Lawyer-Teacher Murder Case: वकील-शिक्षिका हत्याकांड में पूर्व SP MLC कमलेश पाठक समेत 10 को उम्रकैद
आज जिस कलेश पाठक को उम्रकैद की सजा मिली है, वो कभी मंजुल चौबे के बेहद करीबी हुआ करता था. मंजुल को कमलेश पाठक की परछाई और उनका अंगरक्षक तक कहा जाता था. जब मंजुल चौबे औरैया के तिलक महाविद्यालय से छात्र संघ अध्यक्ष चुने गए थे, तब कमलेश पाठक उनके प्रमुख समर्थकों में शामिल थे. दोनों की दोस्ती लंबे समय तक चर्चा में रही. हालांकि, दोनों की दोस्ती को साल 2006 में नजर लग गई.
उत्तर प्रदेश के औरैया में वकील मंजुल चौबे और उनकी सरकारी शिक्षिका बहन सुधा की हत्या के मामले में 6 साल का इंतजार खत्म हो चुका है. कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. एमपी-एमएलए कोर्ट ने समाजवादी पार्टी के पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक समेत 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है. साथ ही उम्रकैद की सजा सुनाई. इतना ही नहीं 50-50 हजार रुपये अर्थदंड का जुर्माना किया गया है. फैसले को देखते हुए कोर्ट परिसर की सुरक्षा बढ़ा दी गई थी.
बता दें, 15 जनवरी 2020 को मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. करीब 6 साल से चल रहे इस मामले में 900 से अधिक तारीखें पड़ीं और दोनों पक्षों की ओर से 72 गवाह पेश किए गए.
आज जिस कलेश पाठक को उम्रकैद की सजा मिली है, वो कभी मंजुल चौबे के बेहद करीबी हुआ करता था. मंजुल को कमलेश पाठक की परछाई और उनका अंगरक्षक तक कहा जाता था. जब मंजुल चौबे औरैया के तिलक महाविद्यालय से छात्र संघ अध्यक्ष चुने गए थे, तब कमलेश पाठक उनके प्रमुख समर्थकों में शामिल थे. दोनों की दोस्ती लंबे समय तक चर्चा में रही. हालांकि, दोनों की दोस्ती को साल 2006 में नजर लग गई.
2006 का नगर पालिका चुनाव मंजुल चौबे लड़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें कमलेश पाठक का सहयोग नहीं मिला. इसके बाद दोनों के बीच दूरी बढ़ने लगी. बाद में मंजुल चौबे भाजपा नेताओं के करीब आ गए, जबकि कमलेश पाठक सपा समर्थक रहे.
राजनीतिक दूरी बढ़ने के साथ दोनों की पुरानी दोस्ती धीरे-धीरे वर्चस्व की लड़ाई में बदल गई. विवाद पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास स्थित करीब एक बीघा जमीन को लेकर था. बताया जाता है कि इस जमीन से कमलेश पाठक और मंजुल चौबे के घर की दूरी 500 मीटर से भी कम थी.
आसपास के लोगों के मुताबिक, मंजुल का घर भी कमलेश पाठक ने बनवाया था. दोनों पहले इसी जमीन पर बैठकर चौपाल लगाया करते थे, लेकिन रिश्तों में खटास आने के बाद यही जमीन दोनों पक्षों के बीच विवाद का कारण बन गई.
15 जनवरी 2020 को कमलेश पाठक उसी विवादित जमीन पर कुर्सी डालकर बैठे थे. इसी दौरान मंजुल के पिता ने कथित तौर पर उन्हें बुरा-भला कहा और कुर्सी से नीचे गिरा दिया. विवाद बढ़ने पर दोनों पक्षों के लोग मौके पर पहुंच गए.
कमलेश पाठक का भाई संतोष और गनर भी वहां पहुंच गया. इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच कहासुनी बढ़ी और फायरिंग हो गई. फायरिंग में मंजुल चौबे और उनकी बहन सुधा को गोली लगी और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई.
डबल मर्डर के मामले में पुलिस ने जांच के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी. मामले में कुल 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था. 11 जुलाई 2020 को इनमें से 10 आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की गई थी. एक आरोपी के नाबालिग होने के कारण उसका मामला जुबेनाइल कोर्ट भेज दिया गया. गनर अवनीश प्रताप सिंह को गैंगस्टर के मामले में बरी कर दिया गया था, लेकिन हत्या का मुकदमा उसके खिलाफ जारी रहा.
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