्म भर सकते हैं. इस आसान डिजिटल प्रक्रिया से पारदर्शिता बनी रहती है और किसानों को कार्यालयों के चक्कर काटने से निजात मिलती है.

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Mishra Shivani

Shivani Mishra Chief Desk Editor in NewsAsr.com and having vast experience in field of Journalism

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