गर्मी का सबसे बड़ा अलर्ट! खाल झुलसा देने वाली गर्मी 7 गुना बढ़ने वाली है; टीवी-फ्रिज से होंगे ज्यादा AC 

कैसे भारत में हीटवेव बढ़ेगी, फिर घरेलू AC यूजर्स की संख्या बढ़ेगी और फिर बिजली की खपत का प्रतिशत बढ़ ही रहा है. अगर फिर से गर्मी की बात करें तो भारत में पिछले पांच दशकों में 700 से अधिक बार बहुत गर्मी पड़ी है, इसका मतलब इतनी बार अचानक हीटवेव की लहरें आई हैं. 

गर्मी का सबसे बड़ा अलर्ट! खाल झुलसा देने वाली गर्मी 7 गुना बढ़ने वाली है; टीवी-फ्रिज से होंगे ज्यादा AC 

काफी समय से यह बहस हो रही कि ग्लोबल वार्मिंग बहुत ही खतरनाक तरीके से बढ़ रही है. इसके कई कारण हैं. इन सबके बीच भारत के लिए एक और चिंताजनक खबर सामने आई है. एक रिसर्च के मुताबिक भारत के शहरों में गर्मी बढ़ने वाली है. भारत की कई जगहों पर नए हीटवेव हॉटस्पॉट बनेंगे. 

वैज्ञानिकों ने साफ चेतावनी दी है कि तीव्र गर्मी यानि कि हीटवेव में काफी वृद्धि होगी. यह रिसर्च विज्ञान-प्रौद्योगिकी विभाग के महामना सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन क्लाइमेट चेंज रिसर्च ने की है. बताया गया है कि भारत में हीटवेव में चार से सात गुना तक बढ़ोत्तरी होगी. 

इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने मंगलवार को एक और चौंकाने वाला आंकड़ा पेश किया है कि भारत में घरेलू एयर कंडीशनर के यूजर्स की संख्या 2050 तक नौ गुना बढ़ जाएगी. इसका मतलब यह हुआ कि टीवी-फ्रिज से ज्यादा AC की संख्या होगी. यह दोनों आंकड़े अलग जरूर हैं लेकिन इनको एक साथ देखने और समझने की जरूरत है. 

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के एक नए विश्लेषण के मुताबिक भारत के उत्तर-पश्चिमी, मध्य और दक्षिण-मध्य के कई इलाके नए हीटवेव हॉट स्पॉट के रूप में उभरेंगे. महामना सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन क्लाइमेट चेंज रिसर्च ने बताया कि अगर ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन 2040 के आसपास एकदम उच्च स्तर पर पहुंच जाए और फिर घट जाए, तो भी भारत में हीटवेव लगभग चार से सात गुना बढ़ जाएगी. 

लेकिन अगर उत्सर्जन लगातार बढ़ता ही रहा तो हीटवेव की आवृत्ति 10 गुना तक बढ़ सकती है. एक रिपोर्ट के मुताबिक जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण 1961 और 2021 के बीच भारत में हीटवेव्स में लगभग औसतन ढाई दिनों की वृद्धि हुई है. 2060 तक इसके 12 से 18 दिन तक बढ़ने की उम्मीद है. यह अवधि भी चिंताजनक है.

वहीं मौसम विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक अकेले उत्तर-पश्चिम भारत में एक सीजन में लगभग चार हीटवेव की लहरें बढ़ेंगी, जिनकी कुल अवधि 30 दिन होगी. विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि इस पर बहुत जल्द कुछ ना कुछ एक्शन लेने की जरूरत पड़ेगी. सरकारों को जलवायु के लिए योजनाएं बनानी होंगी. हालांकि केंद्र ने हीट एक्शन प्लान पर राज्यों को दिशा-निर्देश पहले ही दिए हुए हैं. 

इसी बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने मंगलवार को बताया कि घरेलू एयर कंडीशनर के यूजर्स की संख्या 2050 तक नौ गुना बढ़ जाएगी. मतलब साफ है कि घरों में टीवी-फ्रिज से ज्यादा AC लगे हुए दिखाई देंगे. 

बताया गया कि भारत में AC यूजर्स की संख्या 2010 से तीन गुना बढ़ गई है, और अब हर 100 घरों में 24 एयर कंडीशनर हैं. इसके साथ एक और आंकड़ा यह भी है कि बिजली की खपत 2019 और 2022 के बीच 21% बढ़ी है और इसमें बिजली की मांग का लगभग 10% स्पेस कूलिंग की आवश्यकता से आता है. 

इन आंकड़ों से समझने की जरूरत है कि कैसे भारत में हीटवेव बढ़ेगी, फिर घरेलू AC यूजर्स की संख्या बढ़ेगी और फिर बिजली की खपत का प्रतिशत बढ़ ही रहा है. अगर फिर से गर्मी की बात करें तो भारत में पिछले पांच दशकों में 700 से अधिक बार बहुत गर्मी पड़ी है, इसका मतलब इतनी बार अचानक हीटवेव की लहरें आई हैं. 

इसके चलते इसी अवधि में 17,000 से अधिक लोगों की मौत हो गई है. भारत में भौगोलिक और मौसम की स्थिति ऐसी है कि जैसे-जैसे लोगों की आय बढ़ रही है, वैसे-वैसे एयर कंडीशनर खरीदने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ रही है.

2010 में प्रति 100 घरों में 10 एयर कंडीशनर थे, जो 2022 तक बढ़कर 24 हो गए हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि 24% घरों में एयर कंडीशनर हैं, बल्कि यह है कि 100 घरों में कुल 24 एयर कंडीशनर हैं, और कुछ घरों में एक से अधिक एयर कंडीशनर भी हो सकते हैं. 

यह आंकड़ा ऐसे ही चलता रहा तो भारत में घरेलू एयर कंडीशनर के यूजर्स की संख्या 2050 तक नौ गुना बढ़ जाएगी. मालूम हो कि एयर कंडीशनर और पंखे चलाने के लिए बिजली की खपत बहुत अधिक होती है. 2050 तक AC के लिए भारत की कुल बिजली मांग पूरे अफ्रीका में कुल बिजली की खपत से अधिक हो जाएगी.