मुजफ्फरनगर:  ₹8000 'रिश्वत' लेकर जोड़ी हड्डी, सरकारी अस्पताल में  बाकी पैसे न मिलने पर दोबारा तोड़ी

पीड़ित विधवा मां जब अपनी दिव्यांग बेटी को न्याय दिलाने के लिए कलेक्ट्रेट पहुंची, तो उसकी आपबीती सुनकर हर कोई दंग रह गया. जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) कार्यालय में गुहार लगाने पहुंची मां का आरोप है कि पूर्व में डीएम के आदेश के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने मुफ्त इलाज नहीं किया और अब शिकायत करने पर उन्हें धमकाकर भगा दिया गया. इस मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने जांच के बाद कार्रवाई का भरोसा दिया है.

Jun 04, 2026 - 18:26
0 3
मुजफ्फरनगर:  ₹8000 'रिश्वत' लेकर जोड़ी हड्डी, सरकारी अस्पताल में  बाकी पैसे न मिलने पर दोबारा तोड़ी


उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद में जिला अस्पताल के एक डॉक्टर पर इलाज के नाम पर रिश्वत मांगने और पैसे न मिलने पर एक 14 वर्षीय मानसिक रूप से अस्वस्थ बच्ची का पैर जबरन मरोड़कर दोबारा तोड़ने का आरोप लगा है. 


पीड़ित विधवा मां जब अपनी दिव्यांग बेटी को न्याय दिलाने के लिए कलेक्ट्रेट पहुंची, तो उसकी आपबीती सुनकर हर कोई दंग रह गया. जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) कार्यालय में गुहार लगाने पहुंची मां का आरोप है कि पूर्व में डीएम के आदेश के बावजूद अस्पताल प्रशासन ने मुफ्त इलाज नहीं किया और अब शिकायत करने पर उन्हें धमकाकर भगा दिया गया. इस मामले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने जांच के बाद कार्रवाई का भरोसा दिया है.


पीड़ित महिला रेशमा के अनुसार,करीब डेढ़ महीने पहले उसकी मानसिक रूप से विक्षिप्त बेटी के दाहिने पैर की हड्डी टूट गई थी. वह उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंची, जहां ऑपरेशन के एवज में ₹25,000 की मांग की गई.


डॉक्टरों ने डीएम के पास जाने पर नाराजगी जताई और इलाज करने से मना कर दिया. आखिर में मजबूर होकर महिला ने कर्ज लेकर ₹8,000 दिए, जिसके बाद बच्ची का ऑपरेशन किया गया और बाकी रकम बाद में देने का दबाव बनाया गया.
चेकअप के बहाने डॉक्टर ने ढाया जुल्म, एक्स-रे में खुली पोल

आरोप है कि ऑपरेशन के कुछ दिनों बाद जब रेशमा बेटी को फॉलो-अप चेकअप के लिए अस्पताल लेकर पहुंची, तो वहां मौजूद डॉक्टर चतुर्वेदी ने बेहद नाराजगी से बात की और बकाया पैसे की मांग की. 


जब रेशमा ने इस संबंध में असमर्थता जताई तो डॉक्टर ने बच्ची का घुटना इतनी बेरहमी से मोड़ा कि बच्ची बुरी तरह चीख उठी. रेशमा का कहना है कि तब पैर से हड्डी टूटने की साफ आवाज आई थी.इसके बाद जब रेशमान ने इसका विरोध किया तो डॉक्टरों ने अभद्रता करते हुए उन्हें वहां से जबरन बाहर निकाल दिया. 

घर पहुंचने पर जब बच्ची का पैर अत्यधिक सूज गया और वह पूरी रात दर्द से तड़पती रही, तो मां ने निजी स्तर पर डिजिटल एक्स-रे कराया. एक्स-रे की रिपोर्ट में साफ हुआ कि बच्ची के पैर की हड्डी दोबारा टूट चुकी थी. दोबारा अस्पताल जाने पर डॉक्टरों ने न्याय देने के बजाय पीड़ित परिवार को डरा-धमकाकर खदेड़ दिया.

What's Your Reaction?

Like Like 3
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0
Sharma Kumar Manish

Associate Desk Editor

Comments (0)

User