Ganga Expressway: राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र को होगा गंगा एक्सप्रेस वे का बंपर फायदा
गंगा एक्सप्रेसवे केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि एक व्यापक औद्योगिक परिवर्तन की आधारशिला भी माना जा रहा है. यह एक्सप्रेसवे रायबरेली के ऊंचाहार से लेकर लालगंज सीमा तक एक सह-औद्योगिक गलियारे के रूप में विकसित होगा. ऊंचाहार में जहां एनटीपीसी का बड़ा विद्युत संयंत्र स्थित है,
वहीं लालगंज में आधुनिक रेल कोच फैक्ट्री पूरी क्षमता से संचालित हो रही है. ऐसे में यह एक्सप्रेसवे क्षेत्रीय औद्योगिक विकास को नई गति देगा. साथ ही यह किसानों के लिए भी किसी वरदान से कम नहीं होगा.
ऊंचाहार के पास टोल प्लाजा के समीप लगभग 200 एकड़ क्षेत्र में एक औद्योगिक कॉरिडोर विकसित करने की योजना है, जो स्थानीय स्तर पर रोजगार का बड़ा केंद्र बन सकता है. उद्योगों के स्थापित होने के बाद न केवल आसपास के लोगों को रोजगार मिलेगा,
बल्कि यहां उत्पादित वस्तुओं को नोएडा, मेरठ और दिल्ली जैसे बड़े औद्योगिक केंद्रों तक तेजी से पहुंचाया जा सकेगा. इससे परिवहन समय और लागत दोनों में कमी आएगी और उत्पादों के नुकसान की संभावना भी घटेगी।
रायबरेली कृषि क्षेत्र में भी लगातार प्रगति कर रहा है. ऊंचाहार, लालगंज और सलोन जैसे क्षेत्रों में कृषि उत्पादन मंडियां स्थापित हैं, जहां किसान दूर-दराज से अपनी सब्जियां, फल और अनाज बेचने के लिए आते हैं. चूंकि फल और सब्जियां जल्दी खराब होने वाली वस्तुएं हैं,
इसलिए समय पर बाजार तक न पहुंच पाने की स्थिति में किसानों को उन्हें कम कीमत पर बेचना पड़ता है. गंगा एक्सप्रेसवे के बनने के बाद किसानों को बड़ी मंडियों तक शीघ्र पहुंचने की सुविधा मिलेगी, जिससे उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा और नुकसान भी कम होगा.
एक समय रायबरेली में छोटे-बड़े मिलाकर लगभग 86 उद्योग संचालित थे और रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध थे. लेकिन संसाधनों की कमी और पूर्ववर्ती सरकारों की उपेक्षा के कारण धीरे-धीरे ये उद्योग बंद हो गए. वेस्पा फैक्ट्री, स्पिनिंग मिल सहित कई इकाइयां परिवहन संबंधी समस्याओं और बढ़ती लागत के चलते टिक नहीं सकीं.
ऐसे में गंगा एक्सप्रेसवे बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों के लिए पुनर्जीवन का कार्य कर सकता है. बेहतर कनेक्टिविटी के कारण अब उत्पादों का परिवहन सस्ता और तेज होगा, जिससे उद्योगों के फिर से स्थापित होने की संभावनाएं बढ़ेंगी.