2027 चुनाव को लेकर अखिलेश का कड़ा रुख, सपा की शर्तों ने सीट शेयरिंग पर बढ़ाया कांग्रेस का BP

सपा चुनाव से बहुत पहले ही सीट शेयरिंग की बातचीत की कमान पूरी तरह अपने हाथ में रखना चाहती है. समाजवादी पार्टी के नेता यह बिल्कुल नहीं चाहते कि गठबंधन की बातचीत आखिरी वक्त तक खिंचे या फिर उसमें किसी भी तरह की ढील दी जाए. वह शुरू से ही फ्रंट फुट पर खेलकर मोलतोल की ताकत अपने पास रखना चाहते हैं. चूंकि सपा यूपी में बीजेपी के बाद सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए वह चाहती है कि इंडिया गठबंधन की बागडोर पूरी तरह उसी के हाथों में रहे.

May 23, 2026 - 21:00
0 7
2027 चुनाव को लेकर अखिलेश का कड़ा रुख, सपा की शर्तों ने सीट शेयरिंग पर बढ़ाया कांग्रेस का BP

उत्तर प्रदेश में साल 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है. समाजवादी पार्टी (सपा) के मुखिया अखिलेश यादव ने ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के साथियों, खासकर कांग्रेस को एक साफ और बेहद कड़ा संदेश दे दिया है. 


अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि 2027 के महामुकाबले में सीट बंटवारे का इकलौता आधार सिर्फ और सिर्फ ‘जिताऊ उम्मीदवार’ ही होगा. गठबंधन की मजबूरियों के नाम पर अब कोई भी सीट किसी दल की झोली में नहीं जाएगी. सपा प्रमुख के इस कड़े रुख ने यूपी की सियासत में हलचल तेज कर दी है और सहयोगियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं.

मनी कंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, समाजवादी पार्टी के भीतर के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, अखिलेश यादव ने कांग्रेस सहित गठबंधन के सभी दलों से साफ कह दिया है कि वे जिन सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं, वहां के संभावित उम्मीदवारों के नामों की एक लिस्ट सौंपें. 

सिर्फ नाम सौंपने से काम नहीं चलेगा, बल्कि उसके साथ इस बात का पूरा ब्यौरा (डेटा) भी देना होगा कि उस उम्मीदवार के जीतने की कितनी गारंटी है, उसका जातीय समीकरण क्या है और जमीन पर उसकी पकड़ कैसी है. सपा लीडरशिप इन सभी नामों की बारीकी से जांच-परख करेगी. पार्टी केवल उन्हीं चेहरों पर दांव लगाने के मूड में है जो भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मजबूत रथ को रोकने का दम रखते हों.


राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अखिलेश यादव का यह कदम यूपी में समाजवादी पार्टी को विपक्ष की सबसे बड़ी और इकलौती मजबूत ताकत के रूप में स्थापित करने की कोशिश है.


सपा चुनाव से बहुत पहले ही सीट शेयरिंग की बातचीत की कमान पूरी तरह अपने हाथ में रखना चाहती है. समाजवादी पार्टी के नेता यह बिल्कुल नहीं चाहते कि गठबंधन की बातचीत आखिरी वक्त तक खिंचे या फिर उसमें किसी भी तरह की ढील दी जाए. 


वह शुरू से ही फ्रंट फुट पर खेलकर मोलतोल की ताकत अपने पास रखना चाहते हैं. चूंकि सपा यूपी में बीजेपी के बाद सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए वह चाहती है कि इंडिया गठबंधन की बागडोर पूरी तरह उसी के हाथों में रहे.

What's Your Reaction?

Like Like 1
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0
Mishra Shivani

Shivani Mishra Chief Desk Editor in NewsAsr.com and having vast experience in field of Journalism

Comments (0)

User