फैशन सा चल रहा है सरकार के फैसले नहीं मानना केंद्रीय मंत्री किरण रिजुजू ने चेताया

केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरण रिजिजू ने देश में पनपते जा रहे 'उपद्रवी तत्वों' को लेकर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि सरकार के निर्णयों को नहीं मानना यह आजकल फैशन बन गया है. उन्होंने कहा कि आजकल कुछ लोग कानूनी, वैध और संवैधानिक चीजों का 'ऐड़ी-चोटी का जोर लगाकर' विरोध करते हैं. फैशन सा चल रहा है सरकार के फैसले नहीं मानना केंद्रीय मंत्री किरण रिजुजू ने चेताया

Nov 26, 2021 - 03:50
Updated: 5 years ago
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फैशन सा चल रहा है सरकार के फैसले नहीं मानना केंद्रीय मंत्री किरण रिजुजू ने चेताया

कानून मंत्रालय के एक कार्यक्रम में केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा, 

'जब संसद कोई विधेयक पारित करती है या जब विधान सभा कुछ कानूनों को मंजूरी देती है, तो तब तक यह कहने का कोई कारण नहीं है कि हम इस अधिनियम का पालन नहीं करते हैं, या हम इस कानून का पालन नहीं करेंगे, जब तक कि यह असंवैधानिक न हो.'

इसके बाद केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा, 

'भारत एक लोकतांत्रिक देश है, इसलिए हमें विरोध करने का अधिकार है, वैचारिक मतभेद का अधिकार है. हमें असहमति का अधिकार है, लेकिन संवैधानिक रूप से जो कुछ भी किया गया है उसका सभी को सम्मान करना चाहिए.' उन्होंने कहा, 'कोई अधिनियम संवैधानिक है या असंवैधानिक इसपर न्यायपालिका को निर्णय लेने दें.'

केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरण रिजिजू ने देश में पनपते जा रहे 'उपद्रवी तत्वों' को लेकर चिंता व्यक्त की है और कहा है कि सरकार के निर्णयों को नहीं मानना यह आजकल  फैशन बन गया है. उन्होंने कहा कि आजकल कुछ लोग कानूनी, वैध और संवैधानिक चीजों का 'ऐड़ी-चोटी का जोर लगाकर' विरोध करते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि 
'कुछ लोगों के लिए यह दावा करना एक 'फैशन' बन गया है कि वे संविधान को स्वीकार नहीं करते. क्या यह देश में संकट जैसी स्थिति नहीं है?'

अपनी बात आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरण रिजिजूने कहा, 

'किसी ने मुझसे पूछा कि आप तो मंत्री है, कानून पास हो गया तो आप कानून को लागू क्यों नहीं कर पाते हैं. मेरे पास कोई जवाब नहीं था. मेरे लिए बहुत मुश्किल था. इस सीधे और आसान से सवाल का जवाब देना. हमें इस पर सोचना चाहिए, हम अपने कुर्सी पर बैठ कर क्यों योगदान दिया, ये सोचता हूं. हम संवैधानिक अधिकार के बारे में बात करते हैं, लेकिन अगर सबने संवैधानिक ड्यूटी के बारे में सोच लिया तो सब हल हो जाएगा. राइट्स अपने लिए है, ड्यूटी देश के लिए हैं. मौलिक अधिकार महत्वपूर्ण हैं, लेकिन मौलिक कर्तव्य उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है.'

केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री किरण रिजिजू ने यह टिप्पणी सोमवार से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र से पहले की है, जहां सरकार ने तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए एक विधेयक सूचीबद्ध किया है. 40 किसान संघ पिछले एक साल से इन कानूनों को निरस्त करने की मांग कर रहे हैं.

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Sharad Mishra

शरद मिश्र सर्व वर्ल्डवाइड मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर तथा कंपनी के स्वामीत्य न्यूज़ असर के प्रधान संपादक है उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि जन सरोकारिता पत्रकारिता की रही है अधिक जानकारी के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से जुड़े

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