बड़ा खुलासा: पुलिस ने दबोचा फर्जी डिग्री रैकेट का 25 हजार का इनामी, लालच देकर ठग चुका था 58 लाख

गिरफ्तार आरोपी के मोबाइल फोन की जांच में कई अहम सुराग मिले हैं। पुलिस ने उसके कब्जे से सात डिग्री और प्रमाणपत्र बरामद किए हैं। साथ ही जांच के दौरान उसके बैंक खाते में पिछले तीन वर्षों में लगभग 58 लाख रुपये के लेनदेन का पता चला है। पुलिस इस रकम के स्रोत और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

Jun 07, 2026 - 08:57
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बड़ा खुलासा: पुलिस ने दबोचा फर्जी डिग्री रैकेट का 25 हजार का इनामी, लालच देकर ठग चुका था 58 लाख

यूपी के कानपुर में फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाकर देशभर में सप्लाई करने वाले गिरोह के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई जारी है। इसी क्रम में पुलिस ने 25 हजार रुपये के इनामी आरोपी मयंक भारद्वाज को गिरफ्तार कर लिया है। मयंक इम्फाल स्थित एशियन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी का काउंसलर बताया जा रहा है और फर्जी डिग्री नेटवर्क में उसकी अहम भूमिका सामने आई है। आरोपी मयंक भारद्वाज को गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया।

पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि मयंक भारद्वाज का नाम फर्जी डिग्री नेटवर्क के कथित मास्टरमाइंड शैलेंद्र कुमार ओझा से पूछताछ के दौरान सामने आया था। जांच में पता चला कि शैलेंद्र ओझा, मयंक के माध्यम से विभिन्न पाठ्यक्रमों में छात्रों का दाखिला कराता था। अब तक 105 लोगों के दाखिले कराए जाने की जानकारी सामने आई है, जिन्हें बाद में मोटी रकम लेकर डिग्रियां उपलब्ध कराई गईं।


गिरफ्तार आरोपी के मोबाइल फोन की जांच में कई अहम सुराग मिले हैं। पुलिस ने उसके कब्जे से सात डिग्री और प्रमाणपत्र बरामद किए हैं। साथ ही जांच के दौरान उसके बैंक खाते में पिछले तीन वर्षों में लगभग 58 लाख रुपये के लेनदेन का पता चला है। पुलिस इस रकम के स्रोत और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।


पुलिस के अनुसार, एशियन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की संबद्धता भी जांच के दायरे में है। आरोपी ने यूनिवर्सिटी के यूजीसी से संबद्ध होने का दावा किया है, लेकिन पुलिस को इस संबंध में कई विसंगतियां मिली हैं। मामले की जांच के लिए शिक्षा विभाग को पत्र भेजा गया है।


जांच में यह भी सामने आया है कि शैलेंद्र ओझा और मयंक भारद्वाज की पहचान वर्ष 2023 में सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच डिजिटल और बैंकिंग लेनदेन के प्रमाण मिले हैं। पुलिस का दावा है कि नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है और इसमें छात्र उपलब्ध कराने, काउंसलिंग करने तथा डिग्रियां तैयार कराने के लिए अलग-अलग लोगों की जिम्मेदारियां तय थीं।


पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह हाईस्कूल से लेकर बीटेक, एलएलबी, डी-फार्मा, बी-फार्मा समेत विभिन्न शैक्षणिक और प्रोफेशनल डिग्रियां 50 हजार रुपये से लेकर ढाई लाख रुपये तक में उपलब्ध कराता था। इस नेटवर्क का विस्तार उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, उत्तराखंड, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, सिक्किम, कर्नाटक और मणिपुर समेत कई राज्यों तक फैला हुआ है।


गौरतलब है कि फरवरी में किदवई नगर क्षेत्र में हुई छापेमारी के दौरान इस बड़े फर्जी डिग्री रैकेट का खुलासा हुआ था। अब तक इस मामले में 10 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस का कहना है कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है और जल्द ही नेटवर्क से जुड़े और बड़े खुलासे किए जाएंगे।

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Mishra Shivani

Shivani Mishra Chief Desk Editor in NewsAsr.com and having vast experience in field of Journalism

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