श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर CM योगी ने लिखी पाती, लोगों से की खास अपील

हमारी सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कार्य कर रही है. श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल आनंदित करने वाली कथाएं नहीं, उनमें गहन आध्यात्मिक संदेश निहित है. माखन चोरी में सहजता और निश्छलता का संदेश मिलता है. गोप-गोपियों के साथ श्रीकृष्ण की आत्मीयता में प्रेम और समरसता का संदेश मिलता है और कालिया नाग के दमन में अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देता है. 

Aug 31, 2026 - 09:27
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर CM योगी ने लिखी पाती, लोगों से की खास अपील


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर प्रदेशवासियों के नाम पाती लिखी है और उन्हें उत्सव की शुभकामनाएं दी हैं. सीएम योगी ने इस अवसर पर अपनी विरासत के संरक्षण, सामाजिक समरसता और विकसित एवं गौरवशाली उत्तर प्रदेश के निर्माण का संकल्प लेने की अपील की और कहा कि श्रीकृष्ण के सत्य, धर्म, कर्म और लोकमंगल के संदेश को अपने जीवन में उतारें. 


सीएम योगी ने लिखा, भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की अर्धरात्रि में मथुरा के कारागार में जब नंदलाला का प्रकट हुए, तब असत्य और अन्याय के अंधकार के बीच सत्य और धर्म का प्रकाश प्रस्फुटित हुआ. श्रीकृष्ण का जीवन हमें लोककल्याणकारी शासन की मूल भावना की प्रेरणा भी देता है. अन्याय का प्रतिकार, धर्म की रक्षा, निर्बल का संरक्षण और लोकमंगल उनके जीवन-दर्शन के प्रमुख आधार रहे. 


सीएम ने लिखा, आज इसी भाव के साथ हमारी सरकार समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन में सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कार्य कर रही है. श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं केवल आनंदित करने वाली कथाएं नहीं, उनमें गहन आध्यात्मिक संदेश निहित है. माखन चोरी में सहजता और निश्छलता का संदेश मिलता है. गोप-गोपियों के साथ श्रीकृष्ण की आत्मीयता में प्रेम और समरसता का संदेश मिलता है और कालिया नाग के दमन में अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश देता है. 


श्रीकृष्ण का जीवन बताता है कि समाज की शक्ति सामूहिक सहकारिता में निहित है. गोवर्धन पर्वत धारण कर श्रीकृष्ण ने प्रकृति, पशुधन और कृषि आधारित जीवन के संरक्षण का संदेश दिया. गोवर्धन पूजा के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण ने सामूहिक एकजुटता की शक्ति का संदेश दिया. श्रीकृष्ण कुलीनता के नहीं, समरसता के प्रतीक हैं. श्रीकृष्ण समाज के प्रत्येक वर्ग के साथ खड़े रहे. 


द्वारकाधीश श्रीकृष्ण सुदामा के आत्मीय मित्र भी थे. सुदामा से मित्रता ने बताया, सच्चे संबंध पद, प्रतिष्ठा और संपन्नता से नहीं, आत्मीयता से बनते हैं. समरसता, समानता और आत्मीयता आज के समाज की आवश्यकता है. योगेश्वर श्रीकृष्ण का जीवन लोककल्याणकारी शासन की मूल भावना की प्रेरणा देता है. 


समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को सम्मान और सुरक्षा देने के लिए सरकार कार्य कर रही है. गरीबी मुक्त उत्तर प्रदेश, प्रतिभासंपन्न निपुण युवाओं को काम और अन्नदाताओं को सहारा देने का प्रयास किया जा रहा है. बेटियों को बेटों के समान आगे बढ़ने का अवसर देना लोक कल्याण की भावना है. गीता में श्रीकृष्ण ने कर्म, ज्ञान और कर्तव्य का मार्ग दिखाया. 


श्रीकृष्ण का कर्म, ज्ञान और कर्तव्य का संदेश किसी एक युग तक सीमित नहीं है. उत्तर प्रदेश की धरती श्रीकृष्ण की लीलाओं और संदेशों की पावन भूमि है. मथुरा, गोकुल, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और नंदगांव सनातन सांस्कृतिक चेतना के जीवंत केंद्र हैं. सीएम योगी ने अपील की जन्माष्टमी पर विरासत के संरक्षण और सामाजिक समरसता का संकल्प लें. विकसित एवं गौरवशाली उत्तर प्रदेश के निर्माण का संकल्प लेने और श्रीकृष्ण के सत्य, धर्म, कर्म और लोकमंगल के संदेश को जीवन में उतारने की अपील की.  

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Vidushi Mishra

Sub Desk Editor at NewsASR.Com

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