खुला बड़ा राज! श्री राम मंदिर में दान राशि गबन का लंबे समय से चल रहा था खेल, है वर्चस्व की लड़ाई?
ह रणनीति जरूर बनी कि इन कर्मियों से पूछताछ कर पैसे बरामद कर लिए जाएं। बात बाहर न जाए, इसलिए विधिक कार्रवाई न कराई जाए। तबसे इसी रणनीति पर सारी प्रक्रिया चलती रही, परंतु उसी धड़े ने सारी जानकारी परिसर के बाहर लोगों को दे दी। सपा प्रमुख अखिलेश यादव तक यह मामला पहुंचा, तो उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर दिया। तभी से चढ़ावा चोरी का प्रकरण सुर्खियों में छाया हुआ है।
श्रीराम मंदिर के दानपात्रों की धनराशि चोरी करने का खेल शायद सामने भी नहीं आ पाता, यदि इसके सूत्रधार वे नहीं बनते, जो मंदिर प्रबंधन में दखल बढ़ाने को लेकर परेशान थे।
इन्हीं लोगों ने रणनीति के तहत पहले सूचनाएं एकत्र कीं, फिर ट्रस्ट के एक पदाधिकारी को जानकारी देकर आरोपित को रंगे हाथ पकड़वाया।
इसे छिपाने का प्रयास हुआ तो जानकारी लीक कर दी गई। सूत्र बताते हैं कि ट्रस्ट के एक पदाधिकारी के ड्राइवर रहे रामशंकर यादव ‘टिन्नू’ का बहुत कम समय में इतना हस्तक्षेप बढ़ गया कि वह न केवल राम मंदिर का प्रबंधन देखने लगा, बल्कि परिसर के अन्य आयोजनों व कार्यों का भी दायित्व संभालने लगा।
इस दखल से उन्हीं पदाधिकारी के समर्थकों का एक धड़ा इससे नाराज चल रहा था। लंबे समय से विहिप से जुड़े होने के बाद भी मंदिर की व्यवस्था में ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोग उतना प्रभावी नहीं हो पाए, जितना ड्राइवर टिन्नू हो गया। इसी बीच, इस धड़े के मुखिया को गणना के दौरान चढ़ावा चोरी की जानकारी मिली।
पता चला कि यह गड़बड़ी लंबे समय से चल रही है। इस प्रकरण से उक्त ट्रस्ट पदाधिकारी को सूचित कर रंगे हाथ पकड़वाने के बारे में सोचा गया।
पांच जून को दोपहर में अचानक ट्रस्ट पदाधिकारी रामजन्मभूमि के यात्री सुविधा केंद्र (पीएफसी) पहुंच गए। सूत्रों ने बताया कि उन्होंने तुरंत सुरक्षाकर्मी को बुला कर निकलते समय एक गणना कर्मी की तलाशी करा दी, तो कुछ धन बरामद हो गया। उससे पीएफसी के कमरे में ले जाकर गहन पूछताछ हुई तो दूसरे लोगों के नाम भी सामने आ गए।
इसी के बाद गणना कार्य से जुड़े अनुकल्प मिश्र, लवकुश, अविनाश शुक्ला, राजेश पाठक को रोका गया। बाथरूम से भी बड़ी नकदी मिली। यह सब देख ट्रस्ट पदाधिकारी आवेशित हो गए और सबके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने की चेतावनी देकर निकल गए।
उन्हें मनाने व समझाने का प्रयास शुरू हुआ, इसी बीच कोई फोन आ गया और वह दबाव के चलते पीछे हट गए। हालांकि यह रणनीति जरूर बनी कि इन कर्मियों से पूछताछ कर पैसे बरामद कर लिए जाएं। बात बाहर न जाए, इसलिए विधिक कार्रवाई न कराई जाए।
तबसे इसी रणनीति पर सारी प्रक्रिया चलती रही, परंतु उसी धड़े ने सारी जानकारी परिसर के बाहर लोगों को दे दी। सपा प्रमुख अखिलेश यादव तक यह मामला पहुंचा, तो उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर दिया। तभी से चढ़ावा चोरी का प्रकरण सुर्खियों में छाया हुआ है।