ठेके देने के बदले इस रास्ते पैसा लेते थे आजम खां? ED ने मांगा हिसाब 494 करोड़ का, ट्रस्ट ने कहा- 45 ही खर्च हुए
ईडी सूत्रों के मुताबिक सरकारी ठेके हासिल करने वाले निजी ठेकेदारों ने कमाई का हिस्सा जौहर ट्रस्ट या यूनिवर्सिटी से जुड़े निर्माण और अन्य कार्य में खर्च किया. कुछ रकम को चेक और कुछ को आरटीजीएस के जरिए भेजा गया. तमाम ठेकेदारों और निर्माण कंपनियों के बैंक अकाउंट एनालिसिस, संपत्तियों से जुड़े कागजात, डिजिटल सामग्री की जांच के दौरान ईडी को यह जानकारी मिली है.
जौहर यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी को लेकर कई अपडेट सामने आए हैं. सरकारी ठेकों से जुड़ी रकम के डायवर्जन और उसको जौहर ट्रस्ट, जौहर यूनिवर्सिटी तक ट्रांसफर के सबूत के आधार पर ईडी ने कार्रवाई की है.
ईडी सूत्रों के मुताबिक सरकारी ठेके हासिल करने वाले निजी ठेकेदारों ने कमाई का हिस्सा जौहर ट्रस्ट या यूनिवर्सिटी से जुड़े निर्माण और अन्य कार्य में खर्च किया. कुछ रकम को चेक और कुछ को आरटीजीएस के जरिए भेजा गया. तमाम ठेकेदारों और निर्माण कंपनियों के बैंक अकाउंट एनालिसिस, संपत्तियों से जुड़े कागजात, डिजिटल सामग्री की जांच के दौरान ईडी को यह जानकारी मिली है.
साल 2012 से 2017 के दौरान कई सरकारी विभागों के ठेकेदारों, उनके सहयोगियों और ट्रस्ट, यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों के बीच वित्तीय लेनदेन के सुराग मिले. अब ईडी को पता लगाना है कि ठेकेदारों ने जौहर ट्रस्ट, यूनिवर्सिटी से जुड़े कार्यों के नाम पर दान, भुगतान या अन्य लेनदेन किस रूट से जौहर यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट तक पहुंचाया.
अब एजेंसी इस लेनदेन के स्रोत और आखिरी कड़ी का पता लगाने में जुटी है. ठेकेदारों की ओर से ट्रस्ट को किए गए भुगतान,कथित दान, वास्तविक कारोबार या धर्मार्थ लेनदेन थे या फिर अपराध से अर्जित रकम छिपाने और ट्रांसफर करने के लिए उसका इस्तेमाल किया गया.
ईडी इस पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुटी है. छापेमारी में हासिल दस्तावेज और डिजिटल सबूत की विस्तृत जांच के बाद मामले में तस्वीर और साफ हो सकती है. सूत्रों के मुताबिक सरकारी धन के दुरुपयोग और फर्जी दानदाताओं की जानकारी सामने आने के बाद ईडी ने कार्रवाई की.
यूनिवर्सिटी के भवनों के निर्माण में सरकारी विभागों के धन के दुरुपयोग ,फर्जी दानदाता ,डमी ट्रस्टी, काले धन के इस्तेमाल की जांच में ईडी जुटी हुई है. ईडी जांच में सामने आया कि ट्रस्ट ने 59 भवनों के निर्माण में मात्र 45 करोड़ रुपए खर्च होने का दावा किया. जबकि वास्तविक खर्च 494 करोड़ रुपए पाया गया.
काले धन को ट्रस्ट में डाइवर्ट करने के शक के चलते ही ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया. यूनिवर्सिटी निर्माण में आठ सरकारी विभागों का करीब 110 करोड़ रुपए भी खर्च हुए. जबकि विभागों से करीब 150 करोड़ रुपए खर्च होने के सबूत भी एजेंसी को मिले हैं. आजम खान के प्रभाव के चलते यूनिवर्सिटी के निर्माण में सांसद और विधायक निधि से करीब 4.57 करोड़ रुपए दिए गए थे.
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