कब है मोक्षदा एकादशी? सारे सांसारिक सुख और पितरों को मोक्ष दिलाता है ये एक व्रत, मोक्षदा एकादशी व्रत कथा- महत्व 

मार्गशीर्ष महीने के एकादशी व्रत शामिल हैं. जिन्‍हें उत्‍पन्‍ना एकादशी और मोक्षदा एकादशी कहते हैं. मार्गशीर्ष महीने में सत्‍यनारायण की पूजा करने से बहुत पुण्‍य मिलता है. साथ ही ये दोनों एकादशी व्रत करने से भगवान श्रीहरि की विशेष कृपा मिलती है. मोक्षदा एकादशी व्रत करने से व्रती को सारे सुख मिलते हैं, उसके सारे पाप नष्‍ट हो जाते हैं. साथ ही उसके पितरों को मोक्ष दिलाते हैं. मोक्षदा एकादशी का व्रत रखना, विधि-विधान से पूजा करना और व्रत की कथा पड़ना बहुत लाभ देगा.  

कब है मोक्षदा एकादशी? सारे सांसारिक सुख और पितरों को मोक्ष दिलाता है ये एक व्रत, मोक्षदा एकादशी व्रत कथा- महत्व 

भगवान कृष्‍ण का प्रिय महीना मार्गशीर्ष शुरू हो चुका है. इस महीने में कई ऐसे व्रत-त्‍योहार आते हैं, जिनका हिंदू धर्म में बड़ा महत्‍व है. इनमें मार्गशीर्ष महीने के एकादशी व्रत शामिल हैं. जिन्‍हें उत्‍पन्‍ना एकादशी और मोक्षदा एकादशी कहते हैं. मार्गशीर्ष महीने में सत्‍यनारायण की पूजा करने से बहुत पुण्‍य मिलता है. 

साथ ही ये दोनों एकादशी व्रत करने से भगवान श्रीहरि की विशेष कृपा मिलती है. मोक्षदा एकादशी व्रत करने से व्रती को सारे सुख मिलते हैं, उसके सारे पाप नष्‍ट हो जाते हैं. साथ ही उसके पितरों को मोक्ष दिलाते हैं. मोक्षदा एकादशी का व्रत रखना, विधि-विधान से पूजा करना और व्रत की कथा पड़ना बहुत लाभ देगा.  

मार्गशीर्ष महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 22 दिसंबर की सुबह 08.16 बजे शुरू होगी और 23 दिसंबर की सुबह 7 बजे समाप्‍त होगी. उदया तिथि के अनुसार, 22 दिसंबर को ही मोक्षदा एकादशी मनाई जाएगी और व्रत रखा जाएगा. 

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार वैखानस नाम के राजा ने सपने में देखा कि उनके पूर्वज नरक में बहुत ही यातना झेल रहे हैं. सुबह उठते ही उन्होंने अपने दरबार में पुरोहितों को बुलाया और इस सपने का अर्थ पूछा. तब राजपुरोहितों ने राजा को इस समस्या के समाधान के लिए ऋषि पर्वत मुनि के पास जाने की सलाह दी. 

पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार वैखानस नाम के राजा ने सपने में देखा कि उनके पूर्वज नरक में बहुत ही यातना झेल रहे हैं. सुबह उठते ही उन्होंने अपने दरबार में पुरोहितों को बुलाया और इस सपने का अर्थ पूछा. तब राजपुरोहितों ने राजा को इस समस्या के समाधान के लिए ऋषि पर्वत मुनि के पास जाने की सलाह दी. 

जब राजा ऋषि पर्वत मुनि के पास गए और उनसे इसका अर्थ, उपाय पूछा तो ऋषि ने कुछ देर के लिए अपनी आंखें बंद कीं. इसके बाद ऋषि ने बताया कि उनके पूर्वजों द्वारा जो पाप किए गए हैं, उसके परिणाम स्वरुप उन्‍हें नर्क में यातनाएं सहनी पड़ रही है. 

राजा ने ऋषि से अपने पितरों को यातनाओं से मक्ति दिलाने और मोक्ष दिलाने का उपाय पूछा. तब ऋषि के कहा कि यदि वे पूरे भक्ति-भाव से मोक्षदा एकादशी का व्रत करेंगे तो उनके पूर्वजों को जरूर मोक्ष की प्राप्ति होगी. इसके बाद राजा ने अपनी पत्नी, बच्चों और रिश्तेदारों के साथ बड़ी श्रद्धा के साथ यह व्रत किया. इससे भगवान विष्णु प्रसन्न हुए और उनके पूर्वजों को मोक्ष प्रदान किया. 

मोक्षदा एकादशी का महत्व (Significance of Mokshada Ekadashi)

मोक्षदा एकादशी के दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही व्यक्ति को सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस दिन भगवान कृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया था। इसी कारण इसे गीता जयंती भी कहा जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की विधिवत पूजा और व्रत रखने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही देवी-देवता और पितरों का आशीर्वाद मिलता है। मोक्षदा एकादशी के दिन गीता को पढ़ना या सुनाना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से व्यक्ति की हर मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। 

मोक्षदा एकादशी पूजा विधि (Mokshada Ekadashi Poojan Vidhi)

एकादशी पर ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों से निवृत्त होकर स्नान आदि करके साफ सुथरे वस्त्र धारण कर लेँ।
इसके बाद भगवान विष्णु का मनन करते हुए व्रत का संकल्प लें।
अब श्री हरि विष्णु की पूजा आरंभ करें। इसके लिए एक लकड़ी की चौकी में पीले रंग का वस्त्र बिछाकर भगवान विष्णु की तस्वीर या मूर्ति स्थापित कर दें।
सबसे पहले थोड़ा सा गंगाजल छिड़के। इसके बाद पीले चंदन का तिलक लगाएं।
विष्णु जी को फूल, माला, नैवेद्य, भोग के साथ तुलसी दल अर्पित करें।
अब घी का दीपक जलाने के साथ धूप जलाएं।
अब एकादशी की कथा पढ़ने के साथ विष्णु जी के मंत्र और चालीसा का पाठ करें।
अंत में विधिवत आरती करने के साथ भूल चूक के लिए माफी मांग लें।
दिनभर बिना अन्न ग्रहण किए व्रत रखें।