श्री राम मंदिर चंदा चोरी : SIT की जांच रिपोर्ट में चंपत राय समेत 14 दोषी, ट्रस्ट के पुनर्गठन और संगठनात्मक बदलाव की सिफारिश
महासचिव चंपतराय व व्यवस्थापक गोपाल राव से व्यवस्थाओं की जानकारी लेकर जांच आगे बढ़ाई और नकदी की गणना व मंदिर व्यवस्था से जुड़े लगभग डेढ़ सौ लोगों के बयान दर्ज किए गए। इसी बीच ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र भी गुरुवार को चेन्नई से लौटे, तो उनके बयान का रामशंकर यादव टिन्नू से मिलान किया गया। असमानता मिलने पर लगातार तीन दिन इन दोनों से पूछताछ हुई। संदिग्ध पाए गए अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, रमाशंकर, अविनाश शुक्ल, कृष्णदेव तिवारी, सुभाष श्रीवास्तव सहित ट्रस्ट व बैंक से जुड़े कुल 14 लोगों के लिखित बयान भी दर्ज किए गए।
राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआइटी) ने रविवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रारंंभिक जांच रिपोर्ट सौंप दी। इसमें कई प्रकार की संस्तुतियां की गई हैं और प्रकरण की सघन जांच के लिए अतिरिक्त समय मांगा गया है।
जांच की समयावधि बढ़ाने के आग्रह को लेकर माना जा रहा है कि इसमें कई लोग दोषी पाए गए हैं, जिन पर अहम जिम्मेदारियां रहीं। सूत्रों का कहना है कि एसआइटी ने ट्रस्ट महासचिव चंपतराय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्र, व्यवस्थापक गोपाल राव, व्यवस्था से जुड़े रामशंकर यादव टिन्नू सहित कुल 14 लोगों को दोषी माना है।
एसआइटी अब आज सोमवार को फिर अयोध्या आकर जांच आगे बढ़ाएगी और अन्य लोगों के बयान दर्ज होंगे। राज्य सरकार की ओर से गठित विशेष जांच दल ने गत सोमवार को अपनी जांच शुरू की थी।
महासचिव चंपतराय व व्यवस्थापक गोपाल राव से व्यवस्थाओं की जानकारी लेकर जांच आगे बढ़ाई और नकदी की गणना व मंदिर व्यवस्था से जुड़े लगभग डेढ़ सौ लोगों के बयान दर्ज किए गए। इसी बीच ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र भी गुरुवार को चेन्नई से लौटे, तो उनके बयान का रामशंकर यादव टिन्नू से मिलान किया गया।
असमानता मिलने पर लगातार तीन दिन इन दोनों से पूछताछ हुई। संदिग्ध पाए गए अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, राजेश पाठक, रमाशंकर, अविनाश शुक्ल, कृष्णदेव तिवारी, सुभाष श्रीवास्तव सहित ट्रस्ट व बैंक से जुड़े कुल 14 लोगों के लिखित बयान भी दर्ज किए गए।
छह दिनों की जांच में कई प्रकार की खामियां मिलीं और दानपात्रों की चाभियां रामशंकर यादव टिन्नू के पास पाई गईं। यह भी पता चला कि सेवादारों को गबन की जानकारी पहले से थी। शनिवार को प्रारंभिक जांच पूरी कर एसआइटी के सदस्य लखनऊ लौटे और रविवार को सीएम को रिपोर्ट सौंपी।
इस रिपोर्ट में वित्तीय पारदर्शिता व प्रबंधन में सुधार के लिए कई तरह की संस्तुतियां की गईं हैं, जिनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन करने के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर की भांति मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति किए जाने की संस्तुति है।
एसआइटी ने प्रारंभिक रिपाेर्ट में कीं ये संस्तुतियां-
राम मंदिर ट्रस्ट का पुनर्गठन किया जाए और सभी सदस्यों की समान रूप से जिम्मेदारी तय की जाए।
मंदिर ट्रस्ट में किसी प्रशासनिक अधिकारी को सीईओ के रूप में नियुक्त किया जाय।
विस्तृत जांच के लिए विशेष जांच दल को और समय दिया जाय।
मंदिर के प्रबंधन के लिए पेशेवर तरीका अपनाने की सलाह।
दानराशि की गणना का साप्ताहिक आडिट किया जाय।
प्रतिदिन चढ़ावा में आने वाली नकदी की इंट्री कराई जाय।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए निर्देशों का पूर्णत: पालन किया जाय।
सीसीटीवी कैमरों का डाटा स्टोरेज 45 दिन से बढ़ा कर 180 दिन तक किया जाय।
ट्रस्ट महासचिव चंपतराय, सदस्य डॉ. अनिल मिश्र व व्यवस्थापक गोपाल राव सहित अन्य जिम्मेदारों को अयोध्या छोड़ने की अनुमति न दी जाए।
बता दे कि जाँच में गबन की जांच करने वाले एसआईटी को सीसीटीवी फुटेज से कुछ अहम सुराग मिले हैं। इसमें कुछ संदिग्ध रकम चोरी करते हुए नजर आ रहे हैं। इस मामले को उजागर करने में ये फुटेज बेहद अहम साबित हो सकते हैं। इसके अलावा, एसआईटी को राम मंदिर ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध मिली है। वह नए सिरे से ट्रस्ट का गठन करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए श्री काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर एक कार्यपालक अधिकारी को नियुक्त करने की सिफारिश कर सकती है।
उल्लेखनीय है कि चढ़ावा प्रकरण की जांच कर रही एसआईटी इन पदाधिकारियों से पूछताछ कर चुकी है। चर्चाओं को उस समय और बल मिला जब शुक्रवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अयोध्या दौरे पर पहुंचे। राम मंदिर में दर्शन-पूजन के दौरान मुख्यमंत्री और चंपत राय के बीच सार्वजनिक रूप से कोई विशेष संवाद या संयुक्त उपस्थिति देखने को नहीं मिली।
इसके बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में यह सवाल उठने लगा कि क्या ध्वजारोहण समारोह में शामिल होने वाले दोनों उपमुख्यमंत्री भी जांच के दायरे में आए ट्रस्ट पदाधिकारियों से सार्वजनिक दूरी बनाए रखेंगे। हालांकि, ट्रस्ट या प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। आयोजन से जुड़े लोग इसे पूरी तरह धार्मिक कार्यक्रम बताते हुए तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।